पॉर्न वेबसाइट ख़राब कर सकती है कंप्यूटर

अध्ययनों में पाया गया है कि दुनिया भर में मशहूर <link type="page"><caption> पॉर्न</caption><url href=" http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130403_europe_child_porn_fma.shtml " platform="highweb"/></link> यानी अश्लील सामग्री दिखाने वाली वेबसाइटें अपने उपयोगकर्ताओं के लिए ख़तरा बनती जा रही हैं.
लाखों लोग इन <link type="page"><caption> वेबसाइट</caption><url href=" Filename: http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/01/130128_twitter_vine_pp.shtml" platform="highweb"/></link> का उपयोग करते है. लेकिन इन पर मौज़ूद विज्ञापन कंप्यूटर को नुक़सान पहुंचाने वाली फ़ाइलें डाल देते हैं. उपयोगकर्ता को इसकी जानकारी नहीं हो पाती है.
शोधकर्ता कॉनराड लॉंगमोर ने पाया कि 'एक्सहैमस्टर' और 'पॉर्नहब' नाम की दो मशहूर <link type="page"><caption> वेबसाइटों</caption><url href=" Filename: http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2012/10/121022_porn_websites_stealing_images_sdp.shtml" platform="highweb"/></link> पर यह ख़तरा कुछ ज्यादा ही था.
आसान नहीं है शिकायत
उनका कहना है कि उपयोगकर्ताओं के लिए दुर्भावना से भरे इन विज्ञापनों की शिकायत कर पाना आसान होना चाहिए.
लॉंगमोर कहते हैं कि अभी तो यह केवल विंडोज का उपयोग करने वालों के लिए ही ख़तरा हैं. लेकिन इसके लिए जिम्मेदार लोग अब मोबाइल फ़ोन पर भी तेज़ी ध्यान दे रहे हैं.
हालांकि यह पाया गया कि किसी भी पॉर्न वेबसाइट पर उनका अपना कोई वायरस नहीं था. लेकिन उनपर लगे विज्ञापनों ने उपयोगकर्ताओं के लिए परेशानी खड़ी की.
लॉंगमोर ने बताया,''हम इन दुर्भावनापूर्ण विज्ञापनों को 'मालवरटाइजिंग' के नाम से पुकारते हैं.''
उन्होंने बताया कि दुनियाभर में इन विज्ञापनों को जिस तरह से बेचा जाता है, वह काफी जटिल है. ऐसे विज्ञापन कई बार दोबारा बेच दिए जाते हैं, इसलिए यह पता लगाना काफ़ी कठिन है कि आख़िर इनके पीछे हाथ किसका है. वे अक्सर अपना रूप बदलते रहते हैं.
लॉंगमोर ने इन आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए वेबसाइटों की नुक़सानदायक सामग्री का नियमित विश्लेषण करने वाली गूगल की सुविधा का सहारा लिया.
वेबसाइटों पर नजर रखने वाली वेबसाइट एलेक्सा के मुताबिक़ इंटरनेट पर लोकप्रियता के मामले में 'एक्सहैमस्टर' 46वें नंबर पर है. पिछले तीन महीनों में इसके 20 हज़ार 986 पन्नों में से 1067 पन्नों पर 'मालवरटाइजिंग' पाए गए.
एलेक्सा के आंकड़ों के मुताबिक़ एक औसत उपयोगकर्ता इसके 10.3 पन्नों को देखता है. इसका मतलब यह हुआ कि इस दौरान उसे इन नुकसानदायक विज्ञापनों का ख़तरा 42 फ़ीसदी है.
वहीं दूसरी मशहूर वेबसाइट पॉर्नहब के कुल पन्नों में से 12.7 फ़ीसदी पर नुक़सानदायक विज्ञापन पाए गए.
सतर्कता
लॉंगमोर कहते हैं, ''ऐसा लगता है कि मशहूर वेबसाइटों पर पिछले हफ़्तों या उससे पहले से ऐसी ख़तरनाक फाइलों में बढ़ोतरी हुई है.''
उन्होंने बताया कि गूगल की ओर से की गई जांच के समय सबसे अधिक मशहूर वेबसाइट 'एक्सवीडियो' पर कोई भी नुक़सानदाक विज्ञापन नहीं पाया गया. इसका मतलब यह हुआ कि उसे साफ किया गया था.

लॉंगमोर का मानना है कि बहुत से उपयोगकर्ता इन वेवसाइटों के इस खतरे से डरे हुए हैं, इसका मतलब यह हुआ कि बहुत सी मालवरटाइजिंग की शिकायत नहीं हो पाएगी.
उन्होंने कहा कि इस समस्या का एक भाग यह भी है कि सेक्स को वर्जित विषय माना जाता है.
उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि पॉर्न वेबसाइटें बहुत ही मशहूर है, इनमें से कई तो दुनिया की सौ मशहूर वेबसाइटों में भी शामिल हैं. इनमें से कुछ के पास बीबीसी से भी अधिक उपयोगकर्ता हैं. इसलिए यह एक बहुत ही गंभीर विषय है.
उन्होंने कहा कि इनके संचालकों को वेबसाइट्स पर दिखने वाले ऐसे विज्ञापनों की शिकायत की एक व्यवस्था बनानी चाहिए और नेटवर्क को भी कुछ जिम्मेदारी लेनी चाहिए.
उन्होंने कहा,''मुझे नहीं लगता की यह बहुत जल्द होने वाला है. लेकिन इनके उपयोगकर्ताओं के लिए अच्छी बात यह होगी की वे अपने कंप्यूटर को अप टू डेट रखे.''
बीबीसी ने एक्सहैमस्टर और पॉर्नहब के मालिकों से संपर्क किया. लेकिन इस संबध में उनसे अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली हैं.












