क्या होगा जब रोबोट चलाएगा आपकी कार?

आप अपनी कार खुद चलाते होंगे या शायद आपका <link type="page"><caption> ड्राइवर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/03/130306_robot_friend_pn.shtml" platform="highweb"/></link>. पर सोचिए क्या होगा जब आपकी कार कोई इंसान नहीं बल्कि एक <link type="page"><caption> मशीन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/03/130311_what_if_robot_warrior_ra.shtml" platform="highweb"/></link> चलाएगी.
कैलीफ़ॉर्निया में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के कैंपस में हमारी मुलाक़ात ऑटोमोटिव <link type="page"><caption> रिसर्च सेंटर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/02/130222_puppet_visual_theatre_vr.shtml" platform="highweb"/></link> में काम करने वाली हॉली से हुई. वे कहती हैं,“इस कार की स्टियरिंग पूरी तरह से कंप्यूटर संचालित है.”
उन्होंने कहा,“इसमें सब कुछ <link type="page"><caption> इलेक्ट्रॉनिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/11/121130_japan_robot_arm.shtml" platform="highweb"/></link> है, कुछ भी मशीनी नहीं है. ताकि इसे हम अपनी जरूरत के हिसाब से प्रोग्राम कर सकें.”
हॉली जिस गाड़ी को ड्राईव करती हैं उसे ‘एक्स वन’ कहते हैं और वह कार और समंदर किनारे चलने वाली बग्घी के मिले जुले रूप की तरह लगती है.
कार की बॉडी पर बहुत ज्यादा काम नहीं किया गया है बस इसके फ्रेम में मेटल ट्यूब्स का इस्तेमाल किया गया है.
इसमें सवारियों के बैठने के लिए बनी सीट का डिजाइन बाल्टी जैसा है और यह रस्सी से बंधी हुई होती है. जब ये कार सड़क पर चलती है तब इसके स्प्रिंग पर होने वाली एक-एक हरकत को आसानी से देखा जा सकता है.
इस गाड़ी में सौ फीसदी वायरिंग, स्विच और <link type="page"><caption> इलेकट्रॉनिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2012/11/121127_europe_robot_pk.shtml" platform="highweb"/></link> मशीनों का इस्तेमाल किया गया है.
बिना ड्राईवर के कार

इस कार में इस्तेमाल की गई तक़नीक भले ही आज असाधारण लगे लेकिन थोड़े वक्त के बाद ये आम हो जाएगी.
‘एक्स वन’ इस संस्थान द्वारा बनाई गई कई गाड़ियों में से एक है जो इलेक्ट्रॉनिक शोध का नतीजा है.
शुरु में भले ही इसका मक़सद इंसानो की मदद करने का रही हो लेकिन बाद में ये इंसानों की जगह भी ले सकता है.
इसकी संभावना इसलिए भी बनती है क्योंकि कई कारों को बनाने में कृत्रिम ज्ञान का इस्तेमाल किया जाता है.
उनमें इंजन को नियंत्रित करने की प्रणाली और कंप्यूटर लगे होते हैं जो यह तय करते हैं कि कार की मशीन ठीक से चले.
एबीएस के ज़रिए ये पता चलता है कि कब एक कार चालक ने अपनी कार का ब्रेक काफी तेज़ी से लगाया है और कब कार का पहिया घूमते हुए रुक गया.
इनकी जरूरत क्या है
अब तक गाड़ी चलाते वक्त उसकी कमान ड्राईवर के हाथों में ही होती है लेकिन बिना ड्राईवर की कारों पर चल रहे शोध से पता चलता है कि आनेवाले वक्त में गाड़ियों को अपने ऊपर अधिक अधिकार हो सकता है.
इंटरनेट कंपनी गूगल, वॉक्सवैगन, बॉस्च, जनरल मोटर्स और मर्सिडीज़ जैसी कंपनियां भी ऐसी कारों के विकास पर काम कर रही हैं.
लेकिन सवाल यह उठता है कि हमें बिना ड्राइवर वाली कारों की जरूरत क्या है.
स्टैनफोर्ड के ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर की कार्यकारी निदेशक स्वेन बीकर का मानना है कि सबसे बड़ा मुद्दा सुरक्षा का है.
बीकर कहते हैं,“हम इस बात में दिलचस्पी रखते हैं कि ड्राइवर की क्या खूबी होती है और कंप्यूटर क्या अच्छा कर सकता है और हम कार और ड्राइवर के तालमेल पर काम कर रहे हैं.”
नए सवाल
स्वेन बीकर ने कहा,“इसलिए हम ऐसी चीज की तलाश कर रहे हैं कि जब ड्राइवर मुश्किल में पड़ जाए और जैसा कि अक्सर होता है तब कार हालात संभाल ले.”
लेकिन ड्राइवर विहीन कारों के वजूद कुछ नए सवाल खड़े कर सकता है. उदाहरण के लिए दुर्घटना की स्थिति में कानूनी जिम्मेदारी किस पर आएगी.
भले ही साक्ष्य यह कहें कि कंप्यूटर कारों को बेहतर तरीके से चला सकता है लेकिन क्या लोग खुद को इलेक्ट्रॉनिक मशीनों के किसी डब्बे के हवाले छोड़ने के लिए तैयार होंगे.
कुछ सवालों के जवाब खोजे जा रहे हैं.
एक सीधा सा विचार है कि अगर आने वाले कल की गाड़ियाँ बिना ड्राइवरों के चलेंगी तो फुटपाथ पर खड़े लोग बेचैन हो सकते हैं.












