सिर्फ़ मशीन नहीं रह जाएगा रोबोट

इस हफ्ते पेश किए गए एक रोबोट ने दिखाया कि इंसानों जैसे दिखने वाले और व्यहावार करने वाले रोबोट (ह्यूमनॉयड) बनाना तकनीकी और मनोवैज्ञानिक रुप से कितना मुश्किल है.
रॉबी नाम का ये रोबोट बाकी अन्य रोबोट की तरह अपनी खूबियां दिखाना पसंद करता है.
लेकिन इस रोबोट की तकनीकी खासियत ये है कि इस रोबोट का डिज़ाइन इंसानी मांसपेशियों से प्रेरित है. अमूमन घनघनाती मोटर वाले रोबोट की बजाय इस रोबोट में 70 जोड़ ऐसे है जिनमें इंसानी मांसपेशियों की नकल की गई है.
इसका असर ये होगा कि ये रोबोट चलने में अधिक सहज होगा ना कि <link type="page"> <caption> पुराने रोबोट की तरह मशीनी चाल वाला</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2012/11/121127_europe_robot_pk.shtml" platform="highweb"/> </link>.
नई पीढ़ी के रोबोट
रॉबी के निर्माता और रॉल्फ फाइफर कहते हैं. "हमारी कोशिश है कि रॉबी नई पीढ़ी के रोबोटों का दूत बन सके. वो रोबोट जो इंसानों के साथ दोस्ताना तरीके से बातचीत कर सके."
इससे पहले कि इसके निर्माता इस रोबोट को घरों में रखे जाने वाले रोबोट की तरह पेश करना शुरू करें, उन्हें रोबोट के साथ जुड़ी हुई जनता की शंकाओं से पार पाना होगा.
लोगों में सबसे आम शंका है कि क्या रोबोट के साथ होना मज़ेदार है, <link type="page"> <caption> क्या रोबोट हमारे लिए उपयोगी हैं</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/10/121023_robot_operation_ml.shtml" platform="highweb"/> </link> और क्या रोबोट हमारे लिए सुरक्षित है. इन शंकाओं से पार पाना काफी मुश्किल भी है.
लचीला बदन

इस रोबोट को बनाने वाली टीम इंसानों से प्रेरित थी लेकिन उन्होंने जानबूझकर इसे दिखने में इंसानों जैसा नहीं बताया है.
रोबोट की मौजूदगी में लोग कैसा महसूस करते हैं. रॉल्फ फाईफर कहते हैं, “इस तरह के कई शोध हुए हैं जिनमें पता चला कि लोगों को रोबोट से तबतक कोई आपत्ति नहीं जबतक उन्हें रोबोट को एक मशीनी रूप में ही पेश किया जाए. भले ही रोबोट उनकी भावनाओं को समझे. लोगों को उस तरह की मशीन से कोई आपत्ति नहीं है.”
<link type="page"> <caption> रोबोट कर रहे हैं नौकरी का फैसला</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/09/120905_robot_job_aa.shtml" platform="highweb"/> </link>
अंग्रेज़ी सिखाते रोबोट
यूरोपीय संघ में हुए एक सर्वेक्षण में पता चला कि 60 प्रतिशत लोगों के अनुसार रोबोट को बच्चों को संभालने और बुजुर्गों की देखभाल करने के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
हालांकि कंप्यूटर वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक नियोल शार्की ने पाया है कि जापान और दक्षिण कोरिया में 14 ऐसी कंपनियां है जो बच्चों की देखभाल के रोबोट विकसित कर रही है.
दक्षिण कोरिया ने पहले ही <link type="page"> <caption> रोबोट का इस्तेमाल जेल गार्ड के तौर पर</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/10/121002_usplus_robot_police_pa.shtml" platform="highweb"/> </link> करके देखा है और तीन साल पहले उन्होंने योजना पेश की थी जिसमें रोबोट का इस्तेमाल बच्चों को अंग्रेजी सिखाने के लिए किया जाना था.
खिलौनों की तरह इस्तेमाल होने वाले रोबोट पहले ही बाज़ार में मौजूद हैं जिन्हें लगभग तीन हज़ार डॉलर में खरीदा जा सकता है. ये रोबोट चेहरा पहचान सकतें है, बच्चों को नाम से पुकारते हैं और बच्चों के साथ साधारण स्तर की बातचीत भी कर सकते हैं.
ये कुछ समय के लिए बच्चे का मन तो बहला सकता है लेकिन इस बच्चे की देखभाल करने वाले रोबोट की तरह नहीं बनाया गया है.
बच्चों को पढाएंगे

इस रोबोट की सीमित कार्यक्षमताओं के बावजूद हो सकता है कि आने वाले समय में इंसानी भावनाओं वाले रोबोट अस्पतालों, स्कूलों और घरों में कुछ खास कामों के लिए इस्तेमाल किए जा सकें.
नियोल शार्की के शोध में एक और बात उभरकर आई, जिसमें रोबोट वयस्क इंसानों से बेहतर साबित हुए. नियोल शार्की कहती हैं, “ना छूने जैसी रोक रोबोट पर लागू नहीं होगी. क्योंकि इनपर ये आरोप नहीं लग सकते कि उन्होंने शारिरिक शोषण की भावना के साथ बच्चों को छुआ. इसमें कोई नैतिक झिझक नहीं होगी.”
दर्द भी समझेगा रोबोट
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पीटर रॉबिन्सन कहते हैं, “अगर आप घर पर ऐसे मशीनी सहयोगी का इस्तेमाल करते हैं जो आपकी मदद करने के लिए ताकतवर है तो वो ही सहयोगी विनाशकारी होने के लिए भी उतना ही ताकतवर है. इसलिए बेहतर होगा कि रोबोट के साथ समझ और संवाद बेहतर हो.”
पीटर रॉबिन्सन की टीम ऐसे रोबोट बनाने की योजना पर काम कर रही है जो चेहरा पहचान सकेगा और ये भी बता सकेगा कि सामने वाला दर्द में है, खुश है या परेशान है.
रॉल्फ फाइफर मानते हैं कि एक दिन रोबोट हमारे घरों में ज़रूर होंगे, लेकिन ये अभी तय नहीं है कि वो रोबोट किसी खास काम के लिए होंगे या फिर बहुत बुद्धिमान और रिसपोंसिव एप्लीकेश के लिए. रॉल्फ फाइफर मानते हैं कि इसका फैसला बाज़ार करेगा.












