लौंग का प्राचीनतम पेड़ मिला

इंडोनेशिया के मसाला द्वीपों को पूरी दुनिया में जायफल, जावित्री, काली मिर्च और लौंग के सबसे अधिक उत्पादन के लिए जाना जाता है.
इन्हीं द्वीपों के एक टापू 'टर्नेट' में एक खास पेड़ का असाधारण इतिहास है.
इस टापू पर दुनिया का सबसे पुराना लौंग का पेड़ है जिसे 'एफो' कहा जाता है.
इस पेड़ को 'एफो' क्यों कहा जाता या फिर इसे किसने लगाया, ये भी किसी को नहीं पता. लेकिन ऐसा माना जाता है कि ये पेड़ 350 से 400 साल पुराना है.
ऐसा माना जाता है कि कई सालों तक 'टर्नेट' और उसके पड़ोसी टापू 'तिदोर' ऐसे एकमात्र टापू हुआ करते थे जहां जड़ी-बूटियों के गुण वाले ये पौधे पाए जाते थे.
ऐसा कहा जाता है कि टर्नेट में उगने वालीं लौंग को समुद्र के रास्ते मध्यपूर्व के देशों, यूरोप और चीन ले जाया जाता था.
6000 फीट की ऊंचाई
तिदोर द्वीप समुद्र-तल से 6000 फीट ऊपर स्थित है और इसके चारों तरफ पेड़-पौधों का झुरमुट है.
'एफो' नाम का लौंग का ये पेड़ कभी 40 मीटर ऊंचा और चार मीटर तक फैला हुआ करता था, जो अब सिर्फ एक बड़ा सा ठूंठ और खाली टहनियां बनकर रह गया है.
कुछ साल पहले तो कुछ गांववालों ने जलावन की लकड़ियों के लिए इस 'पेड़' को काटने की भी कोशिश की थी.
अगर नीदरलैंड्स की यूनाईटेड ईस्ट इंडिया कंपनी अपनी मनमानी करने में सफल होती तो शायद आज 'एफो' नाम का ये प्राचीन पेड़ जीवित नहीं पाया जाता.

क्योंकि नीदरलैंड की इस कंपनी ने इस खास पौधे को लगाने और उगाने का अधिकार सिर्फ अपने पास रखा था.
जिन जगहों पर वे ऐसा नहीं कर पाते थे, वहां लौंग के इन पौधों को या तो उखाड़ दिया जाता था या जला दिया जाता था.
'एफो' नाम के इस लौंग के प्राचीन पेड़ की किस्मत अच्छी थी क्योंकि एक फ्रांसीसी व्यक्ति 'एफो' का बीज चुराकर अपने साथ लेकर जाने में सफल रहा.
'एफो' का यही बीज फ्रांस से होते हुए सेशेल्स के द्वीपों और फिर अंत में जांजिबार पहुंची.
जांजिबार इस समय पूरी दुनिया में लौंग का सबसे बड़ा उत्पादक है.












