पक्षाघात के रोगियों के लिए रोबोटिक हाथ

इससे पहले भी रोबोटिक हाथ तैयार किए जा चुके हैं
इमेज कैप्शन, इससे पहले भी रोबोटिक हाथ तैयार किए जा चुके हैं

हॉंग कॉंग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक रोबोटिक हाथ तैयार किया है जो हाथ की उंगलियों में हरकत पैदा करता है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे पक्षाघात के रोगियों के जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन आ सकता है.

दस साल पहले भवन निर्माण कर्मी सैम ची को लकवा मार गया था.

वो अपने बाएं हाथ से कुछ भी पकड़ नहीं पाते थे लेकिन हॉंग कॉंग पॉलीटैक्निक विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने एक ऐसा हाथ तैयार किया जिससे वो अब अपनी उंगलियों की मांसपेशियों पर नियंत्रण कर पाते हैं.

सैम ची का कहना है कि वो अपने हाथ से झाड़ू पकड़ सकते हैं और घर के काम में पत्नी की मदद कर पाते हैं.

इस नए आविष्कार ने उन्हे नई आज़ादी दी है.

रोबोटिक हाथ

ये उपकरण एल्यूमीनियम का बना है और व्यक्ति के हाथ के ऊपर बंधा रहता है.

जब हाथ की मांसपेशियों से विद्युतीय तरंगें पैदा होती हैं तो ये उन्हे पहचान लेता है और हरकत में आ जाता है और उंगलियों को हिलने का आदेश देता है.

इस रोबोटिक हाथ का आविष्कार डॉ रेमंड टॉंग ने किया है.

वो कहते हैं, "जब हमारा मस्तिष्क संकेत भेजता है तो वो सुषुम्ना नाड़ी से होते हुए मांसपेशियों तक पहुंचते हैं. इससे मांसपेशियों में हरकत होती है जिसे इलैक्ट्रोमायोग्राम या ईएमजी कहते हैं".

"हम इस रोबोट की सहायता से इस ईएमजी की पहचान करते हैं और उसे रोबोट को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल करते हैं".

अभी तक 12 रोगियों पर इस उपकरण का प्रयोग किया जा चुका है.

जब कोई रोगी ये उपकरण लगवाने उनके पास आता है तो वो 20 दिनों तक एक-एक घंटे का प्रशिक्षण देते हैं जिससे वो इस हाथ का इस्तेमाल करना सीख सकें.

उनका कहना है कि पक्षाघात के रोगी अपने मस्तिष्क को फिर से प्रशिक्षित करके हाथ का इस्तेमाल करना शुरु कर सकते हैं.

हॉंग कॉंग पॉलीटैक्निक विश्वविद्यालय अब एक कम्पनी के साथ मिलकर इस रोबोटिक हाथ को बनाने और बेचने की कोशिश कर रहा है.

स्थानीय अस्पताल ने इसमें काफ़ी दिलचस्पी दिखाई है और इसका अंतरराष्ट्रीय पेटेंट विचाराधीन है.