You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
आर्टेमिस: चांद पर एक बार फिर इंसानों को भेजने की तैयारी शुरू, पर चुनौतियां क्या-क्या हैं
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने अपना अब तक का सबसे बड़ा रॉकेट लॉन्च कर दिया है. ये रॉकेट फ्लोरिडा में केप केनवरल से लॉन्च किया गया.
लॉन्च होते ही आर्टेमिस नाम का ये 100 मीटर लंबा रॉकेट भारी आवाज़ और तेज़ रोशनी के साथ आसमान की ओर उड़ गया.
इस अभियान के तहत चांद की दिशा में एक एस्ट्रोनॉट कैप्सूल भेजा जाना था, यानी एक ऐसा अंतरिक्ष यान जिसमें मानव भेजा जा सके.
ओरियन नाम के इस अंतरिक्ष यान में कोई इंसान नहीं था. लेकिन अगर यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले मिशनों में चांद की सतह पर जाने वाले इस तरह के यान में इंसान भी भेजा जा सकेगा.
बुधवार की सफल लॉन्चिंग से पहले आर्टेमिस की दो लॉन्चिंग नाकाम हो चुकी थी. तकनीकी दिक़्क़तों की वजह से अगस्त और सितंबर की लॉन्चिंग काउंट डाउन के दौरान नाकाम रही थी.
लेकिन इस बार इन दिक़्क़तों को सुलझा लिया गया था और ये रॉकेट बगैर किसी अड़चन के केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च हो गया.
नासा के प्रशासक बिल नेलसन ने कहा, ''मैंने अब तक की सबसे बड़ी फ़्लेम देखी. मैंने इससे पहले इतनी तेज़ आवाज़ महसूस नहीं की थी.''
रॉकेट सही तरीके से लॉन्च हो सके इसके लिए इसमें कई तकनीकी बदलाव किए गए थे. रॉकेट धरती से ऊपर उठ कर चांद की तरफ़ सही दिशा में जा सके इसके लिए खास इंतजाम किए गए थे.
आधी सदी बार फिर मून मिशन
अब इस अंतरिक्ष यान को अपने यूरोपियन प्रोपल्शन मॉड्यूल पर निर्भर रहना होगा ताकि पूरे मिशन के दौरान ये ठीक से आगे बढ़ते हुए काम करता रहे.
यूरोपियन स्पेस एजेंसी में ह्यूमन स्पेसलिफ्ट के डायरेक्टर डेविड पार्कर ने बीबीसी न्यूज़ से कहा, ''ओरियन की उड़ान की दिशा तय करते वक्त भी हमने सर्विस मॉडल की ओर से कुछ बदलाव किए. आगे हमारे सबसे दिलचस्प लम्हों में से वो लम्हा होगा जब ये चंद्रमा की कक्षा का चक्कर लगाकर सुरक्षित धरती पर लौट आए.''
दिसंबर में अपोलो 17 मिशन के पचास साल पूरे हो जाएंगे, जब आखिरी बार मनुष्य ने चांद की धरती पर कदम रखा था.
नासा ने अपने इस मौजूदा मून मिशन का नाम आर्टेमिस रखा है. ग्रीक मिथक कथाओं के मुताबिक़ आर्टेमिस अपोलो की जुड़वां बहन थी.
जटिल मिशनों की सिरीज़ होगी लॉन्च
नासा अब अगले एक दशक के दौरान और जटिल मिशनों की सिरीज़ लॉन्च करना चाहता है.
1972 में अपोलो के अंतरिक्ष यात्री जिन सरनेन ने चांद पर आखिरी बार अपने पैरों के निशान छोड़े थे. चांद की सतह से लौटते हुए उन्होंने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि हमारे वापस चांद पर लौटने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा. लेकिन अब 50 साल हो गए हैं. लेकिन आज एक बार फिर चांद पर मानव मिशन की दिशा में क़दम बढ़ा दिया गया है.
शक्तिशाली इंजनों के साथ अंतरिक्ष में छोड़ा गया नासा का नया रॉकेट हमें अंतरिक्ष यात्रा के नए दौर में ले जाएगा
सुरक्षित सिस्टम की गारंटी देनी होगी
अगर नासा का ये मिशन सफल रहा तो अगली बार इंसान यान में बैठ कर चांद के चक्कर लगा सकेगा और फिर चांद की सतह पर उतर भी सकेगा.
लेकिन अभी सफ़र जारी है. ओरियन अंतरिक्ष यान भले ही अपनी राह पर होगा, लेकिन इसे अभी दस लाख मील का सफ़र तय करना है. इसे चांद और इसकी कक्षा तक का सफर तय करके फिर धरती पर लौटना है. नासा को अंतरिक्ष यात्रियों को यह दिखाना होगा कि यह सिस्टम सुरक्षित है.
ओरियन 26 दिनों के सफर पर
ओरियन को 26 दिनों के सफर पर भेजा जा रहा है.
चांद की सतह के बिल्कुल नजदीक पहुंच जाने पर भी ओरियन इससे 100 किलोमीटर दूर रहेगा.
चांद से इसकी अधिकतम दूरी 70 हजार किलोमीटर होगी. इंसान के बनाए गए किसी भी अंतरिक्ष यान से यह अब तक की सबसे ज्यादा दूरी होगी.
ये 11 दिसंबर को धरती पर लौटेगा. यानी अब से साढ़े तीन हफ्ते के बाद.
वैज्ञानिकों में इस बात को लेकर ज्यादा चिंता है कि जब ओरियन धरती के वातावरण में दोबारा प्रवेश करेगा तो इसका हिट शील्ड बेहद ऊंचे तापमान को झेल सकेगा या नहीं.
क्योंकि यह धरती पर 38 हजार किलोमीटर प्रति घंटा यानी ध्वनि की रफ्तार से 32 गुना तेजी से लौटेगा. उस समय यह 3000 सेंटीग्रेड के तापमान से मुखातिब होगा. ऐसे में इसके अंदर लगे कवच को इसे झेलना होगा.
अभियान में ब्रिटेन की भूमिका
ब्रिटेन इस अभियान में अपनी भूमिका अदा कर रहा है. ब्रिटेन यूरोपियन स्पेस एजेंसी का सदस्य है. लेकिन सिर्फ इसी वजह से ये इसमें मदद नहीं कर रहा है. इसकी और भी वजहें हैं.
बुधवार को कॉर्नवेल में गूनहिली अर्थ स्टेशन ने ओरियन के रेडियो सिग्नल को पकड़ लिया था. ओरियन के अंतरिक्ष में गुजरते वक्त इसकी फ्रीक्वेंसी में आए बदलाव का विश्लेषण करते हुए इसने नासा की एक खास मदद की. नासा को इससे आगे किए जाने वाले सुधार के लिए आधार मिल गया.
गूनहिली एसएलएस रॉकेट के जरिये ऊपर पहुंचाए गए दस छोटे में से छह को निर्देश भेजता रहेगा.
गूनहिली के सीईओ ईयान जोन्स ने बताया, ''हमारी कंपनी को शुरू हुए 12 साल से भी कम वक्त हुआ है. हमारा मकसद अंतरिक्ष की गहराई में कम्यूनिकेशन का है.''
ये भी पढ़ें:-
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)