You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
लार्ज हैड्रॉन कोलाइडरः क्या अब सुलझेगा ब्रह्मांड में मौजूद डार्क मैटर का रहस्य?
डार्क मैटर क्या है - ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में गिनी जानेवाली इस एक पहेली को शायद अब वैज्ञानिक सुलझा सकेंगे. लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (एलएचसी) मंगलवार 5 जुलाई से फिर से अपनी पूरी ताक़त से काम करना शुरू कर रहा है.
ब्रह्मांड का तीन चौथाई हिस्सा डार्क मैटर से बना है. लेकिन वैज्ञानिकों को अब भी इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है.
अब स्विट्जरलैंड स्थित सर्न ( CERN) के नाम से मशहूर यूरोपियन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ न्यूक्लियर रिसर्च में मौजूद दुनिया के सबसे ताकतवर पार्टिकल एक्सलरेटर - लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर - को डार्क मैटर की तलाश में मदद के लिए खास तौर पर अपग्रेड किया गया है.
अगर वैज्ञानिक डार्क मैटर के रहस्यों को समझने में कामयाब रहते हैं तो ये पहली बार नहीं होगा जब लार्ज हार्डन कोलाइडर यानी एलएचसी को बड़ी सफलता हासिल हो रही होगी.
इससे पहले इसने हिग्स बोसोन का पता लगाया था जो 21वीं शताब्दी की सबसे बड़ी खोजों में से एक थी. इस साल हिग्स बोसोन को खोजे जाने के दस साल पूरे हो जाएंगे. इस कण और इससे जुड़े क्षेत्र के बगैर ब्रह्मांड में कुछ भी नहीं होता.
लंबी यात्रा
ब्रिटिश अणु भौतिकीविद डॉक्टर क्लारा नेलिस्ट उस टीम का अहम हिस्सा हैं जो डार्क मैटर को खोज निकालने के लिए बनाई गई है. लेकिन शीर्ष वैज्ञानिक बनने की उनकी यह यात्रा आसान नहीं रही है.
वह कहती हैं, "हमारे स्कूल में तो फिजिक्स के टीचर तक नहीं थे. ''
वह ए-लेवल के लिए वहां फिजिक्स नहीं पढ़ पाईं और बाद में वैज्ञानिक बनने के सपने को पूरा करने के लिए कहीं और जाना पड़ा.
उन्होंने कहा, '' फिजिक्स के उन अध्यायों को पढ़ने के लिए मुझे हफ्ते में दो दिन सफर करना पड़ता था. उनके लिए प्री-यूनिवर्सिटी परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार किए और उन्हें अपने स्कूल में बैठ कर ये परीक्षा देनी पड़ी. ''
लेकिन इन बाधाओं को पार कर क्लारा जल्द ही आगे की पढ़ाई के लिए मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी पहुंच गईं. यहां उन्होंने अपनी पीएचडी के लिए रिसर्च की. यहां उहोंने एलएचसी से जुड़े प्रयोगों पर काम करना शुरू कर दिया.
जब हिग्स बोसोन की खोज हुई
जब हिग्स बोसोन के बारे में पहली बार 2012 की मशहूर घोषणा हुई तो क्लारा सर्न में ही थीं.
वह बताती हैं, '' मैं उस ऐतिहासिक पल की साक्षी होने के लिए उस ऑडिटोरियम की सीट पाने के लिए इसके बाहर सोई थी, जहां हमारे डायरेक्टर उस नए खोजे गए कण के बारे में ऐलान करने वाले थे. उन्होंने कहा था कि उन्होंने नए कण की खोज की है और वो इसका ऐलान करने वाले हैं."
वो कहती हैं.'' इस खोज की यादें मुझे इन टीमों के साथ काम करने को प्रेरित करती हैं ताकि अगली बड़ी खोज कोशिश की जाए."
दरअसल हिग्स बोसोन की खोज ने पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरी थीं.
क्लारा कहती हैं, '' हिग्स बोसोन वास्तव में एक खास कण है क्योंकि शुरुआती कण जिस तरह से अपना द्रव्यमान ग्रहण करते हैं वो इससे जुड़ा है. जब ये कण हिग्स फील्ड में एक दूसरे के संपर्क में आते हैं तो द्रव्यमान हासिल कर लेते हैं. हिग्स बोसोन वो है जिसे हम हिग्स फील्ड का अस्तित्व दिखाने के प्रयोग में खोज सकते हैं.
दरअसल एक हिग्स फील्ड एक एनर्जी फील्ड है जो दूसरे बुनियादी कणों जैसे इलेक्ट्रॉन और क्वार्क्स को द्रव्यमान देता है.
हिग्स बोसोन को ईश्वरीय कण यानी 'गॉड पार्टिकल' कहा गया क्योंकि द्रव्यमान हासिल करने की प्रक्रिया को बिग बैंग से जोड़ा गया है. माना जाता है कि बिग बैंग से मौजूदा ब्रह्मांड का अस्तित्व सामने आया है.
क्लारा कहती हैं, '' पिछले कुछ साल बड़े रोमांचक रहे क्योंकि हम अपने एक्सलेरेटरों की मरम्मत और इस पर किए जा रहे प्रयोगों, दोनों को अपग्रेड कर रहे थे.
इस अपग्रेडेशन का मतलब ये कि अब ज्यादा ताकतवर हो जाएगा. यानी अब ज्यादा कण एक दूसरे से टकराएंगे और उनमें ज्यादा घर्षण होगा. इसका मतलब विश्लेषण के लिए और ज्यादा डेटा उपलब्ध होंगे.
एलएचसी अविश्वसनीय तौर पर बहुत बड़ी मात्रा में ऊर्जा का इस्तेमाल करता है. एक साल में सर्न एक छोटे शहर के बराबर बिजली की खपत कर लेता है. यानी एक साल में तीन लाख घरों में जितनी बिजली खर्च होती है उतनी बिजली सर्न में खर्च होती है.
इसमें से कुछ ऊर्जा प्रोटोन की रफ्तार बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कियाा जाता है. ये कोशिश इसकी रफ्तार लगभग प्रकाश की रफ्तार बढ़ाने के लिए की जाती है ताकि जब ये टकराए तो छोटे कणों में बंट जाएं.
रहस्यमयी डार्क मैटर
क्लाराकहती हैं, '' सर्न में हमें उम्मीद है कि ये सभी डेटा डार्क मैटर के रहस्यों को खोलने में मददगार साबित होंगे.
क्लारा कहती हैं, '' हमारे ब्रह्मांड का ज्यादा 80 से 85 फीसदी का हिस्सा डार्क मैटर से बना है. इसका नाम डार्क मैटर इसलिए है क्योंकि यह प्रकाश से संपर्क नहीं करता है. इसलिए इस हम इसे देख नहीं सकते.
वास्तव में सबसे दिलचस्प तो ये है कि हम अब भी ये नहीं जानते कि आखिर ये है क्या? वैज्ञानिकों ने अभी तक डार्क मैटर के बारे में अब तक सिर्फ अप्रत्यक्ष सुबूतों को ही परखा है. सीधी तौर पर इसकी कोई निश्चित खोज अभी तक नहीं हो पाई है.अभी भी यह कण रहस्य के आवरण में लिपटा हुआ है.
डार्क मैटर को लेकर अलग-अलग राय
आखिर ये कण कैसा हो सकता है. इससे जुड़े कई मत हैं. वैज्ञानिकों का सबसे पसंदीदा थ्योरी में से एक है दुनिया WIMP यानी वीकली इंटरएक्टिव मैसिव पार्टिकल ( Weakly Interacting Massive Particle.) है.
क्लारा कहती हैं, "डार्क मैटर अभी भी एक बड़ा रहस्य बना हुआ है. अब हम ये देखने की कोशिश में लगे हैं क्या यह हमारे प्रयोगों में तैयार हो सकता है. ''
वैज्ञानिकों के लिए ब्रह्मांड वो रहस्य बन गया है जो लगातार उन्हें उलझाए हुए है. हमें अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि आखिर सबसे ज्यादा किस चीज से बना है.
क्लारा कहती हैं, ''मेरा निजी लक्ष्य तो ये है कि मैं अपने करियर में ही डार्क मैटर की तलाश करूं. वरना ब्रह्मांड हमारे लिए रहस्य ही रह जाएगा."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)