मंगल ग्रह पर चीन के ज़ूरॉन्ग रोवर ने जब अपनी ली सेल्फ़ी

मंगल ग्रह पर भेजे गए चीन के रोवर ने नई तस्वीरें भेजी हैं जिनमें एक सेल्फी भी शामिल है.

मई में मंगल ग्रह की सतह पर उतरे चीन के रोवर ज़ूरॉन्ग ने अपने वायरलैस कैमरे को ज़मीन की तरफ साधा और फिर कुछ पीछे हट कर तस्वीर ली.

इस तस्वीर में ज़ूरॉन्ग रोवर के दाईं तरफ एक रॉकेट पावर प्लेटफार्म है जिसके ज़रिए ये छह पहियों का रोबोट मंगल ग्रह की सतह पर उतरा था. दोनों पर ही चीन का राष्ट्रीय ध्वज प्रमुखता से दिख रहा है.

दूसरी तस्वीर में सिर्फ प्लेटफॉर्म ही दिखाई दे रहा है.

साथ ही वो रैंप भी दिख रही है जिससे रोबोट प्लेटफार्म से उतरकर मंगल ग्रह की सतह पर पहुंचा. रोबोट के घूमने से सतह पर बने निशान भी दिखाई दे रहे हैं.

तीसरी तस्वीर में लैंडिंग साइट से क्षितिज की तरफ़ का दृश्य दिख रहा है.

चीन का रोबोट मंगल ग्रह के उत्तरी गोलार्ध के यूटोपिया प्लेनीशिया इलाक़े में उतरा है.

इस रोवर मिशन की कामयाबी के जश्न में आयोजित समारोह में चीन की अंतरिक्ष एजेंसी ने ये तस्वीरें जारी की हैं.

कैसा है रोवर

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि ये रोवर मार्स पर कम से कम मंगल ग्रह के 90 दिनों तक काम करेगा.

नासा ने 2000 के दशक में जो स्प्रिट और अपोर्च्यूनिटी रोवर भेजे थे ये रोवर उन जैसा ही दिखता है.

चीन का ये रोवर 240 किलोवज़न का है. इस पर एक ऊंचा मास्ट भी है जिस पर कैमरे और आवागमन में मदद करने वाले उपकरण लगे हैं.

इसमें पांच दूसरे उपकरण लगे हैं जो मंगल ग्रह के खनिजों, वातावरण और मौसम की परख करेंगे.

अमेरिका के मौजूदा रोवर क्यूरोसिटी और पर्सेविएरेंस की तरह ज़ूरॉन्ग में भी लेज़र उपकरण हैं जो सतह में छेद करके पदार्थों का रसायनिक आंकलन करने में सक्षम हैं.

इसमें सतह और सतह के नीचे पानी की खोज करने में सक्षम एक रडार भी है. नासा के पर्सेविएरेंस रोवर के पास भी ये क्षमता है.

गुरुवार को अमेरिका की एरिज़ोना यूनिवर्सिटी ने अंतरिक्ष से ली गई जूरॉन्ग रोवर की रंगीन तस्वीर जारी की थी.

यूनिवर्सिटी का कैमरा जिसका नाम हाईराइज़ है नासा के मार्स ऑर्बिटर पर तैनात है. ये ऑर्बिटर मंगल ग्रह पर नज़र रखता है.

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