कोरोना से ठीक होने के बाद, क्या वैक्सीन की एक डोज़ ही काफ़ी?

कोरोना वैक्सीन

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    • Author, सरोज सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

वैक्सीन की क़िल्लत की ख़बरों के बीच अगर ऐसी खब़र आ जाए जिसमें सिंगल डोज़ से काम चलने की बात हो, तो ज़ाहिर है सब बड़े ध्यान से और दिलचस्पी से उस पढ़ेंगे. ऐसी ही एक ख़बर उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर से आई है.

उत्तर प्रदेश के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसरों ने शोध में पाया है कि कोरोना संक्रमण से ठीक हुए लोगों में वैक्सीन की एक डोज़ ही पर्याप्त है.

अपने शोध के नतीजों के बारे में बीएचयू के प्रोफ़ेसरों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा है. उन्होंने अपने शोध के नतीजों के आधार पर सुझाव दिया है कि जो लोग कोरोना संक्रमण से ठीक हो गए हैं उन्हें वैक्सीन की एक ही डोज़ लगाई जाए.

उनका तर्क है कि ऐसा करने से 2 करोड़ वैक्सीन की डोज़ बचाई जा सकती है. ग़ौरतलब है कि भारत में कोरोना संक्रमण से ठीक होने वालों की संख्या 2 करोड़ से ज़्यादा है. भारत में वैक्सीन की क़िल्लत की ख़बरों के बीच इस ख़बर ने काफ़ी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है.

बीएचयू के तीन प्रोफ़ेसर
इमेज कैप्शन, बीएचयू में न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफ़ेसर विजय नाथ मिश्रा (दाएं) , प्रोफ़ेसर अभिषेक पाठक (बीच में) और मॉलिक्यूलर एंथ्रोपोलॉजी विभाग के एक प्रोफ़ेसर ज्ञानेश्वर चौबे ( बाएं)

बीएचयू में शोध और उनके नतीजे

बीएचयू में न्यूरोलॉजी विभाग के दो प्रोफ़ेसर विजय नाथ मिश्रा और प्रोफ़ेसर अभिषेक पाठक और मॉलिक्यूलर एंथ्रोपोलॉजी विभाग के एक प्रोफ़ेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने 20 लोगों पर ये शोध किया है जो कोरोना से ठीक हो चुके थे.

उन्होंने पाया कि कोविड-19 वैक्सीन की पहली डोज़ पहले 10 दिन में उन लोगों में पर्याप्त एंटीबॉडी बना देती है, जो कोरोना संक्रमण से उबर चुके हैं. वैक्सीन की पहली डोज़ कोरोना से संक्रमित नहीं हुए लोगों में उतनी एंटीबॉडी नहीं बनाती.

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लेकिन क्या 20 लोगों पर की गई स्टडी के आधार पर इस तरह के सुझाव प्रधानमंत्री को भेजना कितना सही है?

इस सवाल के जवाब में प्रोफ़ेसर चौबे ने बीबीसी से कहा, "विश्व के दूसरे देशों में इस तरह की स्टडी हुई है. अमेरिका में mRNA वैक्सीन पर इसी तरह का शोध हुआ और उसके नतीजे भी हमारे शोध के नतीजे जैसे ही हैं. इससे स्पष्ट होता है कि हमारे शोध में भी दम है. हमने केवल सुझाव दिया है. भारत सरकार के पास संसाधन की कमी नहीं है. हमारे शोध के नतीजों और विदेश में हुए शोध के नतीजों के आधार पर केंद्र सरकार खु़द भी इस दिशा में डेटा जमा कर, काम कर सकती है. मुश्किल से इसमें एक महीने का वक़्त लगेगा."

प्रोफ़ेसर चौबे का कहना है कि ये स्टडी उत्तर भारत के लोगों पर फरवरी के महीने में की गई थी, जो कोरोना की पहली लहर में संक्रमित हुए थे और उन्हें कोविशील्ड वैक्सीन लगी थी. कोवैक्सीन पर ऐसी ही स्टडी वो अब कर रहे हैं.

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क्या है इसके पीछे का वैज्ञानिक आधार

मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की हेड डॉक्टर सुनीला गर्ग मानती हैं कि वैज्ञानिक आधार पर देखें, तो शोध के नतीजों में जो कहा गया है वो संभव है. एक बार किसी तरह के संक्रमण होने के बाद शरीर के अंदर के मेमोरी सेल्स याद रखते हैं कि अगली बार वही बीमारी हो तो किस तरह से उनका मुक़ाबला करना है. कोरोना के संक्रमण के बाद शरीर में वायरस के ख़िलाफ़ एंटीबॉडी बन ही जाते हैं और वायरस से मुक़ाबला करने के लिए मेमोरी सेल्स ट्रेन हो जाते हैं. यानी जिनको कोरोना हो गया है, उनको एक तरीक़े से वैक्सीन की पहली डोज़ लग गई.

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लेकिन डॉक्टर सुनीला एक और बात जोड़ती है. कुछ वैक्सीन नए वेरिएंट के ख़िलाफ़ भी कारगर साबित हो रहे हैं. लेकिन कोविड-19 एक बार होने के बाद दूसरे वेरिएंट से संक्रमित होने का ख़तरा (कम ही सही) रहता है. इस वजह से भारत सरकार की दो डोज़ की गाइडलाइन को ही फ़ॉलो करना सही है.

डॉक्टर सुनीला केंद्र सरकार के कोविड-19 टास्क फ़ोर्स की सदस्य भी हैं.

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भारत सरकार का पक्ष

बीएचयू के प्रोफ़ेसरों ने अपने सुझाव 15 दिन पहले भेज दिए थे. लेकिन सरकार की तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया है. ग़ौर करने वाली बात है कि बीएचयू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में ही आता है.

अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ भारत सरकार टीकाकरण अभियान की ट्रैकिंग के लिए नया प्लेटफ़ॉर्म तैयार कर रही है. इससे टीकाकरण रणनीति को और बेहतर बनाने में सहूलियत होगी.

इसमें अलग-अलग वैक्सीन की डोज़ मिलाने से लेकर सिंगल वैक्सीन डोज़ के असर को भी ट्रैक करने के बाद डेटा जमा किया जाएगा, जिससे टीकाकरण रणनीति को समय-समय पर बदलने में मदद मिले. लेकिन अभी ये स्पष्ट नहीं है कि भारत सरकार वैक्सीन की सिंगल डोज़ का असर कोविड-19 से ठीक हुए लोगों में ही ट्रैक कर रही है या फिर आम जनता में भी.

ग्लोबल वैक्सीन रोलआउट

टेबल स्क्रॉल करें
विश्व
61
12,12,05,24,547
चीन
87
3,40,36,43,000
भारत
66
1,97,89,18,170
अमरीका
67
59,62,33,489
ब्राजील
79
45,69,03,089
इंडोनेशिया
61
41,75,22,347
जापान
81
28,57,56,540
बांग्लादेश
72
27,87,85,812
पाकिस्तान
57
27,33,65,003
वियतनाम
83
23,35,34,502
मैक्सिको
61
20,91,79,257
जर्मनी
76
18,29,26,984
रसियन फेडरेशन
51
16,89,92,435
फिलीपिंस
64
15,38,52,751
ईरान
68
14,99,57,751
ब्रिटेन
73
14,93,97,250
तुर्की
62
14,78,39,557
फ्रांस
78
14,61,97,822
थाईलैंड
76
13,90,99,244
इटली
79
13,83,19,018
दक्षिण कोरिया
87
12,60,15,059
अर्जेंटीना
82
10,60,75,760
स्पेन
87
9,51,53,556
मिस्र
36
9,14,47,330
कनाडा
83
8,62,56,122
कोलंबिया
71
8,57,67,160
पेरू
83
7,78,92,776
मलेशिया
83
7,12,72,417
सऊदी अरब
71
6,67,00,629
बर्मा
49
6,22,59,560
चिली
92
5,96,05,701
चाइनीज ताइपे
82
5,82,15,158
ऑस्ट्रेलिया
84
5,79,27,802
उजबेकिस्तान
46
5,57,82,994
मोरक्को
63
5,48,46,507
पोलैंड
60
5,46,05,119
नाइजीरिया
10
5,06,19,238
इथियोपिया
32
4,96,87,694
नेपाल
69
4,68,88,075
कंबोडिया
85
4,09,56,960
श्रीलंका
68
3,95,86,599
क्यूबा
88
3,87,25,766
वेनेजुएला
50
3,78,60,994
दक्षिण अफ्रीका
32
3,68,61,626
इक्वेडोर
78
3,58,27,364
नीदरलैंड्स
70
3,33,26,378
यूक्रेन
35
3,16,68,577
मोजाम्बिक
44
3,16,16,078
बेल्जियम
79
2,56,72,563
संयुक्त अरब अमीरात
98
2,49,22,054
पुर्तगाल
87
2,46,16,852
रवांडा
65
2,27,15,578
स्वीडन
75
2,26,74,504
यूगांडा
24
2,17,56,456
ग्रीस
74
2,11,11,318
कजाखस्तान
49
2,09,18,681
अंगोला
21
2,03,97,115
घाना
23
1,86,43,437
इराक
18
1,86,36,865
कीनिया
17
1,85,35,975
ऑस्ट्रिया
73
1,84,18,001
इसराइल
66
1,81,90,799
ग्वाटेमाला
35
1,79,57,760
हांगकांग
86
1,77,31,631
चेक गणराज्य
64
1,76,76,269
रोमानिया
42
1,68,27,486
हंगरी
64
1,65,30,488
डोमिनिकन रिपब्लिक
55
1,57,84,815
स्विट्जरलैंड
69
1,57,59,752
अल्जीरिया
15
1,52,05,854
होंडूरास
53
1,44,44,316
सिंगापुर
92
1,42,25,122
बोलिविया
51
1,38,92,966
ताजकिस्तान
52
1,37,82,905
अजरबैजान
47
1,37,72,531
डेनमार्क
82
1,32,27,724
बेलारूस
67
1,32,06,203
ट्यूनीशिया
53
1,31,92,714
आइवरी कोस्ट
20
1,27,53,769
फिनलैंड
78
1,21,68,388
जिम्बाब्वे
31
1,20,06,503
निकारागुआ
82
1,14,41,278
नॉर्वे
74
1,14,13,904
न्यूजीलैंड
80
1,11,65,408
कोस्टा रिका
81
1,10,17,624
आयरलैंड
81
1,09,84,032
अल सल्वाडोर
66
1,09,58,940
लाओ पीपुल्स डेम रिपब्लिक
69
1,08,94,482
जॉर्डन
44
1,00,07,983
पराग्वे
48
89,52,310
तंजानिया
7
88,37,371
उरुग्वे
83
86,82,129
सर्बिया
48
85,34,688
पनामा
71
83,66,229
सूडान
10
81,79,010
कुवैत
77
81,20,613
जाम्बिया
24
71,99,179
तुर्केमेनिस्तान
48
71,40,000
स्लोवाकिया
51
70,76,057
ओमान
58
70,68,002
कतर
90
69,81,756
अफ़ग़ानिस्तान
13
64,45,359
गिनी
20
63,29,141
लेबनान
35
56,73,326
मंगोलिया
65
54,92,919
क्रोएशिया
55
52,58,768
लिथुआनिया
70
44,89,177
बुल्गारिया
30
44,13,874
सीरिया
10
42,32,490
फलस्तीन
34
37,34,270
बेनिन
22
36,81,560
लीबिया
17
35,79,762
नीजेर
10
35,30,154
डीआर कांगो
2
35,14,480
सियरा लियोन
23
34,93,386
बहरीन
70
34,55,214
टोगो
18
32,90,821
किर्गिजस्तान
20
31,54,348
सोमालिया
10
31,43,630
स्लोवेनिया
59
29,96,484
बुर्किना फासो
7
29,47,625
अल्बानिया
43
29,06,126
जॉर्जिया
32
29,02,085
लातविया
70
28,93,861
मौरिटानिया
28
28,72,677
बोत्सवाना
63
27,30,607
लाइबेरिया
41
27,16,330
मॉरीशस
74
25,59,789
सेनेगल
6
25,23,856
माली
6
24,06,986
मेडागास्कर
4
23,69,775
चैड
12
23,56,138
मलावी
8
21,66,402
मोल्डोवा
26
21,65,600
अर्मीनिया
33
21,50,112
एस्टोनिया
64
19,93,944
बोस्निया और हर्जेगोविना
26
19,24,950
भूटान
86
19,10,077
एफवाईआर मेसिडोनिया
40
18,50,145
कमारू
4
18,38,907
कोसोवो
46
18,30,809
साइप्रस
72
17,88,761
टिमूर-लेस्टे
52
16,38,158
फिजी
70
16,09,748
त्रिनिडाड एंड टोबैगो
51
15,74,574
जमैका
24
14,59,394
मकाऊ
89
14,41,062
माल्टा
91
13,17,628
लक्जेमबर्ग
73
13,04,777
दक्षिण सूडान
10
12,26,772
सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक
22
12,17,399
ब्रुनई दारुसलाम
97
11,73,118
गुयाना
58
10,11,150
मालदीव
71
9,45,036
लेसोथो
34
9,33,825
यमन
1
8,64,544
कांगो
12
8,31,318
नामीबिया
16
8,25,518
गाम्बिया
14
8,12,811
आइसलैंड
79
8,05,469
केप वर्डे
55
7,73,810
मॉन्टेनिग्रो
45
6,75,285
कोमोरोस
34
6,42,320
पापुआ न्यू गिनी
3
6,15,156
गिनी-बिसाऊ
17
5,72,954
गैबन
11
5,67,575
स्वाजीलैंड
29
5,35,393
सूरीनाम
40
5,05,699
समोआ
99
4,94,684
बेलिज
53
4,89,508
इक्वेटोरियल गिनी
14
4,84,554
सोलोमन आइलैंड
25
4,63,637
हेटी
1
3,42,724
बहामा
40
3,40,866
बारबाडोस
53
3,16,212
वनुआतू
40
3,09,433
टोंगा
91
2,42,634
जर्सी
80
2,36,026
जिबूटी
16
2,22,387
सेलेल्स
82
2,21,597
साओ टोम एंड प्रिंसिप
44
2,18,850
आइल ऑफ़ मैन
79
1,89,994
गर्नज़ी
81
1,57,161
अंडौरा
69
1,53,383
किरिबाटी
50
1,47,497
केमैन आइलैंड्स
90
1,45,906
बरमूडा
77
1,31,612
एंटिगा एंड बरबूडा
63
1,26,122
सेंट लूसिया
29
1,21,513
जिब्राल्टर
123
1,19,855
फरोर आइलैंड्स
83
1,03,894
ग्रेनाडा
34
89,147
ग्रीनलैंड
68
79,745
सेंट विंसेंट एंड द ग्रेनाडिन्स
28
71,501
लिचटेन्सटाइन
69
70,780
टर्क एंड कैकस आइलैंड्स
76
69,803
सैन मरीनो
69
69,338
डोमोनिका
42
66,992
मोनैको
65
65,140
सेंट किट्स एंड नेविस
49
60,467
ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स
59
41,198
कुक आइलैंड्स
84
39,780
एंग्विला
67
23,926
नौरू
79
22,976
बुरुंडी
0.12
17,139
तुवालू
52
12,528
सेंट हेलेना
58
7,892
मॉन्टसेराट
38
4,422
फॉकलैंड
50
4,407
नियू
88
4,161
टोकेलाउ
71
1,936
पिटकेयर्न
100
94
इरिट्रिया
0
0
उत्तर कोरिया
0
0
दक्षिण जॉर्जिया एंड सैंडविच आइलैंड
0
0
ब्रितानी हिंद महासागर क्षेत्र
0
0
वैटिकन
0
0

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कोरोना से ठीक होने के बाद कब लगवाएँ टीका

भारत सरकार ने मई के महीने में ही कोरोना टीकाकरण अभियान से संबंधित संशोधित गाइडलाइन जारी की थी. नई गाइडलाइन के मुताबिक़ कोरोना से ठीक हो चुके लोग, संक्रमण ख़त्म होने के 3 महीने बाद टीका लगवा सकते हैं. लेकिन भारत सरकार की गाइडलाइन में ऐसे लोगों के लिए भी टीके की दो डोज़ ही प्रस्तावित है.

वीडियो कैप्शन, कोरोना वैक्सीन बनाने वाली फैक्ट्री में कैसे काम होता है?

अमेरिका की सेंटर्स फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ( सीडीसी) की वेबसाइट पर टीकाकरण से संबंधित प्रश्न-उत्तर में भी कोरोना संक्रमण से ऊबरने के 3 महीने बाद ही टीका लगवाने की बात कही गई है. सीडीसी के मुताबिक़ कोरोना से संक्रमित होने के बाद नेचुरल इम्युनिटी कितने दिन तक शरीर में रहती है, इसके बारे में ठोस जानकारी नहीं है, इसलिए कोविड-19 से ठीक होने के बाद हर किसी को टीका लगवाना चाहिए.

दुनिया में जिस देश में भी दो डोज़ वाली वैक्सीन लगाई जा रही है, वहाँ कोरोना से ठीक होने वालों के लिए दो डोज़ वैक्सीन ही प्रस्तावित है.

सीडीसी की गाइडलाइन के मुताबिक़ दो डोज़ वाली वैक्सीन (जैसे कोवैक्सीन और कोविशील्ड) की दोनों डोज़ लगने 2 सप्ताह के बाद ही किसी भी शख़्स को पूरी तरह वैक्सिनेटेड माना जाता है.

सिंगल डोज़ वैक्सीन (जैसे जॉनसन एंड जॉनसन) के संदर्भ एक डोज़ लगने के 2 सप्ताह के बाद ही किसी भी शख़्स को पूरी तरह वैक्सिनेटेड माना जाता है.

बीएचयू के प्रोफ़ेसरों की सलाह मानने पर इस परिभाषा को भी बदलने की ज़रूरत होगी.

कोरोना वैक्सीन

इमेज स्रोत, Reuters

विश्व में ऐसे शोध पहले कहाँ-कहाँ हुए हैं?

बीएचयू के प्रोफ़ेसरों ने जिस दिशा में क़दम बढ़ाया है, विश्व के दूसरे देशों में भी इस तरह के रिसर्च चल रहे हैं. कई दूसरी रिसर्च जर्नल में इससे मिलती जुलती ख़बरें छपी भी है.

इंपीरियल कॉलेज लंदन की वेबसाइट पर स्वास्थ्य सेक्शन में छपे एक लेख में कहा गया है कि वैक्सीन की सिंगल डोज़ कोरोना संक्रमण से ठीक हुए लोगों में बूस्टर डोज़ की तरह काम करती है.

ये शोध इसी साल फरवरी महीने में प्रकाशित की गई है. नतीजे ब्रिटेन में 51 लोगों पर किए शोध पर आधारित थे, जिनमें 24 लोगों को कोरोना हुआ था और बाक़ियों को नहीं. जिन्हें कोरोना नहीं हुआ था, उनके शरीर में वैक्सीन की पहली डोज़ लगने के बाद उतने ही एंटीबॉडी पाई गई, जितने कम लक्षण वाले कोरोना मरीज़ों में पाई जाती है.

ग्लोबल वैक्सीन रोलआउट

जबकि कोरोना से ठीक हुए लोगों में वैक्सीन की एक डोज़ लगने के बाद कहीं ज़्यादा एंटीबॉडी पाई गई.

अमेरिका की एक शोध संस्था सीडर साइनाइ (Cedars Sinai) ने ऐसी ही रिसर्च फाइज़र-बायोएनटेक वैक्सीन के साथ की. 228 लोगों पर किए गए इस शोध में पाया गया कि कोरोना संक्रमण से ठीक हुए लोगों को वैक्सीन की पहली डोज़ के बाद जितनी एंडीबॉडी बनी, उतनी बिना कोरोना संक्रमण वाले लोगों में दो डोज़ के बाद मिली.

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