क्या गर्भवती महिलाएं कोविड-19 वैक्सीन ले सकती हैं?

क्या गर्भवती महिलाओं के लिए कोविड-19 वैक्सीन सुरक्षित है? क्या यह वैक्सीन उन महिलाओं के लिए सुरक्षित है जो अपने नवजात शिशु को स्तनपान करा रही हैं? क्या प्रसव की क्षमता पर इस वैक्सीन का कोई असर पड़ता है? इन सब सवालों के जवाब एक्सपर्ट से जानिए.
कोविड-19 वैक्सीन को लेकर एरीन मैथ्यू कहती हैं, "गर्भवती होने के चलते वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर मुझे सबसे ज़्यादा चिंता है." एरीन पिछले चार पांच महीनों से गर्भवती हैं, उन्हें यह तय करना है कि वे कोविड-19 की वैक्सीन लगवाएं या नहीं? यह चिंता तब है जब एरीन खुद स्वास्थ्यकर्मी हैं. अमेरिका के वर्जीनिया के चार्लोटसेविले में तैनात स्वास्थ्यकर्मी होने की वजह से वो वैक्सीन ले सकती हैं.
लेकिन डॉ. ऐरीन कई सवालों के जवाब तलाश रही हैं. वो कहती हैं, "मैं प्राइमरी केयर करने वाली डॉक्टर हूं, इसके चलते कोरोना वायरस से संक्रमित होने का ख़तरा ज़्यादा है. इसके अलावा वैक्सीन भी नई है. यह जीवित वायरस से नहीं बनी है. वैक्सीन में जीवित वायरस ना होने की स्थिति में गर्भवती महिलाओं को इसे लगाने से पहले लंबे समय तक इसका परीक्षण करना होता है."
मैथ्यू के मुताबिक, "गर्भावस्था में कोविड-19 वैक्सीन के प्रभाव और सुरक्षा को लेकर फिलहाल कोई आंकड़ा भी मौजूद नहीं है."
गर्भवती महिलाओं के लिए क्या सलाह है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अब तक फ़ाइज़र-बायोटेक और मॉडर्ना की कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए सलाह दी है. इसमें फ़िलहाल गर्भवती महिलाओं को वैक्सीन नहीं लेने की सलाह दी गई है. इसकी वजह आंकड़ों की कमी को बताया गया है और यह भी कहा गया है कि इन वैक्सीन के गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक होने का कोई सबूत नहीं मिला है.
लेकिन वैसी गर्भवती महिलाएं क्या करें जिनका डॉ. मैथ्यू की तरह संक्रमण की चपेट में आने जितना एक्सपोज़र हो रहा है, विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह के मुताबिक़, "हेल्थकेयर प्रोवाइडर से बातचीत करके उन्हें वैक्सीन लगाई जा सकती है."
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने गर्भावस्था के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण के जोख़िम को लेकर भी आगाह किया है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडेंस में कहा गया है, "आम महिलाओं की तुलना में गर्भवती महिलाओं के वायरस से संक्रमित होने का जोख़िम ज़्यादा होता है. संक्रमण के चलते प्री-मैच्योर बच्चे के जन्म का ख़तरा भी बढ़ जाता है."
डॉ. मैथ्यू ने पहले अपने डॉक्टर से बात की और उसके बाद उन्होंने उन सहकर्मियों से बात की जो गर्भवती थीं. डॉ. मैथ्यू ने कहा, "मैंने जब वैक्सीन को लेकर अनजाने सैद्धांतिक डर और गर्भावस्था के दौरान संक्रमण के वास्तविक डर को लेकर सोचा तो मेरे लिए फ़ैसला करना आसान हो गया."
डॉ. मैथ्यू ने फ़ाइजर-बायोटेक की वैक्सीन की पहली खुराक जनवरी में ली और उन्हें वैक्सीन की दूसरी खुराक फरवरी में दी जाएगी. हालांकि वैक्सीन को लेकर कई महिलाएं इससे उलट फ़ैसले ले रही हैं.
अमेरिका के दक्षिण पश्चिम ओहायो की जोआना सुलिवन जून में बच्चे को जन्म देनी वाली हैं. उन्होंने बच्चे को जन्म देने तक वैक्सीन नहीं लेने की योजना बनाई है.

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क्या कहते हैं आंकड़े?
इस संबंध में अभी तक बहुत आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं. जॉन्स हॉपकिन्स बेरमन इंस्टीट्यूट ऑफ़ बायोएथिक्स की फ़ैकल्टी में शामिल कार्लेग क्रूबाइनर ने बताया, "वैक्सीन का गर्भवती महिलाओं पर ट्रायल अभी शुरू नहीं हुआ है. सुरक्षा के उपाय और वैक्सीन के बेहतर प्रभाव के भरोसे के बाद भी अभी यह नहीं हुआ है."
हालांकि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि वैक्सीन से गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कोई जोख़िम है लेकिन अभी तक इसको लेकर कोई अध्ययन नहीं किया गया है.
फ़ाइज़र ने अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़डीए) के निर्देशों का पालन करते हुए गर्भवती महिलाओं पर वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल नहीं किया है.
हालांकि कंपनी की ओर से कहा जा रहा है कि गर्भवती महिलाओं पर वैक्सीन के प्रभाव का आकलन इस साल शुरू होगा और यह आकलन तथाकथित डार्ट स्टडीज (डेवलपमेंटल और रिप्रोडक्टिव टॉक्सिटी) के पूरा होने के बाद किया जाएगा. डार्ट स्टडीज आमतौर पर जानवरों की जाती है.
गर्भवती महिलाओं को ट्रायल में क्यों नहीं किया गया शामिल?
विशेषज्ञों के मुताबिक़ यह सामान्य बात है. जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी की बायोएथिस्ट और गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. रूथ फ़ॉडेन ने बताया, "अगर महामारी का दौर नहीं भी हो तब भी जब कोई नई वैक्सीन आती है तो भी शुरुआती दौर के ट्रायल में गर्भवती महिलाओं को शामिल नहीं किया जाता है."
डॉ. रूथ के मुताबिक़, "गर्भवती महिलाओं को कॉम्पलैक्स आबादी माना जाता है, क्योंकि उस वक्त में दो लोगों की जान का सवाल होता है, किसी और स्थिति में ऐसा नहीं होता है. इसकी नैतिक चिंता भी होती है."
कई विश्लेषक पुराने उदाहरणों का ज़िक्र करते हुए बताते हैं कि आंकड़ों के अभाव में कई बार वैक्सीन को मंजूरी मिलने में काफी देरी हुई है.
वहीं कार्लेग क्रूबाइनर बताती हैं, "इबोला के मामले में, कांगो की गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कई महीने तक वैक्सीन नहीं दी गई थी. इस कारण प्रभावित महिलाओं ने आरोप लगाए थे कि उन्हें वैक्सीन नहीं देकर मौत के मुंह में धकेला जा रहा था, क्योंकि इबोला संक्रमण के बाद लोगों की मौत की आशंका ज़्यादा थी. उस दौरान स्तनपान कराने वाली महिलाओं ने वैक्सीन लेने के लिए बच्चों को स्तनपान कराना तक बंद कर दिया था."
मौजूदा महामारी को लेकर क्रूबाइनर ने बताया, "यह वैक्सीन काफ़ी सुरक्षित और फ़ायदेमंद है लेकिन आंकड़ों के अभाव में लोग हिचक रहे हैं. हालांकि इस वैक्सीन से मां और होने वाले बच्चे दोनों के स्वास्थ्य की सुरक्षा होगी."

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अलग-अलग देशों में क्या है स्थिति?
गर्भवती महिलाओं को वैक्सीन देने के मामले में अलग-अलग देश अलग रास्ता अपना रहे हैं. ब्रिटेन में गर्भवती महिलाओं को वही सलाह दी जा रही है जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह है.
रॉयल कॉलेज ऑफ़ आब्स्ट्रेशियन और गाएनोकोलॉजिस्ट (आरसीओजी) के मुताबिक़, "मौजूदा आंकड़ों के अनुसार वैक्सीन से गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा को कोई ख़तरा नहीं है, लेकिन गर्भावस्था में वैक्सीन देने की अनुशंसा करने के लिए ज़रूरी आंकड़े या पर्याप्त सबूत नहीं हैं."
इस बयान में कहा गया है, "अगर कोई गर्भवती महिला को कोविड संक्रमण चपेट में आने की आशंका ज़्यादा है तो वह अपने डॉक्टर से बात करके कोविड-19 की वैक्सीन ले सकती हैं."
"ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि वह अपनी स्थिति के चलते कोविड-19 संक्रमण के ज़्यादा जोख़िम की चपेट में आ सकती हैं. हालांकि स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए अब तक किसी ख़तरे की पहचान नहीं हुई है. लेकिन महिलाओं को बताया जा रहा है अभी आंकड़े उपलब्ध नहीं है."

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हालांकि इसराइल जैसे देशों में गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता के स्तर पर कोविड-19 वैक्सीन दी जा रही है. वहां कहा जा रहा है कि वैक्सीन से गर्भवती महिलाओं और गर्भ में पल रहे बच्चे को कोई ख़तरा नहीं है.
वहीं भारत में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को विस्तृत अध्ययन के सामने आने से पहले वैक्सीन नहीं दी जाएगी.
आंकड़े कब तक उपलब्ध होंगे?
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की इंस्ट्रक्टर और बेथ इसराइल डियाकोनेस मेडिकल सेंटर की प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ हुमा फरीद ने बताया, "गर्भवती महिलाओं से जुड़े आंकड़ों के सामने आने में महीनों या सालों भी लग सकते हैं."
हालांकि कुछ ऐसी महिलाएं भी हैं जो ट्रायल के दौरान गर्भवती हुई हैं, और उनकी स्थिति की निगरानी की जा रही है. कोरोना वायरस गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर किस तरह से प्रभाव डालता है, इसको लेकर कोई स्पष्ट तस्वीर अभी नहीं आई है.
क्रूबाइनर ने बताया, "आंकड़ों से पता चलता है कि गर्भवती महिला के कोरोना संक्रमित होने से प्रीमैच्योर बच्चे का जन्म होने का ख़तरा बढ़ जाता है."
हालांकि ब्रिटेन में हाल में मिले सबूतों के मुताबिक़ संक्रमित होने के बाद स्वस्थ मनुष्य की तुलना में गर्भवती महिलाओं की स्थिति बिगड़ने का ख़तरा ज़्यादा नहीं है. अधिकांश गर्भवती महिलाओं में कोरोना संक्रमण माइल्ड स्तर का ही देखा गया है.
गर्भवती महिलाएं क्या करें?
डॉ. हुमा फ़रीद बताती हैं, "हम जानते हैं कि कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं के लिए ख़तरा बढ़ जाता है. हम यह भी जानते हैं कि वैक्सीन सुरक्षित है."
हुमा फ़रीद मॉडर्ना और फ़ाइजर के एमआरएनए वैक्सीन के इस्तेमाल की सलाह देती हैं जिनमें वायरस के जेनेटिक कोड का छोटा-सा हिस्सा इस्तेमाल किया गया है.
इससे शरीर के अंदर कोरोना वायरस के हिस्से बनना शुरू हो जाता है. शरीर की रोगप्रतिरोधी क्षमता इसे बाहरी मानकर इस पर हमला शुरू कर देती है. हुमा फ़रीद ने बताया, "सार्स सीओवी-2 के लिए जो वैक्सीन विकसित की गई थी वह लाइव वैक्सीन नहीं थी. ऐसे में गर्भावस्था के दौरान उसे नहीं देने की सलाह दी जाती है."
यही वजह है कि डॉ. हुमा फ़रीद फ्रंटलाइन वर्कर के तौर पर काम करने वाली गर्भवती महिलाओं को वैक्सीन लेने पर सोचने की सलाह देती हैं. उन्होंने कहा, "यह लोगों का व्यक्तिगत फ़ैसला है लेकिन मैं लोगों से उनकी चिंताओं पर बात करने की सलाह दे रही हूं. दोनों परिस्थितियों में ख़तरे के आकलन करने की भी सलाह दे रही हूं."

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उनके मुताबिक़ हर गर्भवती महिला को अपनी चिंताओं को लेकर डॉक्टरों से बात करनी चाहिए. इस दौरान एक दूसरे से पर्याप्त दूरी, मास्क का इस्तेमाल और साफ़ सफ़ाई का ध्यान रखना चाहिए.
कार्लेग क्रूबाइनर चिकित्सीय परिस्थितियों के मुताबिक़ फ़ैसला लेने की सलाह देती हैं. वो कहती हैं, "कोविड-19 संक्रमण का ख़तरा बढ़ाने वाली स्थिति पहले से भी मौजूद हो सकती है, इसे देखते हुए फ़ैसला करना चाहिए. वैक्सीन नहीं लेने की स्थिति में उससे सुरक्षा नहीं हो पाएगी और इसका असर मां और बच्चे दोनों पर पड़ सकता है."
डॉ. फ़रीद की तरह ही क्रूबाइनर भी तीन मुद्दों पर ध्यान देने को कहती हैं- संक्रमण की चपेट में आने के लिए एक्सपोज़र, गंभीर बीमारियों का ख़तरा और बचाव के दूसरे उपायों की वैक्सीन से तुलना.
स्तनपान कराने वाली महिलाएं क्या करें?
स्तनपान कराने वाली महिलाएं अगर दूसरे सारे मापदंडों पर पात्रता रखती हैं तो उन्हें कोविड-19 वैक्सीन नहीं दिए जाने की कोई वजह नहीं दिखती, इसको लेकर एक्सपर्ट्स में आम सहमति है.
डॉ. हुमा फ़रीद ने बताया, "मैं तो स्तनपान कराने वाली महिलाओं को वैक्सीन लेने के लिए प्रोत्साहित करूंगी. क्योंकि इससे बनने वाला एंटीबॉडी स्तनपान के ज़रिए बच्चे तक पहुंचेगा और उन्हें सार्स सीओवी-2 से कुछ सुरक्षा देगा."
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ अब तक इस बात के सबूत नहीं मिले हैं कि स्तनपान कराने वाली महिलाएं और उनके बच्चों में कोविड-19 संक्रमण का ख़तरा ज़्यादा होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ अगर स्तनपान कराने वाली कोई महिला वैक्सीन के लिए आती हैं तो उन्हें वैक्सीन दी जाए.
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क्या वैक्सीन प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है?
जो महिलाएं गर्भधारण करने की कोशिश कर रही हैं, उनके लिए एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि वैक्सीन लेने के बाद उन्हें गर्भाधारण को टालने की ज़रूरत नहीं है.
कार्लेग क्रूबाइनर बताती हैं, "कोविड-19 वैक्सीन प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है, यह साबित नहीं हुआ है. यह वैक्सीन प्रजनन क्षमता को कैसे प्रभावित कर सकती है, इसको बताने वाली कोई जैविक व्यवस्था भी नहीं है."
"वास्तव में जिन वैक्सीनों को मान्यता मिली है उनके क्लिनिकल ट्रायल में गर्भवती महिलाएं शामिल भी नहीं की गई थी, लेकिन ट्रायल के दौरान कुछ महिलाएं गर्भवती हुई हैं. इससे तो ज़ाहिर होता है कि वैक्सीन लेने के बाद भी महिलाएं गर्भवती हो सकती हैं. इससे उनकी प्रजनन क्षमता को कोई ख़तरा नहीं है."
विशेषज्ञों को उम्मीद है कि समय के साथ तस्वीर स्पष्ट होगी.
कार्लेग क्रूबाइनर बताती हैं, "फ्रंटलाइन पर काम कर रही गर्भवती महिलाएं जब वैक्सीन लेंगी तो निश्चित तौर पर हमें ज़्यादा सबूत मिलेंगे. इससे आने वाले दिनों में गर्भवती महिलाएं कहीं ज़्यादा जानकारी के साथ अपने विकल्प चुन पाएंगी."
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