यूरी गागरिन: इंसान की पहली अंतरिक्ष यात्रा कितनी ख़तरनाक थी

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- Author, पावेल एक्सेनोव और निकोलाय वोरोनिन
- पदनाम, बीबीसी रूसी सेवा
"दुनिया से बहुत दूर, यहां मैं एक टिन के डिब्बे में बैठा हूं. पृथ्वी का रंग नीला है और यहां कुछ भी नहीं जो मैं कर सकूं."
डेविड बोई के स्पेस ओडिटी एलबम के इस लाइन में वह सब मौजूद है जो अंतरिक्ष में जाने वाले पहले शख़्स यूरी गागरिन ने महसूस किए होंगे. दो मीटर व्यास वाले छोटे से स्पेसक्राफ़्ट में यूरी गागरिन अंतरिक्ष यात्री की बजाय महज़ एक यात्री की तरह अंतरिक्ष गए थे.
यूरी गागरिन ऐसे यान में थे जिसके कंट्रोल को वह छू भी नहीं सकते थे. कंट्रोल रूम से हुए उनके संवाद के मुताबिक़ अंतरिक्ष यान की कैप्सूल विंडो से उन्हें पृथ्वी बड़ी सुंदर दिखाई दी थी. पृथ्वी पर बादलों की छाया मनमोहक दृश्य पैदा कर रही थी.
यूरी गागरिन 12 अप्रैल, 1961 को अंतरिक्ष जाने वाले पहले शख़्स बने थे. यह अंतरिक्ष की लड़ाई में अमेरिका पर सोवियत संघ की जीत थी. उनकी सकुशल वापसी ने तो इस जीत को निर्विवाद बना दिया था.
इतिहास बनाने के लिए गागरिन ने अदम्य बहादुरी दिखाते हुए ख़तरनाक चुनौती स्वीकार की थी. उन्हें अंतरिक्ष में भेजा जा रहा था, जिसके बारे में लोगों को बहुत कम जानकारी थी. वे ऐसे यान से वहां जा रहे थे जिसमें किसी आपात स्थिति में बचाव की कोई व्यवस्था नहीं थी.

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ख़तरे के खिलाड़ी थे यूरी गागरिन
जिस रॉकेट से उन्हें अंतरिक्ष में भेजा जाना था, वह पहले कई बार नाकाम हो चुका था. असल में गागरिन को ऐसे प्रयोग के लिए इस्तेमाल किया गया था जिससे कई सवालों के जवाब मिलने थे.
जैसे कि क्या मनुष्य अंतरिक्ष में जीवित रह सकता है? क्या अंतरिक्ष यान से यात्रा की जा सकती है? क्या अंतरिक्ष यान का पृथ्वी से संपर्क बना रहेगा जो प्रभावी भी हो? क्या अंतरिक्ष यान की सुरक्षित वापसी हो पाएगी? इस यात्रा से इन सभी सवालों के जवाब मिल गए.
उस दौर में किसी भी रॉकेट, अंतरिक्ष यान, संवाद उपकरणों पर लोगों को बहुत भरोसा नहीं था. अंतरिक्ष में मनुष्यों के जीवित रहने को लेकर भी कोई ख़ास जानकारी नहीं थी.
इस मिशन के क़रीब 50 साल बाद 'रॉकेट्स एंड पीपल्स' नामक पुस्तक में इंजीनियर बोरिस चेरटोक ने लिखा, "अगर वोस्तोक अंतरिक्ष यान को आज के वैज्ञानिकों के सामने रखा जाए तो कोई भी इस मिशन के पक्ष में नहीं होगा. उस वक़्त मैंने ही उन दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किए थे जिनमें लिखा था कि यान में सब ठीक है और मैं इस मिशन के सुरक्षित होने की गारंटी देता हूं. आज की तारीख़ में मैं यह कभी नहीं करता. हमने इसमें कितना जोख़िम लिया था, इसका पता मुझे काफ़ी अनुभव के बाद चला."

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वोस्तोक की नाकामी
वोस्तोक अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष में भेजने की ज़िम्मेदारी दो चरणों वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइल आर-7 रॉकेट पर थी. इससे अगस्त, 1957 में पहली बार अंतरिक्ष यान को भेजा गया था. उसी साल पहला कृत्रिम उपग्रह स्पुतनिक-1 का प्रक्षेपण आर-7 ने किया था.
आर-7 का डिज़ाइन काफ़ी सफल रहा था. रूस में आज भी इस परिवार की मिसाइलों का उपयोग अंतरिक्ष यान को भेजने के लिए किया जाता है. हालांकि अब यह तकनीक काफ़ी पुरानी हो चुकी है, पर अंतरिक्ष यान को कक्षा में स्थापित करने के लिए यह काफ़ी भरोसेमंद है.
हालांकि 1961 में यह विश्वसनीयता नहीं थी. चेरटोक ने अपनी किताब में लिखा, "यदि हम रॉकेट के मौजूदा सुरक्षा मानकों को देखें तो 1961 से पहले हमारे पास उम्मीद की कोई वजह नहीं थी. लेकिन 1961 में हमने कम से कम आठ बार सफलता से इसका प्रक्षेपण किया था. हालांकि 1960 के पाँच प्रक्षेपणों में से चार नाकाम हो गए थे. इसमें से तीन पृथ्वी की कक्षा से बाहर हो गए थे. केवल दो वापसी कर पाए थे. इनमें से एक ही सामान्य रूप से उतर पाया था."
वोस्तोक अभियान का पहला प्रक्षेपण 15 मई, 1960 को हुआ था. और एक साल के भीतर यूरी गागरिन का मिशन आ गया. 15 मई, 1960 के प्रक्षेपण में एक पुतले को अंतरिक्ष यान में भेजा गया था. इस पुतले का नाम इवान इवानोविच रखा गया था.
यह अंतरिक्ष यान पृथ्वी की कक्षा से बाहर चला गया और वापस नहीं लौट पाया. इसके ओरिएंटेशन सिस्टम यानी दिशा-निर्देश वाली प्रणाली ने काम करना बंद कर दिया था. 19 अगस्त, 1960 को बेल्का और स्ट्रेल्का नाम के दो कुत्तों ने अंतरिक्ष यात्रा की थी जो सकुशल वापस लौट आए थे.
1960 का यह इकलौता मिशन था जो पूरी तरह कामयाब रहा था. इसके बाद के अभियान नाकाम हो गए. एक दिसंबर, 1960 को मुशका और पेचेल्का नाम के दो कुत्तों के साथ अंतरिक्ष यान को भेजा गया.
वापसी के दौरान यह अपने रास्ते से भटक गया और सोवियत संघ की सीमा से बाहर की ओर जाने लगा. ऐसे में पूरे यान को नष्ट करना पड़ा ताकि सोवियत तकनीक किसी दूसरे देश के पास न चला जाए.

गागरिन का यान
12 अप्रैल, 1961 की यूरी गागरिन की अंतरिक्ष उड़ान से पहले रॉकेट पूरी तरह ठीक था. हालांकि तब अंतरिक्ष प्रोद्यौगिकी के बारे में मामूली जानकारियां थी. इस मिशन में यूरी गागरिन के जीवन को ही लगभग दांव पर लगा दिया गया था.
इस दौरान कई तकनीकी ख़ामियां भी उभरीं. इस चलते अंतरिक्ष यान अनुमान से कहीं ज़्यादा ऊंचाई वाले ऑर्बिट (कक्षा) में स्थापित हुआ. गागरिन के पास ब्रेक थे पर यदि वे काम नहीं करते तो उन्हें अंतरिक्ष यान के ख़ुद ही उतरने का इंतज़ार करना पड़ता.
वोस्तोक अंतरिक्ष यान में एक सप्ताह से ज़्यादा समय के लिए ऑक्सीजन, भोजन और पानी मौजूद था. हालांकि ज़्यादा ऊंचाई पर स्थापित होने से अंतरिक्ष यान की वापसी में इससे ज़्यादा समय लग सकता था.
ऐसी स्थिति में ऑक्सीजन, भोजन या पानी किसी भी कमी से गागरिन की मौत हो सकती थी. लेकिन ख़ुशक़िस्मती ये थी कि ब्रेक काम कर रहा था.

रिकॉर्ड बनने से वंचित होने का ख़तरा
गागरिन की वापसी से पहले अंतरिक्ष यान के कैप्सूल को ज़रूरत के सामान वाले सर्विस मॉड्यूल से जोड़ने वाला तार अलग नहीं हो पाया. इसलिए वापसी के दौरान इनके कैप्सूल पर अतिरिक्त भार लदा हुआ था. इस चलते कैप्सूल का तापमान काफ़ी ज़्यादा हो गया था और गागरिन बढ़ते तापमान के बीच अपना होश खोने लगे थे.
उन्होंने बाद में कहा था, "मैं आग वाले बादलों से घिरा था और पृथ्वी की ओर बढ़ रहा था."
दस मिनट पहले तार जल गया और गागरिन का कैप्सूल मुक्त हुआ. कैप्सूल के ज़मीन पर टकराने से पहले गागरिन ने सुरक्षित उतरने के लिए पैराशूट से छलांग लगा दी और वोल्गा नदी के किनारे उतरे. यह फ़ेडरेशन एयरोनॉटिक इंटरनेशनल (एफ़एआई) के प्रावधानों का उल्लंघन था जिसके अनुसार अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष यान में ही लैंड करना होगा नहीं तो उसे अंतरिक्ष यात्रा की गिनती में नहीं रखा जाएगा.
रूसी अधिकारियों ने इस बात को छुपाए रखा. यूरी गागरिन ने आख़िरी के कुछ किलोमीटर की यात्रा अंतरिक्ष यान में नहीं की, यह बात ज़ाहिर नहीं होने दी. इस चलते एफ़एआई ने इस यात्रा को मान लिया. बाद में जानकारी मिलने के बाद संबंधित प्रावधानों को बदलते हुए सुरक्षित प्रक्षेपण, कक्षा में स्थापित होने और अंतरिक्ष यात्री की सकुशल वापसी को अहम क़दम मान लिया गया.

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अंतरिक्ष की जानकारी तब सीमित थी
बीबीसी की रूसी सेवा ने तीन रूसी अंतरिक्ष यात्रियों से यह पूछा कि क्या आप 1961 की तरह के वोस्तोक यान से अंतरिक्ष जाना चाहेंगे?
1997, 2006 और 2016 में तीन बार अंतरिक्ष यात्रा कर चुके पावेल विनोग्रेदोव ने कहा कि जोख़िम लेने के अपने स्वभाव के चलते वे तमाम ख़तरों के बाद भी यात्रा करते. हालांकि वे यह भी मानते हैं कि गागरिन की स्थिति दूसरी थी और उन्हें ख़तरे का पूरा अंदाज़ा नहीं रहा होगा.
उन्होंने कहा, "जब मैं पहली बार अंतरिक्ष की यात्रा कर रहा था तब की मेरी जानकारी को भी आपको समझना होगा. मैं एक इंजीनियर था और मुझे काफ़ी कुछ मालूम था. गागरिन को शायद ये सब नहीं मालूम होगा."
मिख़ाइल कोर्निको 2010 और 2015 में दो बार अंतरिक्ष जा चुके हैं. उन्होंने भी कहा कि वे उस वक़्त उस यात्रा पर यूरी गागरिन की जगह ज़रूर जाते. लेकिन उन्होंने कहा कि वे अब नहीं जाते क्योंकि उन्हें ख़तरे का पता अब चल गया है. उन्होंने कहा कि कोई भी उस अंतरिक्ष यान में जाना चाहता, इसे लेकर मैं निश्चिंत हूं.
सर्जेई रयाज़नस्की दो बार अंतरिक्ष जा चुके हैं. वह इस बात की ओर ध्यान दिलाते हैं कि पहले अंतरिक्ष यात्री के लिए सेना के फ़ाइटर पायलट को चुना गया था. सेना के अनुशासित लोग अपने देश के लिए जीवन न्योछावर करना जानते हैं.
उन्होंने कहा, "अगर मैं यूरी गागरिन की उम्र का होता तो जोख़िम उठाने की अपनी प्रवृति के चलते मैं अंतरिक्ष यात्रा पर जाता. लेकिन आज पूछेंगे तो मेरा जवाब नहीं होगा. क्योंकि मेरे चार बच्चे हैं और परिवार की ज़िम्मेदारी मेरे कंधों पर है."
रयाज़नस्की के मुताबिक अंतरिक्ष की यात्रा आज भी डराने वाली होती है. उन्होंने बताया, "कोई भी आम आदमी डरेगा. यह अच्छा ही है. अंतरिक्ष यात्रियों को सजग और ज़्यादा ज़िम्मेदार होना ही चाहिए."

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गागरिन का जीवन हमेशा के लिए बदल गया
किसान माता-पिता के बेटे यूरी गागरिन जब अंतरिक्ष में गए तो कोई उन्हें नहीं जानता था. लेकिन जब वे लौटे तो दुनिया भर में मशहूर हो गए थे. वे रूस के राष्ट्रीय हीरो तो बन ही गए थे.
दुनिया के लिए भी वे किसी हस्ती से कम नहीं हो गए थे. लौटने के बाद उन्होंने सोवियत संघ का नाम बढ़ाने के लिए चेकोस्लोवाकिया, बुल्गारिया, फ़िनलैंड, ब्रिटेन, आइसलैंड, क्यूबा, ब्राज़ील, कनाडा, हंगरी, भारत जैसे देशों की यात्राएं कीं.
यूरी गागरिन की बेटी ऐलेना गागरिना ने बीबीसी से 2011 में कहा था, "हमारा जीवन हमेशा के लिए बदल सा गया. मेरे माता-पिता के लिए निजी जीवन जीना बेहद मुश्किल हो गया था. उसके बाद दोनों को एक दूसरे के साथ एकांत में वक़्त बिताने का काफ़ी कम मौक़ा मिला. अगर वे लोग ख़ुद के लिए योजना बनाकर कहीं जाते भी तो वहां भीड़ उनकी एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़ती थी. हर कोई उनसे बात करना और उन्हें छूना चाहता था. वे समझ गए थे कि ये उनके काम का हिस्सा है और वे उससे इनकार नहीं कर सकते."
गागरिन ने फिर से अंतरिक्ष में जाने की इच्छा जताई लेकिन नेशनल हीरो होने के चलते उनकी और अंतरिक्ष यात्राओं पर पाबंदी लगा दी गई. फिर भी दूसरे अंतरिक्ष यात्रियों के साथ वे प्रतिष्ठित जोकोवेस्की इंस्टीट्यूट ऑफ़ एरॉनॉटिकल इंजीनियरिंग से प्रशिक्षण लेने चले गए.
फ़रवरी, 1968 में वे वहां से ग्रेजुएट (ऑनर्स) हुए. इसी साल मार्च में एमआईजी-15 के टेस्ट फ्लाइट के दौरान उनका विमान क्रैश हो गया. इसमें वे और उनकी सह-पायलट की हादसे में मौत हो गई थी. तब वे महज़ 34 साल के थे.
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