कू ऐप क्या है, सरकार इसमें क्यों दिखा रही है दिलचस्पी?

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ट्विटर और भारत सरकार के गतिरोध के बीच बुधवार को ट्विटर पर #kooapp ट्रेंड करता रहा.
मंगलवार को ट्विटर पर मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान, रेलमंत्री पीयूष गोयल समेत कई मंत्रियों ने बताया कि उन्होंने कू पर अपना अकाउंट बनाया है. उन्होंने लोगों से अपील कि वो इस भारतीय माइक्रो ब्लॉगिंग साइट पर उनसे जुड़ें.
ख़बर लिखे जाने तक पीयूष गोयल के 31 हज़ार से अधिक और शिवराज सिंह चौहान के क़रीब 3500 फॉलोअर हो गए थे. इसके अलावा नीति आयोग जैसे विभाग भी कू ऐप पर आ गए हैं.
केंद्र सरकार ने ट्विटर को एक हज़ार से अधिक ट्विटर अकाउंट्स को ब्लॉक करने के निर्देश दिए हैं, जिसका बुधवार को ट्विटर ने जवाब दिया. इसके बाद से ही कई सोशल मीडिया साइट्स पर कू को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं.
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क्या है कू एप?
कू एप ट्विटर की तरह ही एक माइक्रोब्लॉगिंग साइट है. इसे मार्च 2020 में लॉन्च किया गया था. इसे बेंगलुरू की बॉम्बीनेट टेक्नॉलॉज़ीस प्राईवेट लिमिटेड ने बनाया है.
ऐप को भारत के ही अपरामेया राधाकृष्णण और मयंक बिदवक्ता ने डिज़ाइन किया है. इसलिए इसे ट्विटर का देसी वर्ज़न भी कहा जा रहा है.
कू ऐप अभी चार भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है - हिंदी, तमिल, तेलुगू और कन्नड़. प्ले स्टोर पर इसके 1 मिलियन से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं.
ऐप के बारे में कू की वेबसाइट पर लिखा है, "भारत में सिर्फ 10 प्रतिशत लोग अंग्रेज़ी बोलते हैं. क़रीब 100 करोड़ लोगों को अंग्रेज़ी नहीं आती. उनके हाथ में मोबाइल फ़ोन आ रहा है, लेकिन इंटरनेट पर ज़्यादातर चीज़ें अंग्रेज़ी में हैं. कू की कोशिश है कि भारतीयों की आवाज़ सुनी जाए."
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सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा
ऐसा नहीं है कि इस ऐप की बात सिर्फ ट्विटर से विवाद के बाद शुरू हुई है. सरकार इसे पहले से ही बढ़ावा दे रही है.
साल 2020 में सरकार द्वारा आयोजित आत्मनिर्भर ऐप इनोवेशन चैलेंज में कू ऐप को चिंगारी और ज़ोहो जैसे ऐप्स के साथ विजेता घोषित किया गया था. चिंगारी और ज़ोहो टिकटॉक जैसे वीडियो ऐप हैं, टिकटॉक पर बैन के बाद ये चर्चा में आए थे.
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पिछले साल मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कू ऐप का ज़िक्र किया था. मोदी ने कहा, "एक माइक्रोब्लॉगिंग प्लैटफॉर्म का ऐप है, इसका नाम है कू, इसमें हम अपनी मातृमाषा में टेक्स्ट वीडियो और ऑडियो के ज़रिए अपनी बात रख सकते हैं, इंटरैक्ट कर सकते हैं."
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कुछ जानकार मानते हैं कि कू का फिर से चर्चा में आना सरकार की ट्विटर पर दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है.
ट्विटर और सरकार के बीच विवाद
मंगलवार को समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से लिखा था कि भारत सरकार ने ट्विटर को कथित पाकिस्तान और खालिस्तान समर्थकों से संबंधित 1178 ट्विटर अकाउंट बंद करने का आदेश दिया है जो किसानों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर ग़लत सूचना और उत्तेजक सामग्री फैलाते रहे हैं.
बताया गया कि सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने चार फ़रवरी को इन ट्विटर अकाउंट्स की एक सूची साझा की थी. इन अकाउंट्स की पहचान सुरक्षा एजेंसियों ने खालिस्तान समर्थक या पाकिस्तान द्वारा समर्थित और विदेशी धरती से संचालित होने वाले अकाउंट्स के तौर पर की थी, जिनसे किसान आंदोलन के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था को ख़तरा है.

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इससे पहले, सरकार ने ट्विटर को उन 'हैंडल्स' और 'हैशटैग्स' को हटाने का आदेश दिया था, जिनमें दावा किया गया था कि किसान नरसंहार की योजना बनाई जा रही है. सरकार ने कहा था कि इस तरह की ग़लत सूचना और भड़काऊ सामग्री सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करेगी.
बुधवार को ट्विटर ने अपने एक आधिकारिक ब्लॉग में लिखा है कि 'कंपनी ने 500 से अधिक ट्विटर अकाउंट्स को निलंबित कर दिया है जो स्पष्ट रूप से स्पैम की श्रेणी में आते थे और प्लेटफ़ॉर्म का ग़लत इस्तेमाल कर रहे थे. कंपनी ने नियमों का उल्लंघन करने वाले सैकड़ों अकाउंट्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है. ख़ासतौर पर उनके ख़िलाफ़, जो हिंसा, दुर्व्यवहार और धमकियों से भरे हुए थे. इसके साथ ही कंपनी ने नियमों का उल्लंघन करने वाले कुछ ट्रेंड्स पर भी रोक लगाई है.'
माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर ने इस ब्लॉग में यह भी लिखा है कि 'कंपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में है और हाल ही में केंद्र सरकार ने जिस आधार पर ट्विटर अकाउंट्स बंद करने को कहा, वो भारतीय क़ानूनों के अनुरूप नहीं हैं
इसके जवाब में भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से एक ट्वीट किया गया है. इस ट्वीट में लिखा है, "ट्विटर के अनुरोध करने पर इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन के साथ बातचीत करने वाले थे. लेकिन इस संबंध में कंपनी द्वारा एक ब्लॉग लिखा जाना एक असामान्य बात है. सरकार जल्द ही इस पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करेगी."

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