कोरोना वायरस से डरे हुए हैं तो बस ये काम करें

    • Author, क्रिस्टी ब्रूवर
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

कोरोनावायरस ने पूरी दुनिया को अनिश्चितता के भंवर में धकेल दिया है. लगातार आ रही ख़बरें लोगों को बेचैन कर रही हैं. इससे लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है.

ऐसे लोग जो कि पहले से ही बेचैनी और ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) से गुजर रहे हैं उनके लिए कोरोना एक बड़ी मुश्किल बन गया है. ऐसे में सवाल पैदा हो रहा है कि आख़िर हम अपने मानसिक स्वास्थ्य को इससे प्रभावित होने से कैसे बचाएं?

कोरोना की ख़बरों से चिंतित होना समझ में आता है, लेकिन कई लोगों के लिए यह उनकी मौजूदा मेंटल हेल्थ समस्याओं को और ज़्यादा मुश्किल बना रहा है.

ऐसे में जब वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने कोरोना वायरस के आने के बाद लोगों को अपनी मेंटल हेल्थ को बचाने की सलाह जारी की तो सोशल मीडिया पर इसका स्वागत किया गया.

एंग्ज़ाइटी यूके के निक लिडबेटर बताते हैं कि स्थितियों के हाथ से निकलने और अनिश्चितता को सहन न कर पाने का डर कई एंग्ज़ाइटी डिसॉर्डर्स में आम लक्षण होता है. ऐसे में यह चीज़ समझ में आती है कि क्यों पहले से तनाव से जूझ रहे कई लोग इस वक़्त चुनौती का सामना कर रहे हैं.

चैरिटी माइंड में मेंटल हेल्थ की प्रवक्ता रोज़ी वेदरले के मुताबिक़, 'तनाव की वजह से ज्यादातर लोगों में अज्ञात चीज़ को लेकर चिंता होती है, इसमें कुछ होने का इंतज़ार होता है. माइक्रो स्केल पर कोरोना वायरस कुछ ऐसा ही कर रहा है.'

ऐसे में हम अपनी मेंटल हेल्थ कैसे बचाएं?

ख़बरें कम पढ़ें

कोरोना वायरस से जुड़ी हुई बहुत ख़बरें पढ़ने से निक को पैनिक अटैक पड़ने लगे. निक बताते हैं, 'जब मैं बेचैनी महसूस करता हूं तो मेरे विचार नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं और मैं बेहद बुरे परिणामों के बारे में सोचने लगता हूं.' निक अपने पेरेंट्स और अपनी नज़दीकी वाले दूसरे उम्रदराज लोगों को लेकर चिंतित हैं.

न्यूज़ वेबसाइट्स और सोशल मीडिया से लंबे वक्त तक दूर रहने से उन्हें अपनी इस स्थिति से निबटने में मदद मिली है. उन्हें एंग्ज़ाइटीयूके जैसी मेंटल हेल्थ टैरिटी संस्थाओं की हेल्पलाइन से भी मदद मिली.

ऐसी चीज़ें पढ़ने या देखने में लगाया जाने वाला वक़्त कम करें जो आपको बेहतर महसूस नहीं कराती हैं.

बहुत सारी भ्रामक सूचनाएं भी इस वक्त घूम रही हैं. सरकार और दूसरे भरोसेमंद ज़रियों से मिलने वाली सूचनाओं को ही पढ़ें.

सोशल मीडिया से ब्रेक लें

मैनचेस्टर में रहने वाली 24 साल की एलिसन को हेल्थ एंग्ज़ाइटी है और वह जानकारियां हासिल करने और विषय की तह तक जाने में भरोसा रखती हैं. लेकिन, वह यह भी जानती हैं कि सोशल मीडिया परेशानी का सबब बन सकता है.

उन्होंने कहा, 'एक महीने पहले मैं हैशटैग्स क्लिक कर रही थीं उस वक़्त मैंने कई गैर-प्रमाणित फ़ालतू की चीजें देखीं. मैं इन्हें देखकर तेज़ ग़ुस्सा आया और मैं निराशा में चली गई.'

अब वह इस बात को लेकर सतर्क रहती हैं किन किन अकाउंट्स पर जाना है और किन पर नहीं. वह सोशल मीडिया पर अपने दिए जाने वाले वक्त को भी सीमित कर रही हैं.

अपने हाथ धोएं- लेकिन बहुत ज्यादा बार नहीं

ओसीडी एक्शन के पास ऐसे लोगों की ओर से मदद की गुहार आ रही है जिन्हें लगता है कि उनके अंदर कोरोना वायरस का डर गहरे तक समा गया है.

ओसीडी और कुछ दूसरी तरह की एंग्ज़ाइटी वाले लोगों के लिए बार-बार हाथ धोने की सलाह मुश्किल भरी साबित हो रही है.

ओसीडी वाले लोगों के साथ रहने से जुड़ी हुई किताब बिकॉज़ वी आर बैड की लेखिका लिली बैले कहती हैं कि संक्रमण का डर उनके कंपल्सिव डिसऑर्डर का एक पहलू था. वह कहती हैं कि हाथ धोने की सलाह एंग्ज़ाइटी से बाहर निकल आए लोगों के लिए बड़ा ट्रिगर साबित हो सकती है.

चैरिटी ओसीडी एक्शन का कहना है कि मसला इसे किए जाने को लेकर है. मिसाल के तौर पर, बताए गए समय तक हाथ होने की प्रक्रिया से वायरस का जोखिम कम होता है या इसे एक तरीके से रिचुअल के तौर पर करने से जिससे यह लगे कि 'मैं ठीक कर रहा हूं?'

लोगों के साथ जुड़े रहें

सेल्फ़-आइसोलेशन में जाने वाले लोगों की तादाद लगातार बढ़ रही है. ऐसे में यह अच्छा मौक़ा है लोगों को फ़ोन करने का और उन्हें बताने का कि आप उनकी केयर करते हैं.

अगर आप सेल्फ़-आइसोलेशन में हैं तो एक रूटीन लाने में संतुलन पैदा करें और यह सुनिश्चित करें कि हर दिन कुछ अलग हो.

आपको लग सकता है कि गुज़रे दो हफ़्ते काफ़ी प्रोडक्टिव रहे. आप अपनी किए जाने वाले कामों की लिस्ट बना सकते हैं और लंबे वक़्त से सोची जा रही किताब को पढ़ सकते हैं.

थकान से बचें

कोरोना वायरस अभी कई हफ़्ते जारी रह सकता है. ऐसे में यह महत्वपूर्ण वक़्त है. दिमाग़ी स्वास्थ्य के लिए जब भी मुमकिन हो प्रकृति और सूर्य की रोशनी में जाएं. एक्सरसाइज़ करें, अच्छे से खायें और ख़ूब पानी पीएं.

एंग्ज़ाइटी यूके का सुझाव है कि तनाव और चिंताओं से बचने के लिए 'एप्पल' तकनीक का इस्तेमाल करें.

पहचानेः जैसे ही अनिश्चितता दिमाग़ में आती है, इसे नोटिस करें और पहचानें.

थमें: प्रतिक्रिया न करें, जैसा आप आमतौर पर करते हैं. किसी भी सूरत में रिएक्ट न करें. थमें और सांस लें.

पीछे धकेलेः ख़ुद को बताएं कि यह केवल फ़ालतू की चिंता है और इस पर कान देने की ज़रूरत नहीं है. यह केवल एक विचार है. हर उस चीज़ पर भरोसा न करें जो आपके दिमाग़ में आती है. विचार वक्तव्य या तथ्य नहीं होते.

जाने देः विचार को जाने दें. आपको उन पर प्रतिक्रिया देने की ज़रूरत नहीं है.

खंगालें: मौजूदा क्षण को पहचानें क्योंकि फ़िलहाल इस पल में सब कुछ ठीक है. अपनी सांसों को महसूस करें. अपने नीचे की ज़मीन महसूस करें. अपने आसपास देखें और नोटिस करें कि आपको क्या दिख रहा है, आप क्या सुन रहे हैं और आप क्या छू सकते हैं. आप क्या सूंघ सकते हैं. इसके बाद अपना ध्यान कहीं और ले जाएं.

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