चीन में फ़ोन इस्तेमाल करने के नए नियम पर विवाद

चीन में फेशियल रिकॉगिनेशन तकनीक

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चीन में अब लोगों को कोई मोबाइल नेटवर्क लेने से पहले अपना चेहरा स्कैन करना होगा. इससे प्रशासन देश के लाखों इंटरनेट यूज़र्स की पहचान का डाटा रख पाएगा.

इन नियमों की घोषणा सितंबर में की गई थी जो रविवार से लागू होंगे.

सरकार का कहना है कि वह साइबरस्पेस में लोगों के अधिकारों और रूचि की सुरक्षा करना चाहती है.

चीन पहले से ही जनगणना के लिए चेहरे से पहचान करने वाली तकनीक (फ़ेशियल रिकॉगिनेशन टेक्नोलॉजी) का इस्तेमाल कर रहा है.

चीन ऐसी तकनीकों में विश्व में सबसे आगे है लेकिन सरकार द्वारा इसके बढ़ते इस्तेमाल ने इस तकनीक को लेकर विवाद भी पैदा कर दिया है.

बीजिंग में अक्तूबर में हुए एक्सपो के दौरान प्रदर्शित सीसीटीवी कैमरा

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इमेज कैप्शन, बीजिंग में अक्तूबर में हुए एक्सपो के दौरान प्रदर्शित सीसीटीवी कैमरा

क्या हैं नए नियम

कई देशों में नए मोबाइल या सिम कार्ड ख़रीदते समय लोगों को अपना पहचान पत्र दिखाना होता है.

लेकिन, अब चीन में अपनी पहचान साबित करने के लिए लोगों को चेहरा स्कैन कराना होगा.

चीन कई सालों से इस तरह के नियम लागू करने की कोशिश करता रहा है जिससे की हर कोई अपनी असल पहचान के साथ इंटरनेट का इस्तेमाल करे.

उदाहरण के लिए 2017 में आए नए नियमों के तहत इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स के लिए ऑनलाइन कंटेंट डालने से पहले यूज़र्स की पहचान की पुष्टि करना ज़रूरी है.

टेलीकॉम ऑपरेटर्स के लिए ये नए नियम उद्योग एवं सूचना तकनीक मंत्रालय ने तैयार किए थे ताकि सिस्टम को मजबूत किया जा सके और सरकार सभी मोबाइल फ़ोन यूज़र्स की पहचान कर सके क्योंकि लोग फ़ोन के ज़रिए भी इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं.

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में चीन के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर शोध करने वाले जेफरी डिंग कहते हैं कि चीन का एक मक़सद साइबर सुरक्षा को बढ़ाने और इंटरनेट धोखाधड़ी को कम करने के लिए अज्ञात फोन नंबरों और इंटरनेट अकाउंट्स से छुटकारा पाना है.

जेफरी डिंग कहते हैं, ''लेकिन यह हर किसी पर नज़र बनाए रखने की कोशिश से भी जुड़ा हुआ है. हो सकता है कि यही सरकार का मक़सद है.''

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लोगों को परेशान होना चाहिए?

जब सितंबर में नियमों की घोषणा की गई थी तो चीनी मीडिया ने इस पर ख़ास ध्यान नहीं दिया था.

लेकिन, सैकड़ों सोशल मीडिया यूज़र्स ने बड़े स्तर पर उनका डाटा इकट्ठा करने को लेकर चिंता ज़ाहिर की थी.

माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट सिना वीबो के एक यूज़र ने कहा, ''लोगों पर कड़ी से कड़ी निगाह रखी जा रही है. पता नहीं उन्हें किस बात का डर है.''

कई और लोगों ने भी शिकायत की है कि चीन में कई बार डाटा का उल्लंघन हुआ है.

एक यूज़र का कहना है कि चोर अब तुम्हारा नाम जानने से पहले ये जान जाएंगे की आप दिखते कैसे हैं. इस पोस्ट पर हज़ार लाइक किए गए हैं.

एक और यूज़र ने इस नियम की आलोचना करते हुए कहा है कि इसे बिना लोगों की सहमति के लागू किया जा रहा है.

एक अन्य यूज़र का कहना है कि उन्हें कई बार ऐसे फर्ज़ी कॉल आते हैं जिनमें कॉल करने वाले को उनका नाम और पता मालूम होता है.

हालांकि, ऐसे भी लोग हैं जो इसके बहुत ज़्यादा ख़िलाफ़ नहीं हैं, उनका कहना है कि ये क़दम बढ़ती तकनीक के साथ चलना है.

चीन ने पहले से ही बड़े पैमाने पर इंटरनेट पर कंटेंट सेंसर कर रहा है और उसे लेकर नीतियां बनाता है ताकि लोग वो न देख और बोल पाएं जो सरकार नहीं चाहती.

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चीन मेंचेहरे की पहचान

चीन को अक्सर एक निगरानी देश कहा जाता है. साल 2017 में पूरे देश में 17 करोड़ सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके थे. साथ ही 2020 तक 40 करोड़ कैमरे लगाने का लक्ष्य था.

इसके अलावा चीन एक 'सोशल क्रेडिट' सिस्टम बना रहा है जिससे एक डाटाबेस में अपने सभी नागरिकों के आचरण और सार्वजनिक बातचीत का हिसाब रखा जा सके.

निगरानी प्रणाली में चेहरे की पहचान की तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और भगोड़ों को पकड़ने के लिए इसके इस्तेमाल की तारीफ़ भी की जाती है.

पिछले साल, एक ख़बर थी कि पुलिस ने इस तकनीक की मदद से एक कॉन्सर्ट में 60 हज़ार लोगों के बीच एक भगोड़े को पकड़ा था.

इस साल न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन के पश्चिमी इलाक़े शिनजियांग में लाखों वीगर मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों को हिरासत में लिया गया है. प्रशासन इसे पुनर्शिक्षा कहता है. यहां पर ख़ासतौर पर वीगर मुसलमानों पर नज़र रखने के लिए चेहरे की पहचान वाले कैमरे लगाए गए हैं.

लेकिन, चीन में चेहरे की पहचान आम जीवन का हिस्सा बनती जा रही है. ये दुकानों और सुपरमार्केट्स में ख़रीदारी करने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल की जाती है.

बच्चों की तस्वीरें

हालांकि, इसके नुक़सान भी हैं. इस साल की शुरुआत में एक यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर ने एक वाइल्डलाइफ़ पार्क पर चेहरे की पहचान अनिवार्य करने को लेकर मुक़दमा कर दिया था.

जिसके बाद सरकार के बड़े स्तर पर लोगों का डाटा रखने को लेकर बहस शुरू हो गई.

सितंबर में चीन की सरकार ने कहा था कि उसने चेहरे के पहचान की तकनीक के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने और उसे विनियमित करने की योजना बनाई है.

सरकार के इस बयान से पहले एक रिपोर्ट आई थी कि एक यूनिवर्सिटी विद्यार्थियों की उपस्थिति और व्यवहार की निगरानी के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल कर रही है.

जेफरी डिंग कहते हैं कि यह स्पष्ट है कि चीन में चेहरे की पहचान की तकनीक को लेकर आलोचना लगातार बढ़ रही है. लेकिन, ऐसी आलोचनाएं डाटा चोरी, हैकिंग और उत्पीड़न जैसे मुद्दों के इर्दगिर्द ही होती हैं. हालांकि, धीरे-धीरे लोग जनता पर नज़र रखने के लिए इस डाटा के इस्तेमाल की भी चर्चा करने लगे हैं.

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