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अंतरिक्ष में इंसान भेजेगा भारत, आम नागरिक को भी मिलेगा मौका
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरू से, बीबीसी हिंदी के लिए
अंतरिक्ष में अपने पहले मानव मिशन के सपने को साकार करने के लिए भारत पूरी तरह तैयार है.
योजना के मुताबिक़ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) दिसंबर 2021 में अंतरिक्ष में अपना पहला मानव मिशन भेजेगा.
इस मानव मिशन में न सिर्फ वैज्ञानिक होंगे बल्कि एक आम नागरिक को भी इस महत्वकांक्षी परियोजना का हिस्सा बनने का मौका मिलेगा.
इसरो के अध्यक्ष डॉ. के सिवन ने बीबीसी को बताया कि चयन की प्रक्रिया भारतीय वायु सेना के ज़रिए होगी.
उन्होंने कहा, "इसमें एक आम नागरिक को भी शामिल किया जाएगा. काफी कुछ उनकी यात्रा कर सकने की क्षमता पर निर्भर करता है."
नौ हज़ार तेइस करोड़ रुपए से बनाए गए मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र के उद्घाटन के बाद डॉ. सिवन इसकी घोषणा कर रहे थे.
यह उड़ान केंद्र भारत के पहले मानव मिशन से जुड़ी तैयारियां करेगा. इसरो अंतरिक्ष में तीन लोगों की टीम भेजने की तैयारी कर रहा है.
डॉ. उन्नीकृष्णन नायर को इस उड़ान केंद्र का प्रमुख बनाया गया है और गगनयान परियोजना के निदेशक डॉ. आर हटन होंगे.
प्रधानमंत्री मोदी ने की थी घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर गगनयान परियोजना की घोषणा की थी.
डॉ. सिवन कहते हैं, "इस साल गगनयान संसथा की सर्वोच्च प्राथमिकता की सूची में है. हम लोग अपने पहले मानव रहित मिशन को दिसंबर 2020 में भेजने की योजना बना रहे हैं. ऐसी दूसरी योजना जुलाई 2021 में पूरी होगी. इन दोनों की सफलता के बाद दिसंबर 2021 में मानव मिशन की योजना पूरी की जाएगी."
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी घोषणा में 2022 तक अंतरिक्ष में इंसान भेजने की बात कही थी.
इसरो 2022 शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री की इस घोषणा को साकार करना चाहता है.
डॉ. सिवन कहते हैं कि इसरो चाहता है कि अंतरिक्ष में महिला को भेजा जाए.
वो कहते हैं, "हम लोग चाहते हैं कि अंतरिक्ष में महिला वैज्ञानिक जाए, यह हमारा लक्ष्य है. मेरे विचार से हम पुरुष और महिला, दोनों वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित करेंगे. प्रधानमंत्री ने भाइयों और बहनों का जिक्र किया था. हम इसे पूरा करना चाहते हैं, हालांकि इसके लिए प्रशिक्षण और दूसरे चीजों की ज़रूरत होगी."
इसरो के पूर्व अध्यक्ष एएस किरण कुमार ने बीबीसी हिंदी से कहा इसके लिए चयन प्रक्रिया की ज़रूरत होगी.
"सामान्य तौर पर कोई भी आम नागरिक इसके लिए आवेदन कर सकता है. चयन और प्रशिक्षण की एक पूरी प्रक्रिया होती है. यह सभी के लिए खुला होगा."
उम्मीदें
डॉ. सिवन ने बताया कि अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को पहले भारत में प्रशिक्षित किया जाएगा. इसके बाद उनकी एडवांस ट्रेनिंग उन देशों में होगी, जो पहले अंतरिक्ष में इंसान भेज चुके हैं, शायद रूस में.
मानव मिशन से यह उम्मीद की जा रही है कि यह देश के विभिन्न सेक्टर के लिए कई तरह के तकनीक का विकास करेगा.
डॉ. सिवन कहते हैं, "इसरो के लिए गगनयान एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा. अभी तक हम लोग इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम कर रहे थे, जिसमें यान, क्रू के मॉड्यूल बनाना या रॉकेट लांच करना आदि शामिल थे."
किरण कुमार के मुताबिक़ भारत को अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजने वालों की श्रेणी में शामिल होना ज़रूरी है और यह अच्छी बात है कि भारत इस दिशा में काम कर रहा है.
इससे पहले साल 2009 में योजना आयोग ने अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजने का प्रस्ताव रखा था. तब से इसरो इस दिशा में काम कर रहा है. इसरो ने इस दिशा में कई परीक्षण भी किए हैं.
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