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वोडाफ़ोन-आइडिया के विलय का ग्राहकों पर क्या असर होगा?
- Author, आशुतोष सिन्हा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
नंबर तीन और नंबर दो मिलकर अब नंबर एक हो गए हैं. एक-दो-तीन के इस खेल का मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वालों के लिए काफ़ी महत्व है.
वोडाफ़ोन और आइडिया के विलय के बाद अब 40 करोड़ से भी ज़्यादा ग्राहकों के साथ यह देश की सबसे बड़ी मोबाइल फ़ोन कंपनी बन गई है. एयरटेल अब देश की दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल फ़ोन कंपनी है.
टेलीकॉम सेक्टर में हो रहे इस बदलाव से 100 करोड़ से ज़्यादा ग्राहक प्रभावित होंगे. पिछले दो साल में मोबाइल पर कॉल और डेटा के लिए जो कीमतों में मारकाट मची थी, अब उसके दूसरे चरण की शुरुआत हो सकती है.
कुछ लोगों का मानना है कि अब तीन सबसे बड़ी कंपनियों में पोस्टपेड ग्राहकों को लेकर होड़ मच सकती है.
अब तक जिओ सस्ती कॉल दे कर ग्राहकों को बटोरने की कोशिश कर रहा था. लेकिन दूसरे दौर में अब वो पोस्टपेड ग्राहकों को अपनी लुभावनी स्कीम देकर अपनी ओर खींचने की कोशिश कर सकता है.
कुछ महीने पहले जिओ ने अपनी पोस्टपेड स्कीम को भी लॉन्च किया था.
प्रीपेड Vs पोस्टपेड ग्राहक
लेकिन पोस्टपेड ग्राहकों के लिए होड़ में विज्ञापनों का सहारा नहीं लिया जाएगा.
उसके लिए बड़ी कंपनियों को लुभावने ऑफ़र दिए जाएंगे और उनके सभी ग्राहक एकमुश्त नए मोबाइल फ़ोन ऑपरेटर के साथ जुड़ सकते हैं. बिज़नेस की दुनिया में ऐसा होना कोई नई बात नहीं है.
आम तौर पर माना जाता है कि पोस्टपेड ग्राहक अपने महीने के फ़ोन के बिल की चिंता नहीं करते हैं और अक्सर उनकी कंपनी उनके बिल के पैसे देती है.
इसलिए महीने के अंत में प्रीपेड ग्राहक के मुकाबले उनका बिल भी कहीं ज़्यादा होता है.
देश के 100 करोड़ से कुछ ज़्यादा मोबाइल फ़ोन ग्राहक में से क़रीब 90 फ़ीसदी प्रीपेड ग्राहक हैं.
अपने फ़ोन को रिचार्ज करने के लिए, औसतन ये लोग हर महीने 150 रुपये से भी कुछ कम खर्च करते हैं.
सितम्बर 2016 में जब जिओ ने अपनी सर्विस लॉन्च की थी तो ऐसे ही ग्राहकों को अपनी सस्ती से सस्ती सर्विस बेचने की कोशिश की थी.
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जिओ और एयरटेल की आगे की योजना
टेलीकॉम कंपनियों की संख्या कम होने के कारण कुछ नौकरियां ज़रूर कम हो सकती हैं.
फ़िलहाल वोडाफ़ोन और आइडिया दोनों के अपने ब्रांड और स्टोर देश भर में दिखाई देंगे. लेकिन जैसे-जैसे ये विलय सफल होता जाएगा, दोनों कंपनियां दो अलग-अलग ब्रांड पर पैसे खर्च करना बंद कर देगी.
जैसे ही दोनों कंपनियां एक ब्रांड पर काम करेंगी, कुछ नौकरियां ख़त्म हो सकती हैं. लेकिन इनकी संख्या कुछ हज़ार से ज़्यादा नहीं होगी.
जिओ अब बहुत तेज़ी से फ़िक्स्ड लाइन ब्रॉडबैंड के धंधे में भी अपनी सर्विस शुरू कर रहा है.
इस सर्विस के लिए देश भर में उसकी टक्कर एयरटेल से होगी क्योंकि वोडाफ़ोन और आइडिया ये सर्विस नहीं देते हैं.
जिओ की कोशिश है कि स्मार्ट टेलीविज़न के लिए सभी तरह की फ़िल्म और ब्रॉडबैंड पर कंटेंट घरों तक पहुंचाए. जैसा कि मोबाइल सर्विस के साथ जिओ ने किया था, सस्ती ब्रॉडबैंड सर्विस की मदद से वो करोड़ों घरों तक पहुँचने की कोशिश कर रहा है.
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देश के बड़े शहरों में ब्रॉडबैंड सर्विस देने वाली सैकड़ों छोटी कंपनियां हैं. उनके लिए जिओ और एयरटेल जितनी सस्ती सर्विस देना मुश्किल हो सकता है.
अगर आप उसकी सर्विस ही लेना चाहेंगे तो उन्हें क़ीमतें कम करने को भी कह सकते हैं.
जिओ के मुफ्त कॉल देने के साल भर के अंदर ही आइडिया और वोडाफ़ोन पर कुछ ऐसा असर हुआ कि दोनों कंपनियों ने एक दूसरे के साथ विलय करने का फ़ैसला कर लिया.
जिओ के लॉन्च होने के बाद चारों कंपनियों के बीच सस्ती से सस्ती दरों पर कॉल और डाटा सर्विस देने के लिए होड़ मची हुई थी.
मोबाइल और फिक्स्ड लाइन ब्रॉडबैंड के इस घमासान में जब एक या दो कंपनी दूसरों से आगे निकल जाएगी तो उसके बाद क़ीमतें ऊपर जाने की उम्मीद की जा सकती है.
लेकिन अगले तीन से चार साल में इसकी संभावना कम लगती है.
एक बात तो साफ़ है - अगर आप मोबाइल पर डेटा इस्तेमाल करते हैं तो अब भी बहुत सस्ती सर्विस की उम्मीद कर सकते हैं.
जब तक ब्रॉडबैंड ओर मोबाइल डेटा का बाज़ार बढ़ रहा है तब तक कंपनियों से ऐसी रेवड़ी की उम्मीद की जा सकती है.
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