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कब तक आएगी 5G की हाई स्पीड इंटरनेट सेवा
- Author, मैथ्यू वॉल
- पदनाम, टेक्नोलॉजी ऑफ़ बिज़नेस एडिटर
हमारी दुनिया में 5G दस्तक देने वाला है. अगले साल की शुरुआत तक कई देशों में हाई स्पीड इंटरनेट सेवा की शुरुआत की जा सकती है.
इन देशों का दावा है कि इस सेवा के आ जाने के बाद इंटरनेट की स्पीड दस से बीस गुना तक बढ़ जाएगी.
इसके आने के बाद क्या हमारे जीवन में कोई बदलाव आएगा? क्या हम लोगों को फिर से नया फ़ोन ख़रीदना होगा, जैसे 3G और 4G के वक़्त खरीदना पड़ा था?
क्या गांव-गांव तक इंटरनेट पहुंच जाएगा?
इन सभी के सवालों से पहले 5G से जुड़ी बुनियादी सवालों का जवाब जानना ज़रूरी है.
आख़िर 5G है क्या?
इसे मोबाइल इंटरनेट की पांचवीं पीढ़ी माना जा रहा है, जिसकी स्पीड मौजूदा इंटरनेट स्पीड से कहीं अधिक होगी. जिससे बड़े डेटा को आसानी से डाउनलोड और अपलोड किया जा सकेगा.
इसकी पहुंची वर्तमान मोबाइल इंटरनेट से कहीं अधिक और बेहतर होगी. यह तकनीक पूरी तरह से रेडियो स्पेक्ट्रम के बेहतर इस्तेमाल का उदाहरण होगी और इससे एक साथ कई डिवाइस को इंटरनेट से जोड़ा जा सकेगा.
तो हम क्या कर पाएंगे?
एक मोबाइल डेटा एनालिटिक्स कंपनी ओपनसिग्नल से जुड़े लैन फॉग कहते हैं, "जो भी हम लोग आज अपने मोबाइल से कर पा रहे हैं उसे और तेज़ और बेहतर तरीके से कर पाएंगे. वीडियो की क्वालिटी बढ़ जाएगी, हाई स्पीड इंटरनेट शहर को स्मार्ट बना देगा. और बहुत कुछ होगा, जो हम अभी सोच नहीं सकते हैं."
कल्पना कीजिए राहत और बचाव कार्यों में लगो ड्रोन्स के झुंड की, या आग का जायज़ा ले रहे, ट्रैफिक़ पर निगरानी रख रहे ड्रोन्स की जो आपस में बिना तारों के जुड़े हैं और साथ ही साथ ज़मीन पर स्थित नियंत्रण केंद्रों के लगातार संपर्क में हों.
स्वचालित कारें भी एक दूसरे से बेहतर संवाद कर पाएंगी और यातायात और मैप्स से जुड़ा डेटा लाइव साझा कर पाएंगी.
मेडिकल फैसिलिटी बेहतर हो जाएगी और भी बहुत कुछ होगा, जो हमारी दुनिया बदल देगा.
यह काम कैसे करेगा?
कई नई तकनीकें इस्तेमाल की जाएंगी लेकिन अभी तक 5जी के सभी प्रोटोकॉल तय नहीं किए गए हैं.
यह हाई फ्रीक्वेंसी बैंड पर काम करेगा, 3.5GHz से 26GHz या उससे भी ज्यादा पर. इस फ्रीक्वेंसी बैंड में वेव लेंथ छोटे होते हैं. लेकिन परेशानी यह है कि छोटे वेव लेंथ को आसानी से रोका जा सकता है.
ऐसे में हो सकता है कि इन मिलीमीटर तरंगों को प्रसारित करने के लिए कम ऊंचाई वाले टेलिफ़ोन टावर लगाने पड़े जो एक दूसरे के अधिक नज़दीक होंगे.
इसके लिए कई ट्रांसमीटर लगाने होंगे, जिस पर ख़र्च ज़्यादा आएगा और टेलिकॉम कंपनियां निवेश और फ़ायदे पर सोच कर ही इसे भारत में शुरू करेंगी.
4G से कितना अलग होगा?
यह पूरी तरह 4G तकनीक से अलग होगा. यह नई रेडियो तकनीक पर काम करेगा. हालांकि शुरुआत में यह अपने ऑरिजिनल स्पीड में काम करेगा या नहीं, यह भी तय नहीं है क्योंकि यह सबकुछ टेलिकॉम कंपनियां के निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर करता है.
फिलहाल 4जी पर सर्वाधिक स्पीड 45 एमबीपीएस तक की मुमकिन है. चिप बनाने वाली कंपनी क्वालकॉम का अनुमान है कि 5जी तकनीक इससे 10 से 20 गुना तक अधिक स्पीड हासिल कर सकती है.
आप एक हाई डेफ़िनिशन फ़िल्म को एक या दो मिनट में पूरा डाउनलोड करने की कल्पना कर सकते हैं.
कब तक 5G संभव?
अधिकतर देशों में 5G साल 2020 तक लॉन्च हो जाएगा. हालांकि क़तर की एक कंपनी का कहना है वो यह सेवा लॉन्च कर चुकी है, वहीं दक्षिण कोरिया अगले साल तक इस सेवा की शुरुआत कर देगा.
चीन भी 2019 में 5G लॉन्च करने की योजना बना रहा है.
भारत में 5जी कब तक
लेकिन भारत में 5जी आने में शायद अभी देर लगे. टेलीकॉम विशेषज्ञ आशुतोष सिन्हा मानते हैं कि इस नई तकनीक के लिए ज़रूरी भारी निवेश करने से शायद भारतीय कंपनियां बचें.
वो कहते हैं, "भारतीय टेलीकॉम बाज़ार बेहद प्रतिस्पर्धी हो गया है. कंपनियां मुनाफ़ा नहीं कमा पा रही हैं. ऐसे में नई तकनीक में निवेश करना कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाएगा."
सिन्हा कहते हैं, "इसका एक पहलू ये भी है कि क्या ग्राहक अधिक पैसा चुकाने के लिए तैयार हो पाएंगे. भारतीय बाज़ार में इस समय ग्राहकों को 4जी डेटा बेहद सस्ते दामों पर मिल रहा है. ऐसे में वो 5 जी पर अधिक ख़र्च करेंगे या नहीं ये देखने की बात होगी."
क्या फोन बदलना होगा?
शायद, क्योंकि जब 4G आया था, तब फ़ोन बदलना पड़ा था. यह संभव है कि नए फ़ोन बिना सिम के चलें. कई कंपनियां नई तकनीक पर काम कर रही है.
गांवों तक इसकी पहुंच हो सकती है पर यह कितना फ़ायदेमंद होगी, यह कहना मुश्किल है क्योंकि ग़रीब आबादी इस तकनीक पर ज़्यादा ख़र्च नहीं कर पाएगी.
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