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वजाइना की सर्जरी का क्यों बढ़ रहा है चलन?
- Author, जीन मैकेंज़ी
- पदनाम, विक्टोरिया डर्बीशायर प्रोग्राम
बीबीसी से विक्टोरिया डर्बीशायर शो में नौ साल तक की लड़कियों ने बताया कि वो अपने वजाइना की सर्जरी कराना चाहती हैं.
जानीमानी एडोलेसेंट गाइनोकोलॉजिस्ट डॉ. नाओमी क्राउच के अनुसार, उनके सामने आने वाले ऐसे मामलों में बढ़ोत्तरी हो रही है और लड़कियों की उम्र नौ साल तक है.
इस सर्जरी को लैबियाप्लास्टी कहा जाता है, जिसमें वजाइना के लिप्स को छोटा किया जाता है या उनका आकार बदला जाता है.
हालांकि ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा एनएचएस के मुताबिक ऐसी सर्जरी 18 साल से पहले नहीं करानी चाहिए.
एनचएस में 2015-16 के दौरान 18 साल से कम उम्र की 200 लड़कियों की लैबियाप्लास्टी की गई. इसमें 150 लड़कियों की उम्र 15 साल से कम थी.
हालांकि एनएचएस ने कहा है कि ये सर्जरी कॉस्मेटिक के तौर पर नहीं बल्कि क्लीनिकल वजह से की गई.
ब्रिटिश सोसायटी फ़ॉर पीडियाट्रिक एंड एडोलेसेंट गाइनोकोलॉजी की प्रमुख डॉ. क्राउच कहती हैं, "लड़कियां ये कहते हुए सर्जरी कराने की बात करती हैं कि मैं इससे नफ़रत करती हूं, मैं इसे हटाना चाहती हूं. अपने शरीर के सबसे नाज़ुक हिस्से के प्रति लड़कियों का ये रवैया बहुत चिंताजनक है."
अन्ना की कहानी
चौदह साल की उम्र में लैबियाप्लास्टी के बारे में सोचने वाली अन्ना (बदला हुआ नाम) ने बताया, "मुझे कहीं से पता चला कि ये बहुत साफ़-सफ़ाई वाला नहीं है और मैं इसे छोटा भी कराना चाहती थी."
अन्ना के अनुसार, "मेरे आसपास के लोग पॉर्न देखते थे और मुझे लगा कि इसे सुडौल होना चाहिए न कि चिपचिपा."
"मैंने सोचा कि हर कोई ऐसा ही दिखता होगा क्योंकि इससे पहले मैंने कोई नॉर्मल तस्वीर नहीं देखी थी. मैं सर्जरी के बारे में सोचने लगी और तब पता चला कि ऐसा चाहने वाली मैं अकेली नहीं थी और हो सकता है कि ये कोई बड़ी बात न हो."
हालांकि उन्होंने बाद में सर्जरी न कराने का फ़ैसला किया.
पॉर्नोग्राफ़ी और सोशल मीडिया
इसके पीछे वो पॉर्नोग्राफ़ी और सोशल मीडिया पर आने वाली लड़कियों की अविश्वसनीय तस्वीरों को ज़िम्मेदार मानती हैं.
वो कहती हैं, "इसको लेकर कोई शिक्षा नहीं है और इसे बहुत कम उम्र में ही शुरू कर देना चहिए और बताना चाहिए सभी में भिन्नताएं होती हैं, जैसे हम सभी का चेहरा अलग अलग होता है, वैसे ही अन्य हिस्से भी अलग अलग दिखते हैं."
पिछले कुछ सालों से डॉक्टर ऐसे मरीज़ों को ही सर्जरी की सलाह देते हैं जिन्हें दर्द या मानसिक तनाव की समस्या हो.
लेकिन डॉ. डी ज़ूलुएट्टा का कहना है कि लड़कियां इसके लिए लक्षण को बढ़ा-चढ़ाकर बताती हैं.
डी ज़ूलुएट्टा के अनुसार, लैबिया के आकार की समस्या को लेकर आने वाली लड़कियों की संख्या पिछले कुछ सालों में बढ़ी है.
वो कहती हैं, "मेरे पास 11,12, 13 साल तक की लड़कियां आती हैं जिन्हें लगता है कि उनके लैबिया का आकार ग़लत है और उन्हें इससे नफ़रत है."
"उनकी धारणा है कि इनर लिप्स को अदृश्य होना चाहिए, लेकिन हकीक़त है कि इसमें बहुत भिन्नता होती है और इसका बाहर निकला रहना सामान्य बात है."
ख़तना और लैबियाप्लास्टी
डॉ. क्राउच का मानना है कि ये सर्जरी उन्हीं लड़कियों पर की जाए जिन्हें दिक्कत है.
वो कहती हैं, "150 लड़कियों को एक जैसी समस्या होगी, इसपर भरोसा करना मुश्किल है, इसका मतलब है कि वो लैबियाप्लास्टी करना चाहती थीं."
उन्होंने ये भी कहा कि महिलाओं के ख़तना (एफ़एमजी) और लैबियाप्लास्टी में बहुत कुछ समानता है. एफ़एमजी ब्रिटेन में ग़ैरक़ानूनी है.
डॉ. क्राउच के अनुसार, "क़ानून के अनुसार, सांस्कृतिक कारणों से विकसित हो रहे शरीर पर ऐसी सर्जरी नहीं होनी चाहिए. लेकिन मौजूदा पश्चिमी कल्चर में छोटी लिप्स का चलन है. मैं इसे वैसा ही मानती हूं."
समर्थकों के तर्क
लैबियाप्लास्टी की अधिकांश सर्जरी प्राइवेट कॉस्मेटिक सर्जन करते हैं और इसे चलन बनाने की आलोचना होती रही है.
लेकिन प्लास्टिक सर्जन माइल्स बेरी ये कहते हुए इसका बचाव करते हैं कि इससे महिलाओं की ज़िंदगी सुधर सकती है.
उनके अनुसार, ये लोगों को बुनियादी तौर पर बदल सकता है, इससे महिलाओं में आत्मविश्वास लाया जा सकता है.
वो कहते हैं, "मैंने 16 से 21 साल की उम्र के बहुत से मरीज़ों को देखा है जिनका कोई दोस्त नहीं बना क्योंकि वो इसे लेकर बहुत चिंतित थीं."
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