You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
आख़िर नोकिया के 3310 फ़ोन का क्रेज़ क्यों है?
- Author, मानसी दाश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
द आइकन इज़ बैक - इस साल अपने 17 साल पुराने हैंडसेट को दोबारा दुनिया के सामने पेश कर नोकिया फिर से चर्चा में आ गया.
लोग इस पुराने हैंडसेट 3310 को पसंद कर रहे हैं. यह हैंडसेट पहली बार साल 2000 में बाज़ार में उतारा गया था.
सालों बाद बटन वाले, 2जी नेटवर्क पर चलने वाले इस फ़ोन का लांच संकेत देता है कि जहां दुनिया स्मार्टफ़ोन के मामले में बड़े स्क्रीन वाले इंटरनेट पर जीने वाले फ़ोन की तरफ दौड़ रही है, पुरानी तकनीक के चहेते कम नहीं हैं.
आईडीसी के 2016 की तीसरी तिमाही के आंकड़ों को देखें तो ऐसा लगता है कि फ़ीचर का बाज़ार अभी भी बाक़ी है और शायद यही कारण है पुराने फ़ोन के दोबारा बाज़ार में उतारे जाने का.
पर ग़ौर करें तो हाल के सालों में धीरे-धीरे पुरानी तकनीक के प्रति प्यार बढ़ा है और इसका कारण खुद इस क्षेत्र में तेज़ी से हो रहा विकास है.
'द मिलेनियम सीईओ' के लेखक डेनियल न्यूमैन मानते हैं कि कोई भी गैज़ेट हैकिंग से बच नहीं सकता. लेकिन नई तकनीक वाले गैज़ेट इस मामले में अधिक कमज़ोर हैं.
सच है कि हम अब सिर्फ फ़ोन से कनेक्टेड चीज़ों की तरफ बढ़ चले हैं और ऑर्टिफ़ीशियल इंटेलिजेंस यानी रोबोट्स की बातें करने लगे हैं. लेकिन ये भी सच है सिक्योरिटी एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है, इतना बड़ा कि सरकारें अब इसे लेकर काफ़ी संजीदा हो रही हैं.
अमरीकी ख़ुफिया एजेंसी एफबीआई पहले ही इसे ले कर चेतावनी दे चुकी है कि इंटरनेट से जुड़ी चीज़ों के हैक होने का ख़तरा अधिक होता है और सावधानी ज़रूरी है.
2013 में रूसी सरकार में सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार एजेंसी ने टाइपराइटर ख़रीदने के लिए विज्ञापन दिया था.
यह विज्ञापन रूसी सरकार की वेबसाइट पर छापा गया था. बताया जाता है कि व्हिसलब्लोअर एडवर्ड स्नोडेन और विकीलीक्स से प्रभावित हो कर अहम जानकारियों की सुरक्षा के लिए एजेंसी कम्यूटर की बजाय पुराने टाइपराइटर का इस्तेमाल करना चाहती है.
रूसी सेना और आपातकाल सेवाएं पहले ही कंप्यूटर का मोह त्याग चुकी हैं.
ऐसा नहीं है कि ऐसा करने वाले देशों में रूस अकेला है. अमरीकी सुरक्षा एजेंसी एनएसए पर 2014 में जासूसी का आरोप लगा चुकी जर्मनी भी ईमेल और फ़ोन के अलावा सुरक्षा के लिहाज़ से टाइपराइटर के इस्तेमाल पर विचार कर रही थी.
इस बारे में भी कई अफ़वाहें हैं कि अमरीका के पास चार ऐसे ख़ास विमान हैं जिनमें सरकार के चुनिंदा नेता और आला अधिकारी कई दिनों तक हवा में ही रह सकते हैं. परमाणु युद्ध होने की सूरत में बचने के लिए ये विमान तैयार किए गए हैं जिन्हें ई-4बी या डूम्सडे प्लेन कहा जाता है.
कुछ साल पहले ऐसे ही एक विमान के बारे में गिज़मोडू ने लिखा था कि विमान के कॉकपिट में लेटेस्ट तकनीक की जगह पुराने ऐनालॉग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है. ऐसा इसलिए क्योंकि इलेक्ट्रोमैनेटिक ग्रेडिएशन से लेटेस्ट तकनीक काम करना बंद कर सकती है.
क्वांटम मेकैनिक्स पर अपने काम के लिए जाने जाने वाले स्टीफन हॉकिंग्स, स्पेस एक्स और टेस्ला कंपनी के मालिक एलन मस्क, एपल कंपनी से सह संस्थापक स्टीव वॉज़निएक और आर्टिफीशियल पर काम करने वाले 100 से अधिक जानकार इसके ख़तरों के बारे में पहले ही चेतावनी दे चुके हैं.
साल 2015 को जारी किए एक खुले ख़त में इन जानकारों ने लिखा था कि जहां इसके अपने फ़ायदे हैं ,इनके कई नुक़सान भी हो सकते हैं.
इससे पहले स्टीफ़न हॉकिंग्स ने कहा था कि आर्टिफीशियल मानव जाति का विनाश कर सकता है.
माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स भी कह चुके हैं कि इसके बारे में चिंता होना स्वाभाविक है.
बोइंग ने तो सिक्यूरिटी के मुद्दे को इतना अहम बना लिया कि कंपनी से 2014 में एक फ़ोन लांच किया जो ज़बर्दस्ती ताकत लगा कर खोलने की कोशिश करने पर खुद ही अपने डेटा को मिटा कर ख़त्म कर देता है.
क्या ये कुछ उस जासूस जैसा नहीं लगता जो दुश्मन सेना के हाथों पड़ने पर ज़हर खा लेता है?
एपल के आईफ़ोन में भी कुछ ऐसा फ़ीचर है जहां कई बार पासवर्ड डालने की कोशिश करने पर फ़ोन खुद अपना डेटा उड़ा देता है. यही वजह है कि एफबीआई को सैन बर्नारडिनो के हमलावर का आईफोन हैक करने के लिए एक बाहरी कंपनी की मदद लेनी पड़ी.
जानकार मानते हैं कि आधुनिक गैजेट ख़तरों से लैस है- ये आपकी जासूसी कर सकते हैं या हैक होने पर आपको भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं. कई हैं जो पुरानी तकनीक का रुख़ कर रहे हैं.
लेकिन अब तकनीक इस कदर आगे बढ़ चुकी है कि आम आदमी के लिए पीछे लौटना लगभग असंभव-सा है और इसीलिए सुझाव दिया जाता है 'अपनी सुरक्षा खुद करो.'