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भाजपा और अजित सिंह मिलकर लड़ेंगे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के बीच चुनावी गठबंधन हो गया है. सोमवार को दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता लालकृष्ण आडवाणी और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के अध्यक्ष अजित सिंह ने इस समझौते का ऐलान किया. इस मौक़े पर अजित सिंह का कहना था, " इस गठबंधन से हम उत्तर प्रदेश में लोगों के सामने समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के विकल्प के तौर पर सामने आएंगे." दूसरी तरफ़ लालकृष्ण आडवाणी का कहना था, " हमें उम्मीद है कि आरएलडी के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में आने के बाद पिछले पाँच साल से यूपीए सरकार की वजह से जो तकलीफ़ें देश के आम लोगों को हो रही थीं, उनका ख़ात्मा हो सकेगा. " कुशासन से छुटकारा आडवाणी के अनुसार 'एनडीए में आरएलडी के आने से उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के कुशासन से भी छुटकारा मिलेगा.' अजित सिंह का कहना था कि देश में 'परिवर्तन की ज़रुरत' है और इसी फ़ार्मूले के तहत ये समझौता किया गया है. उन्होंने कहा, " ये मौक़ा बहुत महत्वपूर्ण है. ये एक सीधा सा संकेत है कि लगातार लोगों में एनडीए की लोकप्रियता कितनी बढ़ रही है." अजित सिंह आरएलडी के अध्यक्ष हैं और वो पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे हैं. आरएलडी का प्रभाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों में माना जाता है. |
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