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विश्वास मत: नज़रें छोटे दलों पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की राजनीति में सरगर्मियाँ तेज़ हैं और सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गंठबंधन जहाँ लोकसभा में 22 जुलाई को विश्वास मत के समर्थन में छोटे दलों के साथ लेने की कोशिश में है, वहीं वाम मोर्चा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन विश्वास मत के विरोध में समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं. लोकसभा की 545 सीटों में से दो रिक्त हैं. यूपीए सरकार को बहुमत साबित करने के लिए 543 में से 272 सांसदों का समर्थन पाना होगा. यूपीए को 224 सांसदों का समर्थन तो हासिल हैं और समाजवादी पार्टी के यदि 35 सदस्यों का समर्थन भी उसे मिल जाता है तो उसका आंकड़ा 259 तक पहुँच जाता है. जहाँ यूपीए के वरिष्ठ नेता शेष 13 सांसदों का समर्थन हासिल करने में लगे हुए हैं वहीं वाम दलों ने बहुजन समाज पार्टी के साथ मिलकर विश्वास मत का विरोध करने की ठान ली है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का नेतृत्व कर रहा प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी भी पूरी कोशिश में है कि उसके सांसदों के साथ-साथ कुछ अन्य दलों के सांसद भी विश्वास मत का विरोध करें ताकि सरकार को गिराया जा सके.
इस रणनीतिक को अंतिम स्वरूप भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के आवास पर एनडीए के मुख्यमंत्रियों की बैठक में शुक्रवार को दिया गया. छोटे दलों को मनाने का काम विश्वास मत के समर्थकों और विरोधियों के लिए कई छोटे दलों के साथ-साथ निर्दलीयों का साथ अहम हो गया है. पाँच सांसदों वाला शिबू सोरेन का झारखंड मुक्ति मोर्चा, तीन सांसदों वाला जनता दल (एस), तीन सांसदों वाला अजित सिंह का राष्ट्रीय लोक दल और तीन सांसदों वाली तेलंगाना राष्ट्रीय समिति को दोनों पक्ष अपनी ओर खींचने में लगे हुए हैं. ताज़ा ख़बरें मिलने तक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जेएमएम के शिबू सोरेन की खोज कर रहे थे क्योंकि उनके पाँच सांसदों की सबसे ज़्यादा अहमियत है. लेकिन शिबू सोरेन को एक आपराधिक मामले में सज़ा होने पर उन्हें मनमोहन मंत्रिमंडल से बाहर जाना पड़ा था और उनके इस मामले में निर्दोष ठहराए जाने के बाद भी उनके और कांग्रेस के बीच मनमुटाव जारी है. पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा के जनता दल (एस) के तीन सांसद किस ओर झुकेंगे, ये फ़िलहाल स्पष्ट नहीं है. जहाँ कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा था कि वे पहले अन्य धर्मनिरपेक्ष दलों का रुख़ देखेंगे लेकिन देवेगौड़ा अपने पत्ते खोलने को तैयार नहीं है. उधर राष्ट्रीय लोक दल के तीन सांसदो का रुख़ क्या होगा, ये भी स्पष्ट नहीं है. सीपीआई महासचिव एबी बर्धन ने गुरुवार को राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजित सिंह से मुलाक़ात की थी लेकिन अजित सिंह ने अपना रवैया स्पष्ट नहीं किया था. हालाँकि, केंद्र ने लखनऊ हवाई अड्डे का नाम चौधरी चरण सिंह के नाम पर रखने का फ़ैसला लिया है जिसका अजित सिंह ने स्वागत किया है. उनका कहना था, "बहुत सी नीतियों पर वामपंथियों के साथ हमारे विचार पहले भी एक रहे हैं और अब भी हैं. कोई भी फ़ैसला लेने से पहले हमें पार्टी में बात करनी होगी." तीन सांसदों वाले तेलंगाना राष्ट्रीय समिति ने पहले कहा था कि यदि कांग्रेस अलग तेलंगाना राज्य बनाने का प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रिमंडल के स्तर पर पारित करे तो वे यूपीए के समर्थन में तैयार हो सकते हैं. लेकिन हाल में टीआईएस के नेता चंद्रशेखर राव ने बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती से संपर्क साधा है और उनके विश्वास मत विरोध ख़ेमें में जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं. |
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