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छोटे दलों को मनाने की मुहिम तेज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लगता है वामदलों ने तय कर लिया है कि वो परमाणु क़रार के मसले पर किसी भी हाल में सरकार को कामयाब नहीं होने देंगे. इसी के तहत सीपीआई महासचिव एबी बर्धन ने गुरुवार को राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजित सिंह से मुलाक़ात की. दोनों नेताओं ने मुलाक़ात के बाद पत्रकारों से बात की. एबी बर्धन ने कहा कि उन्होंने परमाणु क़रार के मुद्दे पर अपनी पार्टी के विचार अजित सिंह के सामने रखे हैं और उनके विचार जाने हैं. अजित सिंह ने कहा, " बहुत सी नीतियों पर हमारे विचार पहले भी एक रहे हैं और अब भी हैं." अजित सिंह ने कहा कि अब वो अपनी पार्टी के सांसदों के साथ बैठक करेंगे और उसके बाद फ़ैसला करेंगे कि विश्वास मत पर क्या करना है. अजित सिंह ने कहा, " कोई भी फ़ैसला लेने से पहले हमें पार्टी में बात करनी होगी.'' राष्ट्रीय लोकदल के लोकसभा में तीन सांसद हैं. और जैसे-जैसे संसद में विश्वास मत हासिल करने की तारीख़ नज़दीक आती जा रही है वैसे-वैसे राष्ट्रीय लोकदल जैसी छोटी पार्टियों की अहमियत बढ़ती जा रही है. अजित सिंह का रुख़ अजित सिंह से मिलने बर्धन खुद दिल्ली स्थित उनके बंगले 12, तुगलक रोड पहुँचे. बर्धन ने अजित सिंह को बताया कि उनकी पार्टी ने सरकार से समर्थन क्यों वापस लिया.
ख़बरें हैं कि कांग्रेसी नेता भी अजित सिंह के संपर्क में हैं ताकि वो उन्हें सरकार के पक्ष में वोट देने के लिए मना सकें. लेकिन अजित सिंह ने अपने पत्ते अब तक नहीं खोले हैं. उनका कहना है कि वो फ़ैसला लेने में कोई जल्दबाज़ी नहीं करेंगे. वैसे अजित सिंह की एक मांग ये भी थी कि सरकार लखनऊ एयरपोर्ट का नाम बदल कर उनके पिता और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर कर दे. ऐसी ख़बरें हैं कि सरकार गुरुवार को इसका ऐलान कर देगी. अजित सिंह का कहना था कि सरकार ऐसा करती है तो वो उसका स्वागत करेंगे. वामदल सक्रिय इधर, वामदल अब इस कोशिश में हैं कि किसी भी तरह से सरकार 22 जुलाई को विश्वासमत हासिल न कर सके. इसके लिए वामदल बहुजन समाज पार्टी, तेलुगुदेशम और टीआरएस जैसी पार्टियों से पहले ही मुलाक़ात कर चुके हैं. पिछले दिनों सीपीएम नेता प्रकाश कारत बसपा अध्यक्ष मायावती से मुलाक़ात कर चुके हैं. वहीं, सीपीआई नेताओं ने टीआरएस नेताओं से मुलाक़ात की है. टीआरएस का कहना है कि अगर यूपीए सरकार की तरफ़ से उसे अलग तेलंगाना राज्य के लिए कोई पुख्ता आश्वासन नहीं मिलता तो वो 22 तारीख़ को सरकार के ख़िलाफ़ वोट देंगे. |
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