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गुजरात दंगों में डीएसपी गिरफ़्तार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुजरात में वर्ष 2002 में हुए दंगों के सिलसिले में विशेष जाँच दल ने एक पुलिस अधिकारी को गिरफ़्तार किया है. उप पुलिस अधीक्षक यानी डीएसपी रैंक के अधिकारी केजी एरडा पर लापरवाही बरतने और सबूत से छेड़छाड़ करने के आरोप लगे हैं. सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित जाँच दल ने पहली बार किसी पुलिस अधिकारी को गिरफ़्तार किया है. जाँच दल का कहना है कि दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसाइटी में वो तैनात थे लेकिन हिंसा और आगजनी रोकने के लिए उन्होंने क़दम नहीं उठाए. स्थानीय पत्रकार अजय उमठ का कहना है, "वो गुलबर्ग सोसाइटी के मुख्य द्वार पर खड़े थे. तभी विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता पहुँचे और सोसाइटी में तोड़ फोड़ करने के बाद आग लगा दी." इस घटना में कांग्रेस पार्टी के पूर्व सासंद एहसान जाफ़री समेत 65 लोग मारे गए थे. विशेष जाँच दल के प्रमुख आरके राघवन ने बताया कि एरडा को वलसाड से गिरफ़्तार किया गया. पत्रकार अजय उमठ ने बताया है कि डीएसपी एरडा को सोमवार को अहमदाबाद की स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा. अजय उमठ ने बताया कि गुलबर्ग मोहल्ले की ओर से कई लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी लेकिन कोई असर नहीं हुआ. फिर सुप्रीम कोर्ट की पहल पर पूरे मामले की जाँच के लिए दल बना दिया. | इससे जुड़ी ख़बरें आरएसएस की उड़ीसा सरकार को चेतावनी16 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस हिंसा प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद20 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस सिख विरोधी दंगों की रिपोर्ट माँगी12 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार कुर्सी संभाली25 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस ये 'हिंदुत्व' नहीं 'मोदीत्व' की जीत23 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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