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गुरुवार, 22 जनवरी, 2009 को 09:41 GMT तक के समाचार
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अल क़ायदा के संदिग्ध लड़ाके पकड़े गए
अल क़ायदा के लड़ाके (फ़ाइल फ़ोटो)
पकड़े गए संदिग्ध लड़ाकों में से एक पर लंदन धमाकों में शामिल होने का संदेह है
पाकिस्तान के अधिकारियों के मुताबिक़ पेशावर के बाहर स्थित एक गाँव से अल क़ायदा के सात संदिग्ध लड़ाके पकड़े गए हैं.

पकड़े गए लोगों में से एक की पहचान ज़बी-उल-तैफ़ी के रूप में की गई है. अधिकारियों के मुताबिक उन पर सात जुलाई 2005 को लंदन में हुए सिलसिलेवार धमाकों में शामिल होने का संदेह है.

ख़बरों में कहा गया है कि तैफ़ी सऊदी अरब के निवासी हैं. पाकिस्तान सरकार की ओर से अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

संदेह

ब्रिटेन के विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा, "हम ख़बरों की तहकीकात कर रहे हैं."

लंदन की भूमिगत रेलवे और बस में हुए आत्मघाती हमले में 52 लोग मारे गए थे और सात सौ से अधिक लोग घायल हुए थे.

एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि अमरीकी अधिकारियों से मिली सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई.

पेशावर के बाहरी इलाक़े के एक गाँव बारा क़दीम में एक अफ़ग़ान शरणार्थी के घर पर मारे गए इस छापे में अल क़यदा के इन संदिग्ध लड़ाकों को पकड़ा गया.

 गोरे लोग एक काली कार में आए, जिसके शीशे चढ़े हुए थे लेकिन गोरे लोग कार्रवाई में शामिल नहीं हुए
बारा क़दीम का एक ग्रामिण

अधिकारियों ने कहा कि पकड़े गए लोगों की योजना अफ़ग़ानिस्तान में तैनात पश्चिमी देशों के सैनिकों के लिए रसद और अन्य सामान लेकर जाने वाले ट्रकों पर हमला करने की थी.

पाकिस्तान में मौज़ूद बीबीसी संवाददाता मोहम्मद इलियास ख़ान का कहना है कि पकड़े गए लोगों में से दो या तीन मूल रूप से अरब के निवासी हैं और बाकी अफ़ग़ान मूल के हैं.

कार्रवाई

बारा क़दीम के एक निवासी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि 'उन्होंने कुछ गोरे लोगों को देखा.' उस इलाके में पश्चिमी देशों के निवासियों को 'गोरा' कहा जाता है.

ग्रामीण ने बताया, 'वे लोग एक काली कार में आए, जिसके शीशे चढ़े हुए थे लेकिन गोरे लोग कार्रवाई में शामिल नहीं हुए.'

अमरीकी और पाकिस्तानी सूत्रों ने इसी महीने दावा किया था कि अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर किए गए एक मिसाइल हमले में पाकिस्तान में अल क़ायदा के अभियान प्रमुख और एक अन्य उच्च पदाधिकारी की मौत हो गई.

इनमें से ओसामा-अल-किनी मूल रूप से कीनिया के निवासी थे. उन पर पिछले साल अक्तूबर में इस्लामाबाद के मैरियट होटल पर हुए हमले में शामिल होने का संदेह था.

तालिबानकमज़ोर मगर क़ायम
तालेबान की ताक़त कम ज़रूर हुई है लेकिन उनकी मौजूदगी अभी भी बनी है.
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