|
'अन्याय, असमानता सबसे बड़ी चुनौती' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि अन्याय और असमानता कम करना देश की सबसे बड़ी चुनौती है और इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए. शुक्रवार को नई दिल्ली में ज़िला योजना समिति के अध्यक्षों की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कुपोषण, स्वच्छ पेय जल की आपूर्ति, सबको शिक्षा और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. उनका कहना था, "मेरे विचार से हमारे सामने सबसे अहम मुद्दे अन्याय और असमानता कम करने के लक्ष्यों को हासिल करना है. हमें उन ज़रूरतों को पूरा करना चाहिए जो मानवीय विकास के लिए आवश्यक हैं." प्रधानमंत्री ने ग्रामीण जल आपूर्ति जैसी योजनाओं को सही तरीके से क्रियान्वित करने पर बल दिया. उन्होंने विकास में स्थानीय निकायों की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि पंचायतों के अधिकारों में हर जगह भले ही असमानता हो लेकिन इससे लोकतंत्र की जड़ें निश्चित रुप से गहरी हुई हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि पंचायत चुनाव से राजनीतिक और सामाजिक सशक्तिकरण एक साथ होता है. उन्होंने पंचायती व्यवस्था में चुन कर आए लोगों की क्षमता बढ़ाने की ज़रूरत बताई और स्वीकार किया कि इस दिशा में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'हमें ख़ुद चुनौतियों से निपटना होगा'19 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई हो'13 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस समाज में बढ़ती हिंसा से प्रधानमंत्री चिंतित06 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'आज़ादी के बावजूद असमानता कायम'20 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस असमानता बढ़ाने वाला है एसईजेड17 दिसंबर, 2006 | कारोबार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||