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बाक़ी हैं अभी तबाही के निशाँ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार में पिछले साल अगस्त में आई ज़बर्दस्त बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हुए थे. कई महीने बाद अभी भी लोग इससे हुए नुक़सान से उबर नहीं पाए हैं. कोसी नदी के उफ़ान से नेपाल की सीमा से सटे बिहार के पाँच ज़िलों में विनाश की गाथा लिखने वाली इस बाढ़ ने हज़ारो जानें ली थीं और लाखों लोगों को बेघर कर दिया था. बीरपुर क़स्बे में अपनी ख़ास पहचान रखने वाले मोहम्मद शहज़ादा का घर अब एक पुराने खंडहर में तब्दील हो चुका है और इसके अपनी पुरानी हालत में आने की उम्मीद न के बराबर ही है. घर के सामने का हिस्सा एकदम ख़त्म हो चुका है और बाक़ी बची मज़बूत दीवारों में गहरी दरारें आ गई हैं. इस तबाही ने शहज़ादा को शारीरिक और आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया है. शहज़ादा अपने परिवार के 10 सदस्यों के साथ घर के पिछले हिस्से में रहने को मजबूर हैं. उन्होंने बीबीसी को बताया, “इस बाढ़ में मेरी ज़िंदगी भर की कमाई और बुज़ुर्गो की संपत्ति सब बह गई. तबाही इतनी है कि ये सब दोबारा पहले जैसा करना हमारे बस के बाहर है.” सब बर्बाद हो गया एक दूसरे छोटे व्यापारी अरविंद कुमार राम का घर भी बाढ़ में ढह गया और वो किसी तरह इस नुक़सान की भरपाई करने में जुटे हैं. राम का कहना है, “ये एकदम सुनामी की तरह था. पानी का बहाव इतना तेज़ था कि सीमेंट से बनी मज़बूत इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं.” 60 वर्षीय राधा कृष्णा चौधरी इस हादसे में अपना सब कुछ गवाँ चुके हैं. बाढ़ में बह जाने वाले अपने परिवार के सदस्यों के नाम उन्होंने आज भी अपने दरवाज़े पर लगा रखे हैं. चौधरी कहते हैं, “मैं जानता हूँ जिन्हें मैंने खोया है वो कभी वापस नहीं आएँगे और मेरी ज़िंदगी का अब कोई अर्थ नहीं रह गया है.” कई लोग ऐसे हैं जो बाढ़ में ख़ुद को छोड़कर अपना सब कुछ गवाँ चुके हैं. चाहे वो परिवार के सदस्य हों या फिर मकान सब कुछ. शहज़ादा कहते हैं, “हम उस डरावने वक्त से बाहर आने की कोशिश कर रहे हैं. क्योंकि, ज़िंदगी चलने का नाम है और इसे चलते रहना भी चाहिए.” इस दौरान सरकार की तरफ़ से बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत कार्य जारी हैं. सरकार प्रभावितों तक राहत सामग्री पहुँचाने के लिए दूसरे चरण की शुरुआत कर रही है. मुख्य मंत्री नीतीश कुमार ने कहा, हमने केंद्र से राहत और पुनर्वास के लिए आर्थिक मदद की माँग की है जो कि अभी तक हमें नहीं मिली है. फिर भी बाढ़ प्रभावितों के लिए जो भी हो सकता है वो हम करेंगे.” | इससे जुड़ी ख़बरें बिहार में अब भी लाखों लोग बाढ़ में फँसे01 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस बिहार में राहत को लेकर राजनीति 03 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस राहत वितरण में समन्वय का अभाव05 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस अब बीमारियों की रोकथाम पर ज़ोर11 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस तटबंध टूटने की न्यायिक जाँच के आदेश10 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस बाढ़ पीड़ितों के लिए 9000 करोड़ की माँग13 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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