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तमिल विद्रोही लड़ाई जारी रखने पर दृढ़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका के तमिल विद्रोहियों ने कहा है कि वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे चाहे उन्हें अपने किलिनोच्चि स्थित मुख्यालय को खोना ही क्यों न पड़े. श्रीलंका में इन दिनों भीषण लड़ाई छिड़ी हुई है. श्रीलंका सेना किलिनोच्चि पर कब्ज़ा करना चाहती है और इसीलिए उन्होंने अपने हमले तेज़ कर दिए हैं. किलिनोच्चि स्वायत्तता की मांग कर रहे तमिल विद्रोहियों का मुख्यालय है. तमिल विद्रोही पिछले दो दशकों से भी ज़्यादा समय से श्रीलंका सेना से तमिल अधिकारों और स्वायत्तता के सवाल पर आमने-सामने हैं. उधर विद्रोहियों की राजनीतिक शाखा के प्रमुख ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने अपने हथियार डालने की शर्त पर सरकार से बातचीत की पेशकश को ठुकरा दिया है. विद्रोहियों ने कहा कि उन्होंने पिछली झड़पों में 75 सैनिकों को मार दिया है जबकि सेना के अनुसार 12 सैनिक मारे गए हैं और 12 गायब हैं. विद्रोहियों के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है क्योंकि लड़ाई के क्षेत्र में पत्रकारों का जाना प्रतिबंधित है. तेज़ हुआ संघर्ष किलिनोच्चि पर कब्ज़ा करने की लड़ाई ने भीषण स्वरूप ले लिया है. दोनों पक्ष बड़ी संख्या में एक दूसरे के लोगों को मारने का दावा कर रहे हैं. विद्रोही इस बात पर अड़े हैं कि वे अपने राजनीतिक गढ़ किलिनोच्चि को बचा सकते हैं जबकि विद्रोहियों के राजनीतिक शाखा के प्रमुख बालासिंघम नदेसन ने बीबीसी से ईमेल के माध्यम से कहा कि अगर वे किलिनोच्चि को खो भी देते हैं तो भी लड़ाई जारी रहेगी. उन्होंने कहा, "आज़ादी...सिर्फ़ एक शहर पर निर्भर नहीं है. हम और समुदाय और शहर बसा सकते हैं और आज़ादी के लिए हमारी इस लड़ाई में हमें लोगों का समर्थन मिल रहा है." बालासिंघम ने कहा, "हमें विश्वास है कि हम अपनी मातृभूमि के और ज़्यादा हिस्से पर कब्ज़ा कर लेंगे और भविष्य में बहुत से समुदायों को बसाएंगे." उन्होंने पहले हथियार डालने की शर्त पर ही सरकार से बातचीत की स्थिति बनने की पेशकश को ठुकरा दिया. उन्होंने कहा, "यह यथार्थवादी नहीं है. हमने अपने लोगों की रक्षा करने के लिए हथियार उठाए हैं. इसलिए हम तब तक हथियार नहीं डालेंगे जब तक कि रक्षा की गारंटी न हो." सांकेतिक निशाना किलिनोच्चि विद्रोहियों को कुचलने के लिए सरकार का एक सांकेतिक निशाना है. सरकार के मंत्रियों का अनुमान था कि किलिनोच्चि पर तमिल विद्रोहियों का कब्ज़ा कुछ ही महीनों के लिए है लेकिन विद्रोही अब तक यहाँ जमे हुए हैं. सेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि श्रीलंका के लोग तमिल विद्रोहियों को ख़त्म कर देना चाहते हैं. ब्रिगेडियर उदय अनन्यकारा ने कहा, "सेना भी यही चाहती है और वह तमिल विद्रोहियों के कब्ज़े वाले बाकी क्षेत्रों पर कब्ज़ा करने के लिए भरसक प्रयत्न कर रहे हैं." श्रीलंका की सरकार का कहना है कि वे लड़ाई जीतने के क़रीब हैं लेकिन निकट भविष्य में भारी लड़ाई हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि वे तमिल विद्रोहियों के कब्ज़े वाले क्षेत्र में बड़ी संख्या में बसे नागरिकों के लिए चिंतित है. विद्रोहियों ने आम नागरिकों का अपनी ढाल की तरह इस्तेमाल करने से इनकार किया है और इस आरोप को भी खारिज किया है कि वे लोगों पर लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए दबाव डाल रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंका में हज़ारों आम लोगों का पलायन15 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस संघर्ष में '90 श्रीलंकाई सैनिकों' की मौत 11 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीलंका का अहम नगर पर कब्ज़े का दावा15 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीलंकाः 14 विद्रोहियों को मारने का दावा01 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीलंका को खाद्य सहायता भेजेगा भारत27 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस भारत-श्रीलंका के बीच विचार विमर्श26 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस उत्तरी श्रीलंका में भीषण लड़ाई जारी25 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस किलीनोची के गांव पर सेना का कब्ज़ा20 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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