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श्रीलंका में हज़ारों आम लोगों का पलायन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तरी श्रीलंका से हज़ारों की तादाद में आम लोगों को हमलों से बचने के लिए पलायन करने पर मजबूर होना पड़ रहा है. लोगों का एलटीटीई और श्रीलंका सेना के बीच जारी संघर्ष के कारण इस इलाके से लगातार पलायन जारी है. इसी कड़ी में बीते सप्ताह भी हज़ारों और लोग भी पलायन के लिए विवश हुए हैं और अपने घरों को छोड़कर अन्य स्थानों की ओर रवाना हो गए हैं. श्रीलंका सरकार ने भी लोगों के तेज़ी से हो रहे पलायन की बात को स्वीकारते हुए बताया है कि लोग संघर्ष प्रभावित इलाके को खाली कर रहे हैं. श्रीलंका के मुलातिवू इलाके में सरकार की मुख्य अधिकारी ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया कि जो लोग अपने घरों को छोड़कर निकले हैं वे एलटीटीई के प्रभाव वाले इलाकों की ओर चले गए हैं. उन्होंने बताया कि हाल फिलहाल के दिनों में उत्तरी श्रीलंका के इस इलाके से डेढ़ लाख से भी ज़्यादा लोग पलायन कर चुके हैं. संघर्ष जारी श्रीलंका में दो दशक से भी ज़्यादा समय से सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच संघर्ष जारी है. तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सेना के सक्रिय सशस्त्र अभियान से आम नागरिक बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. अक्टूबर महीने में राहत और सहायता कार्यों में लगी एजेंसियों का आकलन था कि सेना के अभियान के चलते इलाके से लगभग दो लाख लोगों को पलायन करना पड़ा है. पलायन को लेकर विश्व समुदाय के कुछ देशों और राहत व सहायता एजेंसियों ने चिंता भी व्यक्त की थी पर इसके बावजूद लोगों का हिंसा प्रभावित इलाकों से पलायन जारी है. पिछले कुछ महीनों के दौरान सेना के तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान में काफी तेज़ी आई है. इस दौरान एलटीटीई को काफी नुकसान भी हुआ है. | इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंका में तमिलों की सुरक्षा का भरोसा26 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'भारत-श्रीलंका के क़रीबी सामरिक रिश्ते'23 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस उत्तरी श्रीलंका से दो लाख लोग विस्थापित04 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में 'सेना जीत के क़रीब'26 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस उत्तरी श्रीलंका से संयुक्त राष्ट्र का हटना शुरु16 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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