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कोलकाता में हुई दो गिरफ़्तारियाँ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कोलकाता पुलिस ने दो लोगों को गिरफ़्तार किया है जिन पर शक है कि उन्होंने मुंबई में हमला करने वाले चरमपंथियों की मदद की थी. कोलकाता पुलिस के उपायुक्त जावेद शमीम ने बीबीसी हिंदी से बातचीत इस बात की पुष्टि की कि दो लोगों को 'ग़लत तरीक़े से' सिम कार्ड हासिल करने के मामले में गिरफ़्तार किया गया है. जब उनसे पूछा गया कि क्या ये लोग मुंबई के हमलों के संबंध में गिरफ़्तार किए गए हैं तो पुलिस उपायुक्त ने कहा, "इन लोगों को फ़िलहाल धोखाधड़ी के मामले में गिरफ़्तार किया गया है लेकिन हो सकता है कि इन्होंने जो सिम कार्ड हासिल किए थे उनमें से कुछ का इस्तेमाल हमलावरों ने किया हो." उन्होंने कहा, "इन लोगों ने सिम कार्ड सिर्फ़ पैसे के लिए बेचे थे या उनका कोई और मक़सद था यह अभी बता पाना जल्दबाज़ी होगी." जावेद शमीम ने कहा, "इसकी अभी जाँच होनी है कि इन लोगों का मुंबई के हमलावरों से ताल्लुक है या नहीं, इस काम में बहुत सारी एजेंसियाँ शामिल हैं, मुंबई पुलिस और दूसरे अन्य जांचकर्ता ही ये साबित कर पाएँगे. जहाँ तक कोलकाता पुलिस का सवाल है यह धोखाधड़ी का मामला है." कोलकाता पुलिस का कहना है कि मुंबई पर हमला करने वाले चरमपंथियों ने जिन फोनों का इस्तेमाल किया था उनमें से शायद "कुछ के सिम कार्ड को शायद कोलकाता में एक्टिवेट किया गया था" इसलिए यह शक पैदा हुआ है. हमलावर अजमल अमीर अल क़साब के पकड़े जाने के अलावा मुंबई के हमलों से जुड़ी यह पहली गिरफ़्तारी है. गिरफ़्तार किए गए लोगों के नाम तौसीफ़ रहमान और शेख़ मुख़्तार बताया गया है और उनके पास से कई सिम कार्ड बरामद किए गए हैं. कोलकाता पुलिस का कहना है कि तौसीफ़ रहमान ने 40 सिम कार्ड ख़रीदे थे जिनमें से दो कार्डों के बारे में संदेह है कि चरमपंथियों ने उनका इस्तेमाल किया था. |
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