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'विकास दर सात प्रतिशत रहने की उम्मीद' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उम्मीद जताई है कि वैश्विक आर्थिक संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर अगले वर्ष सात प्रतिशत तक रहेगी. ओमान के दौरे पर भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, '' वर्तमान परिस्थितियों में वित्तीय संकट चल रहा है और इसके कारण अगले साल वृद्धि दर के कम हो सकती है लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है कि हम अगले वर्ष भी सात से साढ़े सात प्रतिशत की वृद्धि दर ज़रुर पा लेंगे.'' उल्लेखनीय है कि इसी महीने रिज़र्व बैंक ने अपने अनुमान में कहा था कि अगले वर्ष अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.7 रह सकती है. प्रधानमंत्री का अनुमान इससे थोड़ा कम है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के विश्व आर्थिक परिदृश्य में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर क़रीब 6.3 प्रतिशत आंकी गई है. वैसे भी भारत के कई क्षेत्रों में स्थिति ख़राब दिख रही है. अगस्त महीने में औद्योगिक विकास दर अत्यंत ख़राब 1.3 प्रतिशत रही है जबकि सितंबर में आधारभूत ढांचे में विकास दर 5.1 फीसद रही. इसके अलावा बैंकों के ब्याज़ दर में बढ़ोतरी के कारण निवेश कम हो गया. हालांकि बाद में आरबीआई ने ब्याज़ दरें कम कर दीं ताकि अन्य बैंक भी रिण दरों में कमी कर सकें. प्रधानमंत्री ने पूर्व में भी कहा है कि अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें शेयर बाज़ार दो वर्षों के निचले स्तर पर23 अक्तूबर, 2008 | कारोबार भारतीय शेयर बाज़ार में भूचाल24 अक्तूबर, 2008 | कारोबार आरबीआई ने ब्याज दर घटाई01 नवंबर, 2008 | कारोबार 'आर्थिक संकट से बचने के हरसंभव प्रयास'03 नवंबर, 2008 | कारोबार विकसित अर्थव्यवस्थाओं को लेकर चिंता07 नवंबर, 2008 | कारोबार मंदी की आशंका में बाज़ार फिर गिरे07 नवंबर, 2008 | कारोबार अमरीका में बेरोज़गारी दर और बढ़ी08 नवंबर, 2008 | कारोबार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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