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गुरुवार, 30 अक्तूबर, 2008 को 05:03 GMT तक के समाचार
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मृतक 200 से ज़्यादा, मदद का इंतज़ार
भूकंप पीड़ित
दसियों हज़ार की तादाद में लोग बेघर हो गए हैं
पाकिस्तान में बलूचिस्तान की प्रांतीय राजधानी क्वेटा के पास बुधवार की सुबह आए भीषण भूकंप में मारे जाने वालों की संख्या बढ़ कर 200 से ज़्यादा हो गई है.

उससे भी दुखद स्थिति है हज़ारों की तादाद में भूकंप से बेघर हुए लोगों की जो जानलेवा ठंड के मौसम में राहत का इंतज़ार कर रहे हैं.

बुधवार को पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की सीमा के पास स्थित इस इलाके में भूकंप के कारण कई लोग घायल हुए हैं और कई घर तबाह हो गए हैं. रिएक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 6.5 मापी गई है.

अधिकारियों का कहना है कि भूकंप में मरनेवालों की तादाद बढ़ भी सकती है क्योंकि कई घर ऐसे हैं जिनके बारे में मालूमात नहीं हासिल हो सकी है. कुछ जगहों पर पूरा का पूरा परिवार ही ज़लज़ले में ख़त्म हो गया है.

पाकिस्तान सरकार की ओर से भूकंप पीड़ितों की मदद को लिए राहत कार्य चलाए जा रहे हैं. हेलीकॉप्टरों की मदद से राहत सामग्री लोगों तक पहुँचाने की कोशिश की जा रही है.

दरअसल, ख़ासा ठंडा मौसम होने के कारण जो लोग ज़िंदा बचे हैं, उनके लिए खुले आसमान में रह पाना बहुत मुश्किल है. भूकंप के सदमे और तेज़ ठंड के कारण लोगों की हालत चिंताजनक बनी हुई है.

मदद का प्रस्ताव

आपदा की इस घड़ी में भारत सरकार ने पाकिस्तान से भूकंप के बाद के राहत कार्यों में मदद करने की पेशकश की है.

भारत सरकार की ओर से जारी प्रतिक्रिया में कहा गया है कि भारत संकट की इस घड़ी में प्रभावित लोगों की मदद के लिए तैयार है.

इस बारे में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक पत्र लिखकर पाकिस्तान सरकार से कहा है कि जिस भी तरह की मदद की ज़रूरत होगी, भारत उसे उपलब्ध कराने को तैयार है.

उधर पाकिस्तान सरकार की ओर से प्रभावित इलाकों में मदद पहुँचाने का काम जारी है. लोगों को ज़रूरी सामान पहुँचाने के लिए हैलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है.

बलूचिस्तान पाकिस्तान के पिछड़े प्रांतों में है इसलिए यहाँ तेज़ी से राहत पहुँचा पाना संभव नहीं हो पाया है.

बताया जा रहा है कि अधिकतर मकान कच्चे थे और पूरी तरह से ढह गए हैं. कहीं-कहीं पर पूरा गांव ही तहस-नहस हो गया है.

तबाही का मंज़र

बताया जा रहा है कि पहला झटका स्थानीय समय के मुताबिक बुधवार को सुबह साढ़े चार बजे के क़रीब आया. यह इतना तीव्र नहीं था.

इसके बाद दूसरा झटका आधे घंटे के बाद महसूस किया गया जो कि ज़बरदस्त था. भूकंप का असर क्वेटा से 70 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में सर्वाधिक था.

भूकंप पीड़ित
लोगों के पास गर्म कपड़े नहीं हैं और ठंडे मौसम में राहत समय पर न मिलने से सैकड़ों लोग बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं

यहाँ स्थित ज़्यारत शहर लगभग पूरी तरह से नष्ट हो गया है. मकान गिर गए हैं और लोग हताहत हुए हैं. एजेंसियों के मुताबिक 30 हज़ार से ज़्यादा लोग इसी शहर में भूकंप के कारण बेघर हो गए हैं.

साथ ही जिस इलाके में भूकंप का सर्वाधिक असर है, वो पहाड़ी क्षेत्र है. ऐसे में वहाँ राहत और बचाव दस्तों को पहुँच पाने में मुश्किलें हो रही हैं.

पाकिस्तान में इससे पहले अक्टूबर, 2005 में भारत-पाक सीमा पर स्थित मुजफ़्फ़राबाद के इलाके में भी भूकंप आया था.

इस भूकंप में भारतीय कश्मीर के सैकड़ों लोग मारे गए थे जबकि मुजफ़्फ़राबाद में मरनेवालों की तादाद हज़ारों में थी. लाखों लोग इस भूकंप में प्रभावित हुए थे.

क्वेटा का इतिहास भी वर्ष 1935 में एक ऐसा भूकंप देख चुका है जिसने क्वेटा को लगभग पूरी तरह से तबाह कर दिया था.

वर्ष 1935 में आए भूकंप में 30 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी.

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