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माओवादियों के पुनर्स्थापन की योजना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में सत्ता में आने के बाद वहाँ की माओवादी सरकार ने विशेष शिविरों में रह रहे पूर्व विद्रोहियों के पुनर्स्थापन की योजना तैयार की है. दो वर्ष पूर्व तत्तकालीन सरकार और विद्रोहियों के बीच शांति समझौता हुआ था जिसके बाद सशस्त्र आंदोलन चला रहे विद्रोहियों को संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में गठित शिविरों में रखा गया. सरकारी प्रवक्ता कृष्ण बहादुर महारा ने कहा है कि अब उन्हें स्थायी तौर पर रोज़गार देने के लिए एक पैनल बनाया जा रहा है. यह पैनल विद्रोहियों को नेपाली सेना समेत अन्य सुरक्षा विभागों में तैनात करने का सुझाव देगा. नेपाली सेना को राजशाही के नज़दीक माना जाता रहा है और वो पूर्व गुरिल्ला लड़ाकों को सैनिक बनाने से इनकार करती रही है. हालाँकि अब राजशाही का पूर्ण अंत हो चुका है और बदले हालात में सेना ज़्यादा विरोध करने की स्थिति में नहीं है. इन गुरिल्ला लड़ाकों के हथियार भी संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में रखे गए हैं. इसके बावजूद समय-समय पर माओवादियों पर आम जनता को परेशान करने के आरोप लगते रहे हैं. अब माना जा रहा है कि उन्हें नए निज़ाम में पूर्णकालिक रोज़गार उपलब्ध हो जाने से दर-दर ठोकरें नहीं खाना पड़ेगा और वे व्यवस्थित जीवन जी पाएंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें पूर्व राजा ज्ञानेंद्र पर गिरी 'बिजली'23 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस नेपाल में विमान दुर्घटना, 18 मारे गए08 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस राजशाही पर राजनीति का खेल22 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस भारत के साथ अतुलनीय रिश्ता: प्रचंड15 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस भारत दौरे पर दिल्ली पहुँचे प्रचंड14 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस नेपाल ने 'तिब्बतियों' पर कड़ा रुख़ अपनाया13 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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