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नैनो प्रकरण पर प्रधानमंत्री दुखी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि जिन परिस्थितियों में टाटा को नैनो कार परियोजना पश्चिम बंगाल से हटानी पड़ी, उनसे वे दुखी हैं. उन्होंने औद्योगीकरण की दिशा में आगे बढ़ने के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों को भी ध्यान में रखने पर बल दिया. चीन की यात्रा से लौटते हुए विशेष विमान में पत्रकारों से उन्होंने कहा, "हम आज़ाद लोकतांत्रिक देश हैं. जिन स्थितियों में टाटा को हटना पड़ा, ये निश्चित रुप से दुखद है." इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने माना कि उद्योगपतियों को पूरे देश में कहीं भी अपने सुविधानुसार जगह चुनने की आज़ादी है. ग़ौरतलब है कि ममता बनर्जी के विरोध से उपजी स्थितियों के मद्देनज़र रतन टाटा ने नैनो कार परियोजना पश्चिम बंगाल से हटा कर गुजरात स्थानांतरित करने की घोषणा की है. मनमोहन सिंह ने कहा कि बाज़ार आधारित अर्थव्यवस्था में ये सब होता रहता है. वो कहते हैं, "इस तरह के फ़ैसले पर अनिच्छुक उद्योगपतियों पर थोप नहीं सकते." प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के विकास के लिए औद्योगीकरण ज़रुरी है लेकिन यह किसानों की क़ीमत पर नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि औद्योगिक गतिविधियों के लिए ज़मीन लिए जाने पर किसानों पर उचित मुआवज़ा मिलना चाहिए. उनका कहना था, "भारत को औद्योगीकरण की ज़रूरत है. इसके बिना हम रोज़गार या विकास की समस्यायों का समाधान नहीं निकाल सकते." | इससे जुड़ी ख़बरें पश्चिम बंगाल के नाम टाटा की चिट्ठी17 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस बुद्धदेब को नरेंद्र मोदी की सलाह12 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस सिंगुर में नई परियोजना की मांग11 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस गुजरात के मुख्य सचिव ने कहा - 'नैनो अब गुजरात में'07 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस टाटा का फ़ैसलाः गुजरात में बनेगी नैनो07 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस सिंगुर में सीपीएम का बंद, स्थिति तनावपूर्ण04 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस टाटा ने संयंत्र हटाने का फ़ैसला किया03 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस नैनो का सपना नयनों में ही रह गया03 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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