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पश्चिम बंगाल के नाम टाटा की चिट्ठी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
टाटा उद्योग समूह के प्रमुख रतन टाटा ने पश्चिम बंगाल के आम लोगों के नाम एक खुली चिट्ठी लिखी है जिसमें उन्होंने लोगों से कहा है कि या तो वे एक संपन्नता लानेवाली सरकार का साथ दें या फिर अपने प्रदेश को विनाशकारी राजनीति के मुँह में जाता हुआ देखते रहें. रतन टाटा की ये खुली चिट्ठी कोलकाता के कुछ प्रमुख अख़बारों में प्रकाशित हुई ही जिसमें उन्होंने सिंगुर स्थित नैनो कार परियोजना से हाथ खींचने के अपने फ़ैसले पर सफ़ाई भी दी है. रतन टाटा ने चिट्ठी में कहा है कि इस बात का निर्णय लोगों को करना है कि वे एक औद्योगिक और तकनीकी रूप से अतिविकसित वातावरण में शिक्षा और नौकरियाँ चाहते हैं या जैसा चला आ रहा है वैसे ही चलते रहने देना चाहते हैं. उन्होंने चिट्ठी में कहा है,"उन्हें फ़ैसला करना है कि क्या वो बुद्धदेब भट्टाचार्य को क़ानून के शासन, आधुनिक बुनियादी व्यवस्था और औद्योगिक विकास के दम पर एक संपन्न राज्य बनाने देना चाहते हैं या ये चाहते हैं कि उनका राज्य टकराव की नकारात्मक राजनीति, आंदोलन, हिंसा और अराजकता की बलि चढ़ जाए." रतन टाटा ने अपनी चिट्ठी में नैनो परियोजना की मुसीबतों के लिए तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी को ज़िम्मेदार ठहराया है और कहा है कि ममता बनर्जी और उनका समर्थन करनेवाले कुछ निहित स्वार्थी तत्वों और राजनीतिक दलों ने मिलकर नैनो परियोजना की राह में गंभीर रूकावटें खड़ी कर दीं. उन्होंने लिखा है,"फ़ैक्ट्री लगाए जाने के दौरान कंपनी को परियोजना स्थल पर लगातार ज़बरदस्ती सहनी पड़ी, हिंसा की छिटपुट वारदातें हुईं, परिसर की दीवार तोड़ी गई, परियोजना स्थल से सामानों की चोरी हुई, कर्मचारियों, मज़दूरों और इस इलाके के आम लोगों को धमकाया और पीटा तक गया." रतन टाटा ने आगे लिखा है,"हम आरंभ से ये कहते रहे कि ये परियोजना ऐसी होगी जिसमें एक ही स्थान पर कारखाना भी होगा और उसी के आस-पास सामानों की आपूर्ति के लिए भी व्यवस्था होगी ताकि लागत कम हो. इस व्यवस्था में किसी तरह की बाधा आने से कंपनी के लिए अपने उत्पाद के लक्ष्य को प्राप्त करना बहुत मुश्किल हो जाएगा". उन्होंने कहा कि टाटा ने 22 अगस्त को एक अपील जारी की थी ताकि माहौल बेहतर हो लेकिन दुर्भाग्यवश जवाब में विरोध और तेज़ हो गया जिसके बाद अंततः कंपनी को पश्चिम बंगाल से हटना पड़ा. रतन टाटा ने लिखा है,"हम इस बात से वाकिफ़ हैं कि सिंगुर में कुछ लोगों को गहरी निराशा हुई होगी. हम समझते हैं कि इसके लिए तृणमूल कांग्रेस ज़िम्मेदार है." |
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