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मंदी का असर भारत पर भी: मनमोहन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया में जारी आर्थिक मंदी पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है. हालांकि प्रधानमंत्री ने कहा, "भारतीय बैंकिग क्षेत्र सीधे-सीधे दुनिया में जारी वित्तीय संकट से प्रभावित नहीं है और वह मज़बूत स्थिति में है." उन्होंने कहा कि बैंकों में जमा पूंजी सुरक्षित है और घबराने की कोई बात नहीं है. प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि मंदी की मार को झेलने के लिए सरकार ने कई उपाय किए हैं. उपाय उन्होंने कहा कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट में जो कमी की है उससे भारतीय बैंकों को कम ब्याज पर ऋण मिल पाएगा. उन्होंने कहा कि बैंक के पास पर्याप्त मात्रा में नक़दी है और चिंता की कोई बात नहीं है. मनमोहन सिंह ने कहा कि आर्थिक विकास में फ़िलहाल कमी के लिए भारत को तैयार रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि अभी इस बारे में अंदाज़ा लगाना मुश्किल है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर में कितनी कमी आएगी लेकिन उन्होनें आशा जताई कि वह सात प्रतिशत से नीचे नहीं जाएगी. प्रधानमंत्री ने विपक्ष से अपील की कि वे भारतीय अर्थव्यस्था की नींव में भरोसा रखे और सरकार का सहयोग करे. |
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