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चुनाव के दौरान एक्ज़िट पोल पर रोक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने चुनाव ख़त्म होने से पहले एक्ज़िट पोल के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगाने का फ़ैसला किया है ताकि इससे मतदाता प्रभावित न हों. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को इस फ़ैसले को मंज़ूरी दी है. इसके लिए अब जनप्रतिनिधित्व क़ानून, 1951 में संशोधन किया जाएगा. संशोधन के लिए सरकार संसद में एक विधेयक लाएगी. भारत के सभी बड़े राजनीतिक दल बहुत पहले से एक्ज़िट पोल पर रोक लगाने के पक्ष में रहे हैं. दो साल पहले चुनाव आयोग ने निष्पक्ष चुनाव का हवाला देते हुए चुनाव का अंतिम चरण पूरा होने से पहले एक्ज़िट पोल के नतीजों का प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगा दी थी. लेकिन मीडिया कंपनियों की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने इस आदेश को ख़ारिज कर दिया था. 'मतदाता प्रभावित न हो' लोकसभा और राज्य विधानसभा के चुनाव आमतौर पर कई चरणों में होते हैं. अब तक मीडिया हर चरण में मतदान करके निकलने वाले मतदाताओं की राय के आधार पर चुनावी रुझानों का संकेत देते रहे हैं. लगभग सभी राजनीतिक दलों को आपत्ति रही है कि एक्ज़िट पोल के प्रकाशन और प्रसारण से बाद में मतप्रयोग करने वाले मतदाता प्रभावित होते हैं. बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल के फ़ैसले की जानकारी देते हुए वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने पत्रकारों को बताया कि जब तक किसी भी चुनाव का अंतिम चरण पूरा नहीं हो जाता एक्ज़िट पोल के नतीजों का प्रकाशन और प्रसारण नहीं किया जा सकेगा. पत्रकारों को फ़ैसले की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, "चुनाव ख़त्म होने से पहले एक्ज़िट पोल के नतीजों के प्रकाशन-प्रसारण पर रोक से मतदाताओं को यह अवसर मिलेगा कि वे चुनावी रूझानों से बिना प्रभावित हुए अपने मत का प्रयोग करें." मीडिया कंपनियाँ इस तरह की रोक के ख़िलाफ़ रही हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें अब एक्ज़िट पोल पर क़ानून की बात30 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस एक्ज़िट पोल पर रोक लगाने से इनकार26 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस एक्ज़िट पोल का मुद्दा फिर सुप्रीम कोर्ट में23 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस एक्ज़िट पोल और उसके बाद का विवाद23 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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