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'भारत से कभी ख़तरा नहीं रहा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने स्वीकार किया है कि भारत से उनके देश को कोई ख़तरा नहीं है. साथ ही उन्होंने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में सक्रिय विद्रोही 'आतंकवादी' हैं. ये बातें ज़रदारी ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से साक्षात्कर में कहीं. ये शायद पहली बार है कि किसी पाकिस्तानी नेता ने ऐसा बयान दिया है. ज़रदारी ने कहा, "भारत कभी भी पाकिस्तान के लिए ख़तरा नहीं रहा है. न मैं और न ही हमारे देश की लोकतांत्रिक सरकार विदेशों में भारतीय प्रभाव से डरी हुई है." वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक़ ज़रदारी ने कहा कि कश्मीर में सक्रिय विद्रोही आतंकवादी हैं, अख़बार ने लिखा है कि आम तौर पर उम्मीद यही होती है कि ज़रदारी उन्हें आज़ादी की लड़ाई में जुटे लोग की संज्ञा देंगे. लेकिन पाकिस्तानी संसद की कश्मीर समिति के प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने इस बयान के बाद बीबीसी से बातचीत में राष्ट्रपति ज़रदारी को अनुभवहीन क़रार दिया है. उन्होंने कहा, "पाकिस्तानी सरकार और जनता हमेशा से कश्मीरियों के संघर्ष का सम्मान करती है. राष्ट्रपति ज़रदारी को अभी बयान देने का और बयान में सही शब्दों के चुनाव का अनुभव नहीं है."
एक सवाल के जबाव में ज़रदारी ने कहा कि जब तक पाकिस्तान के साथ समान बर्ताव होता है तब तक उन्हें भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर कोई एतराज़ नहीं है. उन्होंने कहा, "अगर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र से दोस्ताना संबंध हैं तो मुझे क्या आपत्ति हो सकती है." भारत से ख़तरा नहीं भारत के साथ बेहतर संबंध के बारे में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जैसे देश आर्थिक तौर पर टिक नहीं सकते, उन्हें पड़ोसी देशों के साथ व्यापार करना ही पड़ता है. पाकिस्तान में केंद्रीय बैंक के पास विदेशी मुद्रा का भंडार इतना भर है कि वो दो महीने तक तेल और खाद्य सामग्री के आयात का ख़र्च उठा सकता है. इस आर्थिक संकट पर ज़रदारी का कहना था कि वो बाक़ी देशों से 100 अरब डॉलर की उम्मीद करते हैं. अख़बार में लिखा गया है कि ज़रदारी की कल्पना है कि कि भारत में आधारभूत ढाँचे की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पाकिस्तानी सिमेंट फ़ैक्ट्रियाँ मदद करें, पाकिस्तानी टेक्सटाइल मिलें भारत को सामग्री उपलब्ध करवाएँ और भारतीय बंदरगाहों पर भीड़-भाड़ कम करने के लिए पाकिस्तानी बंदरगाहों का इस्तेमाल हो. मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने इसके बाद कहा कि उनकी अध्यक्षता वाली कश्मीर समिति राष्ट्रपति ज़रदारी से ये बयान वापस लेने के लिए कहेगी. भारत को कभी भी दुश्मन नहीं मानने के राष्ट्रपति ज़रदारी के बयान पर उन्होंने कहा, "अगर आप पाकिस्तानी सेना के किसी भी जवान से दुश्मन का मतलब पूछेंगे तो उसके लिए वो भारत ही होगा. मगर पाकिस्तान में सरकार भारत से दोस्ती चाहती है और ज़रदारी का बयान उसी भावना को उजागर करता है." | इससे जुड़ी ख़बरें भारत और पाकिस्तान बातचीत पर सहमत25 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस मनमोहन सिंह की ज़रदारी से मुलाक़ात24 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'कश्मीरी लोगों के संघर्ष के प्रति वचनबद्ध'20 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस शांति प्रक्रिया रुकी नहीं है : पाकिस्तान18 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस चुनौतियाँ भरा राजनीतिक सफ़र06 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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