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सोमवार, 29 सितंबर, 2008 को 18:32 GMT तक के समाचार
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मालेगाँव में धमाका, चार की मौत
मालेगाँव में वर्ष 2006 में भी धमाके हुए थे
महाराष्ट्र के मालेगाँव शहर में हुए धमाके में चार लोगों की मौत हो गई है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं.

मालेगाँव पुलिस कंट्रोल रुम के अनुसार घायलों में 14-15 लोगों की हालत गंभीर है.

घायलों में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के एक अधिकारी वीरेश प्रभु भी है. जिन्हें गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती कराया गया है.

हालांकि पुलिस ने घायलों की संख्या के बारे में कुछ नहीं कहा है लेकिन समाचार एजेंसियों का कहना है कि घायलों की संख्या 70 तक है.

घायलों को शहर के चार अस्पतालों में भर्ती किया गया है.

वहाँ रात का कर्फ़्यू लगा दिया गया है.

धमाका

पुलिस के अनुसार धमाका रात क़रीब साढ़े नौ बजे भीखू चौक पर नूरानी मस्जिद के बाहर हुआ.

जहाँ धमाका हुआ वहाँ एक मोटरसाइकिल मिली है और आशंका जताई जा रही है कि विस्फोटक उसी में रखा गया होगा.

धमाके के बाद वहाँ अफ़रा-तफ़री मच गई.

बाद में मस्जिद के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए.

नाराज़ लोगों की पुलिस वालों से भी झड़प हुई है और मालेगाँव पुलिस कंट्रोल रूम ने ख़बर दी है कि भीड़ ने पुलिस पर पथराव भी किया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री और उपमुख्यमंत्री आरआर पाटिल के हवाले से बताया है कि विस्फोट के बाद वहाँ कोई 20 हज़ार लोग जमा हो गए थे.

आरआर पाटिल के अनुसार राज्य सरकार ने आतंक निरोधक दस्ते के जवानों को मालेगाँव रवाना किया है.

मालेगाँव में 2006 में हुआ विस्फोट (फ़ाइल फ़ोटो)
मालेगाँव में 2006 में हुए विस्फोट की जाँच सीबीआई कर रही है

इसके अलावा फ़ोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी वहाँ भेजी गई है.

पीटीआई के अनुसार इस पथराव में आईपीएस अधिकारी वीरेश प्रभु के अलावा छह पुलिसकर्मी घायल हुए हैं.

विस्फोट से और पथराव से घायल हुए लोगों को शहर के चार अस्पतालों में भर्ती करवाया गया है.

पुलिस ने अब तक नहीं बताया है कि विस्फोट कैसे हुआ.

शुरु में पुलिस ने कहा था कि धमाका गैस सिलेंडर फटने की वजह से हुआ. लेकिन घायलों का इलाज करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि चोट बम विस्फोट की वजह से लगी हुई दिखती है.

लेकिन बीबीसी ऊर्दू की संवाददाता रेहाना बस्तीवाला के अनुसार फ़रहान अस्पताल के डॉक्टर आरिफ़ फ़राज़ अहमद ने बताया कि घायलों की हालत देखने से यही पता चलता है कि उनकी चोट बम धमाके की वजह से है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक अन्य डॉक्टर भरत वाघ के हवाले से कहा है कि लगता है कि घायलों को बम से निकले छर्रों से चोट लगी है.

संवेदनशील

मालेगाँव सांप्रदायिक रूप से काफ़ी संवेदनशील शहर है.

वर्ष 2006 में सितंबर में ही यहाँ धमाके हुए थे, जिसमें 38 लोग मारे गए थे.

वह घटना भी एक मस्जिद के बाहर हुई थी.

मालेगाँव की सात लाख की आबादी में कोई 70 प्रतिशत लोग मुसलमान हैं.

कपड़ा मिलों वाले इस शहर में हिंदू-मुस्लिम दंगों का भी एक इतिहास रहा है.

शनिवार को ही दिल्ली के महरौली इलाक़े में भी धमाका हुआ था जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और 22 लोग घायल हुए थे.

इस बीच लगभग इसी समय गुजरात के साबरकाँठा ज़िले के मोडासा शहर में एक विस्फोट हुआ है.

मुस्लिम बहुल इलाक़े में हुए इस विस्फोट में दो लोगों के मारे जाने और सात लोगों के घायल होने की ख़बरें हैं.

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