|
उड़ीसाः एक की मौत, स्थिति तनावपूर्ण | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उड़ीसा के कंधमाल ज़िले में गुरुवार को सिरसापंगा गांव में दो गुटों के बीच हुए हिंसक संघर्ष में एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया. राज्य का यह ज़िला एक बार फिर हिंसा की चपेट में है. बुधवार की रात उग्र भीड़ ने ज़िले में कम से कम 40 घरों और एक गिरजाघर पर हमला किया था. इसके बाद भारी तादाद में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई थी पर हिंसक घटनाओं को पूरी तरह से रोका नहीं जा सका है. गुरुवार को भी हिंसा हुई है. सिरसापंगा गांव से लगे एक अन्य गांव के लोगों ने गुरुवार को हथियारों के साथ सिरसापंगा पर हमला कर दिया. हमले में 10 देसी बमों का इस्तेमाल किया गया और क़रीब छह घरों में आग लगा दी गई. जब हमलावर गांव के लोग लौट रहे थे तो उनमें से पीछे छूट गए एक व्यक्ति की सिरसापंगा गांव के लोगों ने काट कर हत्या कर दी. आदिवासी बनाम दलित चिंताजनक बात यह है कि इस क्षेत्र में हिंसा अब हिंदुओं और ईसाइयों के बीच नहीं, बल्कि आदिवासियों और दलितों के बीच होती नज़र आ रही है. गुरुवार की हिंसा में एक ओर कंध आदिवासी जाति के लोग थे तो दूसरी ओर पाड़ा जाति के दलित थे. इनमें हिंदु और ईसाई, दोनों शामिल थे. गुरुवार की हिंसा में मारा गया व्यक्ति हिंदु दलित जाति का है. बुधवार की हिंसा में भी जिन 40 घरों में आग लगा दी गई थी उनमें से आधे से ज़्यादा हिंदु दलितों के थे.
इस इलाके में कर्फ़्यू के बावजूद हिंसा की घटनाओं को रोका नहीं जा सका है और स्थिति यह है कि जी-तोड़ कोशिश के बावजूद पुलिस रास्ते के अवरोधों को हटाकर उन भीतरी इलाकों में नहीं जा पा रही है जहाँ हिंसा ज़्यादा हो रही है. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सीआरपीएफ़ की सात और कंपनियाँ प्रभावित इलाकों में भेजी जा रही है. केंद्र बनाम राज्य उधर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने गुरुवार को केंद्र सरकार को लिखित जवाब देते हुए कहा है कि छिटपुट हिंसाओं के अलावा क़ानून व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है. नवीन पटनायक केंद्र सरकार के उस पत्र का जवाब दे रहे थे जिसमें केंद्र ने राज्य सरकार को ज़िले की चिंताजनक स्थिति पर तुरंत काबू पाने की हिदायत दी थी. साथ ही मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिस तादाद में केंद्रीय सुरक्षाबलों की ज़रूरत है, उसे केंद्र सरकार ने नकार दिया है. राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से कंधमाल की स्थिति को संभालने के लिए 10 कंपनी सीआरपीएफ़ की माँग की थी जिसे केंद्रीय गृह विभाग से यह कहकर खारिज कर दिया कि राज्य सरकार को पहले से मिली हुई 23 कंपनी सीआरपीएफ़ का उचित इस्तेमाल करना चाहिए. उड़ीसा संप्रदायिक तौर पर संवेदनशील प्रदेश है और यहाँ ईसाइयों पर पहले भी हमले होते रहे हैं. 22 जनवरी 1999 को ऑस्ट्रेलियाई ईसाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो बेटों के आग में झुलसे हुए शव क्योंझर के मनोहपुर गाँव में उनकी जीप में पाए गए थे. | इससे जुड़ी ख़बरें उड़ीसा में ताज़ा हिंसा, गिरजाघर पर हमला25 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस उड़ीसा-कर्नाटक पर सख़्त निर्देश जारी19 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस उड़ीसा में पुलिस थाने पर हमला16 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस धर्मांतरण के सवाल पर जारी है रस्साकशी01 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस हिंसा प्रभावितों को सहायता की पेशकश01 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस उड़ीसा में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई07 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'विहिप को अस्थि यात्रा नहीं निकालने देंगे'04 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||