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श्रीनगर में सीआरपीएफ़ जवान की हत्या | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीनगर में चरमपंथियों ने केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के एक जवान की गोली मारकर हत्या कर दी है. उधर शुक्रवार को श्रीनगर में भड़की हिंसा के बाद शनिवार को भी शोपिया और बारामूला में कर्फ़्यू लगातार दूसरे दिन भी जारी है. जवान की हत्या तब शनिवार दोपहर को एक व्यस्त इलाक़े में बिल्कुल पास से गोली मार की गई. जवान को तत्काल अस्पताल ले जाया गया जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया. महीनों के अंतराल के बाद श्रीनगर में चरमपंथी हिंसा की यह पहली घटना है. पुलिस का कहना है कि उसने श्रीनगर के निकट रावलपुरा में एक टिफ़िन बम को निष्क्रिय कर दिया है, जिसे एक पेड़ पर पत्तों के बीच छिपाकर रखा गया था. कर्फ़्यू भारत प्रशासित कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से लगे दो इलाकों, शोपिया और बारामूला में कर्फ़्यू लगातार दूसरे दिन भी जारी है. दोनों ही इलाकों में शुक्रवार को भड़की हिंसा के बाद कर्फ़्यू लगा दिया गया था पर अभी भी माहौल पूरी तरह से शांत नहीं है इसलिए कर्फ़्यू में कोई ढील नहीं दी गई है. इन इलाकों में शुक्रवार को कश्मीर की 'आज़ादी' की माँग को लेकर बंद का आहवान किया गया था. इस दौरान शोपियाँ इलाक़े में प्रदर्शन कर रही भीड़ पर पुलिस की गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई और कुछ अन्य घायल हो गए. माहौल बिगड़ता देख प्रशासन को शोपियाँ और बारामूला में कर्फ़्यू लगाना पड़ा. पुलिस कार्रवाई शुक्रवार को राजधानी श्रीनगर के लाल चौक में भी कुछ प्रदर्शन हुए जिन्हें रोकने के लिए पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़े और लाठियाँ चलाईं.
वैसे घाटी के कई इलाकों में प्रदर्शनों की ख़बरें आईं पर अन्य जगहों से किसी अप्रिय घटना की ख़बर नहीं है. कश्मीर में बंद का आह्वान अलगाववादियों की समन्वय समिति ने किया था. शुक्रवार को दोपहर की नमाज़ के बाद घाटी में जगह-जगह प्रदर्शन हुए. ग़ौरतलब है कि अमरनाथ ज़मीन विवाद को लेकर शुरू हुए विरोध ने घाटी में आज़ादी की मांग का रूप ले लिया. इसके तहत अगस्त के महीने में अलगाववादी नेताओं के नेतृत्व में भारत प्रशासित कश्मीर में अनेक मार्च और रैलियाँ आयोजित की गई थी. आंदोलन पिछले महीने के आख़िर में भारत प्रशासित कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के लाल चौक पर अलगाववादियों की प्रस्तावित रैली के पहले ही भारतीय प्रशासन ने घाटी में कर्फ़्यू लगा दिया था जो नौ दिनों तक चला. अलगावादी नेताओं ने ऐलान किया है कि वे छह अक्तूबर को लाल चौक के लिए मार्च का आयोजन करेंगे. इससे पहले 31 अगस्त को जम्मू कश्मीर में अमरनाथ संघर्ष समिति और राज्य सरकार के बीच अमरनाथ यात्रा के लिए ज़मीन को लेकर चल रहे विवाद पर सहमति के साथ समिति ने आंदोलन वापस लेने की घोषणा की थी. इस समझौते के तहत श्री अमरनाथ मंदिर बोर्ड को कश्मीर घाटी में अमरनाथ यात्रा के दौरान 40 हेक्टेयर ज़मीन दी जाएगी लेकिन इस पर बोर्ड का मालिकाना हक नहीं होगा. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने इस समझौते की आलोचना की थी लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इसका स्वागत किया था. |
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