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मुशर्रफ़ पर महाभियोग चलाने की तैयारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में सत्तारूढ़ गठबंधन की सोमवार को बैठक हो रही है जिसमें राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ महाभियोग चलाने की योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने कई बार संविधान का उल्लंघन किया है और अमरीका से मिलने वाली करोड़ों डॉलर की सहायता का दुरुपयोग भी किया है. सत्तारूढ़ गठबंधन ने मुशर्रफ़ से अपने पद से इस्तीफ़ा देने को कहा है. नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) यानी पीएमएलएन के नेता इशरार डार का कहना था कि अब भी समय है कि मुशर्रफ़ अपना इस्तीफ़ा सौंप दें. हालाँकि अभी तक मुशर्रफ़ की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. मुश्किल समय उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को अब इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. यह उनके लिए भी बेहतर है और पाकिस्तान के लिए भी क्योंकि संसद में दो तिहाई से ज़्यादा लोग उनके ख़िलाफ़ हैं." विश्लेषकों का कहना है कि ये सप्ताह राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के लिए मुश्किलों भरा साबित होनेवाला है. सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ आरोप पत्र तैयार कर रखा है.
हालांकि राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ संविधान के उल्लंघन के आरोप गुरुवार से पहले नहीं पेश किए जाएंगे. इसके पहले सरकार चार प्रांतीय असेंबली में राष्ट्रपति से विश्वास मत हासिल करने के लिए मतदान करेंगी. हालांकि इसका महाभियोग पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा लेकिन इससे राष्ट्रपति मुशर्रफ़ पर इस्तीफ़ा देने के लिए दबाव बढ़ेगा. इस्तीफ़े का दबाव सरकार का कहना है कि उसके पास महाभियोग चलाने के लिए आवश्यक बहुमत हासिल है लेकिन कुछ नेताओं का कहना है कि अपमानित होने की बजाए उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के सामाने तीन विकल्प हैं. एक तो वो महाभियोग का सामना करें, उनके समर्थक भी ऐसा चाहते हैं. दूसरे वो इस्तीफ़ा दे दें और तीसरा ये कि वो एक बड़ा जोखिम उठाएँ और सरकार को बर्ख़ास्त कर दें और नेशनल असेंबली को भंग कर दें. लेकिन ऐसा करने के लिए उन्हें सेना के समर्थन की आवश्यकता होगी लेकिन अभी तक पाकिस्तानी सेना ने कोई संकेत नहीं दिए हैं कि वह किस तरफ है. ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के दोनों सदनों में सांसदों की कुल संख्या 442 है और ऐसे में महाभियोग पारित कराने के लिए दो तिहाई यानी 257 सांसदों के समर्थन की ज़रूरत होगी. |
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