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आईएईए की मंज़ूरी ऐतिहासिक: मनमोहन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए की मंज़ूरी को ऐतिहासिक क़रार दिया है. अमरीका ने इस समझौते पर आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता जताई है. कोलंबो में दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के सम्मेलन में हिस्सा लेने गए मनमोहन सिंह ने कहा, "मैं यह सुन कर काफी खुश हूँ कि आईएईए के निदेशक मंडल ने भारत के लिए विशेष तौर पर तैयार किए गए निगरानी समझौते को सर्वसहमति से स्वीकार कर लिया है." उनका कहना था, "यह असैनिक परमाणु क्षेत्र में हमारे विदेशी मित्रों के साथ सहयोग की बहाली के लिए महत्वपूर्ण है." मनमोहन सिंह ने कहा, "निरंतर विकास और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण इस्तेमाल अहम भूमिका अदा करेगा." उन्होंने असैनिक परमाणु रिएक्टरों की निगरानी से जुड़े समझौते को मंज़ूरी दिलाने के लिए आईएईए के महानिदेशक अल बरादेई का विशेष तौर पर ज़िक्र करते हुए कहा उन्होंने इस इसमें अहम भूमिका निभाई. अमरीका की प्रतिक्रिया भारत में अमरीका के राजदूत डेविड मलफ़ोर्ड ने निगरानी समझौते की मंज़ूरी को भारत-अमरीका असैनिक परमाणु सहयोग समझौते के अमल की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम बताया है. उन्होंने कहा कि अब अमरीका परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) के देशों से भारत को परमाणु व्यापार में विशेष छूट दिलाने और अमरीकी कॉंग्रेस से असैनिक परमाणु समझौते को मंज़ूरी दिलाने की दिशा में विशेष प्रयास करेगा. आईएईए में भारत की ओर से समझौते के पक्ष में पैरवी कर रहे परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल काकोदकर ने कहा कि अब अगला लक्ष्य एनएसजी से समझौते को मंज़ूरी दिलाना है. उनका कहना था, "हम हम सभी देशों से संपर्क कर रहे हैं. कोशिश है कि बिना शर्त भारत को अंतरराष्ट्रीय परमाणु व्यापार करने वाले देशों की बिरादरी में जगह मिल जाए." भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तख़त नहीं किए हैं, इसलिए एनएसजी के साथ उसे विशेष अनुमति लेने की ज़रुरत है. |
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