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आईएईए के सामने भारत ने पक्ष रखा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के साथ परमाणु समझौते के मुद्दे पर भारत ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सामने अपना पक्ष रखा. लेकिन एक अगस्त को विशेष सत्र में आईएईए बोर्ड की मंज़ूरी के बाद ही परमाणु समझौते को लागू करने का मामला आगे बढ़ पाएगा. वियना में आईएईए के गवर्निंग बोर्ड के 35 सदस्यों के सामने भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने अपना पक्ष रखा. शिवशंकर मेनन ने सदस्यों के सवालों के जवाब दिए. भारत-अमरीका असैनिक परमाणु समझौते के तहत आईएईए और भारत के बीच परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए समझौता होना ज़रूरी है, जिसके मुताबिक़ आईएईए भारत के असैनिक परमाणु संस्थानों पर निगरानी रखेगा. इस बीच अमरीका के राजनीतिक मामलों के सहायक विदेश मंत्री विलियम बर्न्स भी वियना में आईएईए के मुख्यालय पहुँचे हैं. वे अलग से आईएईए के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात करेंगे. अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शॉन मैक्कॉर्मेक ने पत्रकारों को बताया, "शुक्रवार को बर्न्स असैन्य परमाणु समझौते के बारे में आईएईए में कुछ विचार विमर्श करेंगे." प्रक्रिया आईएईए बोर्ड के 35 सदस्य देशों में से 26 ऐसे हैं जो 45 सदस्यों वाले न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) यानी परमाणु ईंधन और तकनीक निर्यात करने वाले गुट के भी सदस्य हैं.
आईएईए की एक अगस्त की बैठक में अगर भारत के मामले पर आम सहमति नहीं बनती तो फ़ैसला मतदान कर बहुमत के आधार पर होगा. आईएईए में भारत के मामले पर फ़ैसला होने के बाद ही भारत-अमरीका परमाणु समझौते का मुद्दा एनएसजी के पास जाएगा. भारत के परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर न करने के बावजूद अगर एनएसजी फ़ैसला करता है कि भारत को परमाणु ईंधन और तकनीक निर्यात की जाए, तभी भारत-अमरीका परमाणु संधि 123 समझौते के अंतिम और निर्णायक चरण में अमरीकी संसद में पहुँचेगी. एनएसजी का फ़ैसला सर्वसम्मति से होता है. इस तरह अगर एनएसजी के किसी भी देश को इस समझौते पर आपत्ति हो और वह इसका विरोध दर्ज कराए तो भारत के लिए मामला अटक सकता है. ग़ौरतलब है कि जहाँ कई पश्चिमी देश भारत का एनएसजी में समर्थन करने का आश्वासन दे चुके हैं वहीं हाल में चीन ने भी सकारात्मक संकेत दिए हैं. |
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