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परमाणु संयंत्र की सुरक्षा पर बैठक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सोमवार से ऑस्ट्रिया की राजधानी वियाना में असैन्य परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा के मुद्दे पर होने वाली एक बैठक में भारत भी अपनी रिपोर्ट पेश करेगा. ये पहला मौक़ा होगा जब भारत परमाणु संयंत्रों के सुरक्षा से जुड़ी कोई रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश करेगा. दो हफ़्ते चलने वाली इस बैठक में दुनिया के 61 देश हिस्सा ले रहे हैं. इसी मौक़े पर भारत अपनी 200 पन्नों की रिपोर्ट रखेगा. इस रिपोर्ट के अलावा भारत उन 70 सवालों के जवाब भी देगा जो कि दूसरे देशों की तरफ़ से उठाए गए हैं. पूरा दिन भारत के नाम खास बात ये है कि दो हफ़्ते चलने वाले इस कनवेंशन में एक पूरा दिन भारत के नाम होगा. भारत की तरफ़ से परमाणु सुरक्षा के मुद्दों से जुड़ी ये रिपोर्ट परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड के अध्यक्ष एसके शर्मा पेश करेंगे. उनके साथ देश के अलग-अलग परमाणु संस्थानों से जुड़े 17 दूसरे अधिकारी भी इस बैठक में शामिल हो रहे हैं. परमाणु ऊर्जा नियामक आयोग के अध्यक्ष का कहना है, "वैसे तो पूरी दुनिया में परमाणु संयंत्र तमाम सुरक्षा ज़रूरतों को पूरा करते हुए काम कर रहे हैं लेकिन, इस बैठक के ज़रिए सभी देशों को परमाणु सुरक्षा के बारे में एक दूसरे की तकनीक जानने का पूरा मौक़ा मिलेगा. इससे परमाणु केंद्रों की सुरक्षा और पुख्ता की जा सकेगी." वियाना में होने वाली इस बैठक में दस-दस देशों के छह समूह बनाए गए हैं. जो इस 'कनवेंशन ऑफ न्यूक्लियर सेफ़्टी' में एक-एक कर अपनी अपनी रिपोर्ट रखेंगे. भारत में सात परमाणु ऊर्जा संयंत्र पूरी सुरक्षा के साथ काम कर रहे हैं. भारत 2005 में इस कनवेंशन का सदस्य बना था. पहली बार 17 अप्रैल को भारत अपनी रिपोर्ट पेश करेगा. |
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