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भ्रष्टाचार मामले पर सुनवाई 17 को | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सुप्रीम कोर्ट ने तय किया है कि ग़ाज़ियाबाद ज़िला अदालत में हुए कथित गबन और भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई जाँच की याचिका पर अब 17 जुलाई को खुली अदालत में सुनवाई होगी. ग़ाज़ियाबाद पुलिस इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक वर्तमान न्यायाधीश, इलाहाबाद, कोलकाता और उत्तरांचल उच्च न्यायलयों के 11 न्यायाधीशों और अधीनस्थ न्यायालयों के 24 जजों से इस मामले में उनका पक्ष जानने के लिए पूछताछ करना चाहती है. लेकिन अभी तक मुख्य न्यायाधीश ने अनुमति नहीं दी है और पुलिस से संभावित सवालों की सूची मांगी है. इलाहाबाद उच्च न्यायालय की निगरानी में ग़ाज़ियाबाद पुलिस पिछले छह महीने से इस मामले की जाँच कर रही है. लेकिन ग़ाज़ियाबाद बार एसोसिएशन इससे संतुष्ट नहीं है. ग़ाज़ियाबाद बार एसोसिएशन इससे संतुष्ट नहीं है. बार एसोसिएशन ने इस मामले की सीबीआई जाँच की मांग की थी. जिस पर पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आज चैम्बर में सुनवाई का फ़ैसला किया. याचिका कोर्ट ने इस मामले में अटार्नी जनरल की भी राय मांगी. लेकिन इस बीच न्यायिक जवाबदेही के लिए कार्यरत ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल ने एक और याचिका शनिवार को दाख़िल की. पूर्व क़ानून मंत्री और वरिष्ठ वकील शांति भूषण सोमवार को इस याचिका का अदालत में उल्लेख किया और ये तय हुआ कि अब बंद कमरे की बजाए खुली अदालत में 17 जुलाई को सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट के कई पूर्व न्यायाधीशों और न्यायविदों ने इस मामले में जाँच में विलम्ब पर चिंता प्रकट करते हुए निष्पक्ष जाँच पर बल दिया है और कहा है कि अदालत को जाँच के काम में कोई रोक-टोक नहीं करनी चाहिए. भारत के न्यायपालिका के इतिहास में यह पहला अवसर है जब एक साथ 36 जजों पर भ्रष्टाचार, गबन और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लग रहे हैं. |
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