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सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ेगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में लंबित मुक़दमों को निपटाने और लोगों को जल्दी न्याय देने के मक़सद से केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है. सुप्रीम कोर्ट में इस समय मुख्य न्यायाधीश के अलावा 25 न्यायाधीश नियुक्त किए जा सकते हैं. सरकार की योजना है कि मुख्य न्यायाधीश के अलावा नियुक्त होने वाले जजों की संख्या बढ़ाकर 30 कर दी जाए. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को कैबिनेट की बैठक में सरकार ने इस प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी. इस प्रस्ताव को अमल में लाने के लिए ज़ल्दी ही 'सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) क़ानून 1956' में संशोधन का विधेयक संसद में पेश किया जाएगा. शीघ्र न्याय के लिए.. एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा, "जजों की संख्या में बढ़ोत्तरी से सुप्रीम कोर्ट को बेहतर और प्रभावी तरीक़े से काम करने में सहूलियत होगी और वादियों को शीघ्र न्याय मिल सकेगा." भारतीय सुप्रीम कोर्ट की शुरुआत आठ जजों के साथ 1950 में हुई थी. समय-समय पर सरकार जजों की संख्या बढ़ाती रही है. अंतिम बार यह संख्या 1986 में बढ़ाई गई थी. उस समय सुप्रीम कोर्ट में 18 न्यायाधीश होते थे जिसे बढ़ाकर 26 किया गया था. समाचार एजेंसियों का कहना है कि इस साल जनवरी तक सुप्रीम कोर्ट में क़रीब 47 हज़ार मुक़दमे लंबित थे. सरकार ने भी संसद में कहा था कि वर्ष 2006 के बाद से सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या 25 फ़ीसदी की दर से बढ़ी है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'पंजाब में सिख अल्पसंख्यक नहीं'15 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस 'निजी मामलों पर जनहित याचिका नहीं'07 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस 'शादी के बाद उपहार की माँग दहेज नहीं'01 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस जनहित याचिकाओं पर दिशा-निर्देश14 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस नंदीग्राम पर सीपीएम काडर की कशमकश14 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस नंदीग्राम कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की रोक13 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'टिप्पणी से बँधा नहीं है सुप्रीम कोर्ट'13 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस मोदी को अवमानना नोटिस12 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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