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'शादी के बाद उपहार की माँग दहेज नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि शादी के बाद ससुराल से पैसे या उपहार की माँग करना ग़लत हो सकता है लेकिन इसे दहेज नहीं माना जा सकता. सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक बच्चे के जन्म या किसी अन्य अवसर पर ससुराल से आर्थिक मदद या उपहार लेने को दहेज की श्रेणी में रख कर इसे अपराध साबित नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरिजीत पसायत और न्यायमूर्ति एस सदाशिवम की खंडपीठ ने एक महिला की याचिका पर ये फ़ैसला दिया. याचिका में महिला ने अपने सास-श्वसुर पर दहेज के नाम पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था. खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2001 के एक फ़ैसले को आधार बनाया और कहा कि सभी तरह की माँगों को दहेज की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता. खंडपीठ की ओर से फ़ैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत ने कहा, "इस तरह के भुगतान जो रीति-रिवाज का हिस्सा हैं और अलग-अलग समाजों में स्वीकार्य हैं, वो दहेज की श्रेणी में नहीं आते." मामला हरियाणा की एक अदालत से सुप्रीम कोर्ट में आया था. अदालत ने महिला के सास-श्वसुर, देवर और शादीशुदा ननद को तो बरी कर दिया था लेकिन उसके पति के ख़िलाफ़ मुक़दमा जारी रखा. हाईकोर्ट ने महिला के देवर और ननद के ख़िलाफ़ तो मामला ख़ारिज कर दिया लेकिन उसके सास-श्वसुर के ख़िलाफ़ मुक़दमा जारी रखने की अनुमति दी. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फ़ैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब निचली अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि उक्त महिला अपने पति के अधिक से अधिक रिश्तेदारों को अभियुक्त बनाना चाहती है तो हाईकोर्ट को ये फ़ैसला पलटने से पहले कुछ तर्क देना चाहिए था. | इससे जुड़ी ख़बरें दहेज विवाद में सिपाही की जान गई06 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'दहेज मामले से कोई लेना-देना नहीं'30 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस अब समिया का दहेज नहीं पहुँचेगा...20 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस 'कर्मचारी बताएँ, दहेज लिया या नहीं'03 मई, 2005 | भारत और पड़ोस भारत में कन्या भ्रूण हत्या:एक अभिशाप28 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस ताकि दहेज के लिए पैसै जुट सकें...23 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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