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असम के बाज़ार में बम विस्फोट, छह मरे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्वोत्तर भारत के असम राज्य में भूटान सीमा के पास एक साप्ताहिक हाट में शक्तिशाली बम विस्फोट में कम से कम छह ग्रामीणों की मौत हो गई है. कुमारीकाटा गाँव में हुए इस धमाके में करीब 80 लोग घायल भी हुए हैं और जिनमें दस की हालत पुलिस के मुताबिक़ गंभीर है. असम पुलिस के ख़ुफ़िया प्रमुख ख़ागेन शारमाह ने धमाके के लिए अलगाववादी संगठन उल्फ़ा (यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम) को दोषी ठहराया है. शारमाह ने बीबीसी से कहा, "इसमें कोई शक नहीं कि इस तरह का शक्तिशाली धमाका राज्य में सिर्फ़ एक ही समूह कर सकता है और वह उल्फ़ा है." उन्होंने कहा कि यह धमाका पिछले सप्ताह ही उल्फ़ा की 28वीं बटालियन के द्वारा युद्धविराम के ऐलान की 'सीधी प्रतिक्रिया' है. यह बटालियन पिछले साल सात सालों से उल्फ़ा का सबसे आक्रामक दस्ता रहा है और राज्य में हिंदी प्रदेश के लोगों की हत्या के अलावा गैस पाइपलाइनों को उड़ाने के लिए जवाबदेह रहा है. 'युद्धविराम की सीधी प्रतिक्रिया' इस बटालियन के कमांडरों ने पिछले महीने राज्य सरकार और भारतीय सेना के साथ गोपनीय रूप से बातचीत शुरू की थी जिसके बाद उन्होंने युद्धविराम की घोषणा की थी. लेकिन विदेश में बैठे उल्फ़ा के नेताओं को बटालियन की यह घोषणा नागवार गुज़री और उसके लड़ाके दस्ते के प्रमुख परेश बरूआ ने इसका जवाब देने की धमकी दी थी.
बरूआ ने बीबीसी से बातचीत में कहा था, "उल्फ़ा की किसी इकाई को सरकार से बात करने या युद्धविराम की घोषणा करने का कोई अधिकार नहीं है. ये लड़के (28वीं बटालियन) सरकार के जाल में फँस गए हैं." कुमारीकाटा गाँव में हुए इस धमाके से पहले बुधवार को राज्य के नौगाँव ज़िले के हैबरगाँव इलाक़े में भी विस्फोट किया गया था जिसमें सात लोग ज़ख़्मी हुए थे. उल्फ़ा ने इस विस्फोट का न तो जवाबदेही ली है और न ही इससे इनकार किया है. मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने कहा, "बम धमाका तब किया गया जब बाज़ार में सैकड़ों ग्रामीण थे. यह एक गंभीर और निंदनीय हमला है." उन्होंने कहा कि उल्फ़ा के कई सशस्त्र लड़ाके सामान्य ज़िंदगी की ओर लौट रहे हैं तो ऐसे हालत में उसका जो थोड़ा-बहुत प्रभाव बचा है, उसे कायम रखने के लिए वह इस तरह के क़दम उठा रहा है. जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि घायलों को पास के सरकारी अस्पताल, सेना की तामुलपुर स्वास्थ्य इकाई और पास की दूसरी जगहों में भर्ती कराया गया है. गंभीर रूप से ज़ख़्मी हुए लोगों को राजधानी गुवाहटी भेजा गया है. वर्ष 1979 में अपने गठन के बाद से ही उल्फ़ा लड़ रहा है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण या टूट के कारण यह कमज़ोर पड़ा है. | इससे जुड़ी ख़बरें पूर्वोत्तर में कई जगह विस्फोट, 18 घायल08 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस उल्फ़ा के ख़िलाफ़ कार्रवाई में दो मारे गए07 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस टीवी चैनल ख़बर को साबित करे: अल्फ़ा30 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस अल्फा के ख़िलाफ़ सैनिक अभियान09 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस असम में हिंसक हमलों में 53 की मौत06 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस असम शांति वार्ता शुरु करने की कोशिश13 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस विद्रोही संगठनों पर पाबंदी की मियाद बढ़ी10 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस पूर्वोत्तर के विद्रोहियों पर बर्मा की कार्रवाई03 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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