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असम शांति वार्ता शुरु करने की कोशिश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
असम के विद्रोही संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम (अल्फ़ा) और केंद्र सरकार के बीच बातचीत दोबारा शुरु करने के लक्ष्य से अल्फ़ा के वार्ताकार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन से मिल रहे हैं. महत्वपूर्ण है कि ज्ञानपीठ और साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने वाली इंदिरा गोस्वामी अल्फ़ा की ओर से ये पहल कर रही हैं और उनका साथ दे रहे हैं रेबती फूकन जो अल्फ़ा प्रमुख परेश बरुआ के मित्र हैं. बीबीसी संवाददाता सुभीर भौमिक के अनुसार अल्फ़ा का कहना है कि वह तो वार्ता चाहता है और केंद्र सरकार ने ही बातचीत बंद कर वहाँ सैन्य अभियान शुरु किया है. भारत सरकार और असम के अलगाववादी संगठन अल्फ़ा के बीच सितंबर में कुछ हफ़्ते पुराना संघर्षविराम ख़त्म हो गया था और सेना को अल्फ़ा के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरु करने का आदेश दिया गया था. सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उस समय आरोप लगाया था कि कार्रवाई इसलिए शुरु हुई क्योंकि अल्फ़ा 'सॉफ़्ट टारगेट्स' यानि निर्दोष, असहाय लोगों को निशाना बना रहा था. क्यों अहम है मुलाकात? असम में पिछले दो दिनों में दो विस्फोट हुए हैं जिनसे कच्चे तेल की पाइपलाइनों को नुक़सान पहुँचा है. अधिकारियों का कहना है कि इन पाइपलाइनों से तेल की आपूर्ति को रोकना पड़ा है ताकि आग आसपास के तेल एकत्रित करनेवाले केंद्रों में न फैल जाए. धमाकों की वजह से लगी आग को बुझाने में घंटों लगे. पाइपलाइनों को बंद किए जाने से असम की रिफाइनरियों को तेल की आपूर्ति में घंटों बाधा पड़ी और पूरी मरम्मत होने में दो दिन लग सकते हैं. बीबीसी संवाददाता सुबीर भौमिक के अनुसार तेल रिफाइनरियों में काम करने वाले अधिकारियों को चिंता है कि यदि ऐसे धमाके होते रहे तो पाइपलाइन के भविष्य पर प्रश्न-चिन्ह लग सकता है. दो दिन पहले ही विद्रोहियों ने अर्धसैनिक बलों पर हमला किया था जिसमें तीन पुलिसकर्मी मारे गए थे और अनेक घायल हो गए थे. ग़ौरतलब है कि पिछले सप्ताह गुवाहाटी में हुए तीन बम धमाकों में 17 लोगों की मौत हो गई थी. बीबीसी संवाददाता सुबीर भौमिक का कहना है कि सोमवार की बातचीत के बाद यदि शांति वार्ता दोबारा शुरु होनी की उम्मीद रहती है तब तो अल्फ़ा ऐसे हमलों से परहेज़ कर सकता है. लेकिन उनका ये भी कहना है कि यदि ऐसा नहीं होता तो अल्फ़ा के हमले और बढ़ सकते हैं. |
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