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पुलिसवालों पर मच्छरों का हमला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड सशस्त्र पुलिस बल (जैप) के दो जवानों की मौत हो गई है जबकि 20 के करीब जवानों का इलाज राजधानी रांची के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है. चौंकिए मत. यह कोई माओवादी हमले की ख़बर नहीं है . इस बार पुलिस बल के जवानों को मच्छरों के हमले का सामना करना पड़ा है. डॉक्टरों की माने तो झारखंड सशस्त्र पुलिस बल के दो जवान, लालू गुरुंग और कुमार सुब्बा की मौत सलेब्रल मलेरिया के कारण हुई है जबकि रांची स्थित बल के अस्पताल में 15 जवानों को मलेरिया के कारण भर्ती किया गया है. जैप अस्पताल के चिकित्सक इन्द्र मोहन गुप्ता का कहना है की मलेरिया के कारण कुछ जवानों की हालत चिंताजनक बनी हुई है जिन्हें बेहतर इलाज के लिए राजेंद्र आयुर विज्ञानं संस्थान अस्पताल और अपोलो में भरती कराया गया है. मलेरिया से पीड़ित सभी जवानों को माओवादियों के ख़िलाफ़ पश्चिमी सिंगभूम के सारंडा जंगलों में चलाए जा रहे अभियान के लिए तैनात किया गया था. मलेरिया से परेशान कहा जा रहा है की वहां पर जवानों को किसी प्रकार की सुविधा नहीं मुहैया कराई गई थी जिस कारण उन्हें मच्छरों के कोप भाजन का शिकार होना पड़ा . झारखंड पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिलेश्वर पाण्डेय नें आरोप लगाया की माओवादियों के विरुद्ध चलाये जा रहे अभियान में शामिल जवानों को न तो मच्छरदानी मुहैया करायी जाती है और न ही मच्छरों से निपटने के लिए दूसरे कोई उपाय किए जाते हैं. इस कारण जवान बड़े पैमाने पर मलेरिया की चपेट में आ गए हैं. झारखंड सशस्त्र पुलिस बल की समादेष्टा तदाशा मिश्रा ने मलेरिया से उत्पन्न स्थिति का संज्ञान लेते हुए अपनी बटालियनों के दो कंपनी कमांडर स्तर के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. वहीं मामले की नज़ाकत को देखते हुए राज्य के पुलिस मुख्यालय ने एक आदेश जारी कर नक्सल विरोधी अभियान में शामिल और दुर्गम इलाकों में तैनात सभी पुलिस कर्मियों को 'मलेरिया किट ' प्रदान करने की हिदायत दी है. झारखंड के ज़्यादातर इलाके घने जंगलों और दुर्गम घाटियों से घिरे हुए हैं. मलेरिया से हर साल सैकडों लोगों की मौतें होतीं हैं . जिन इलाकों में नक्सालियों का प्रभाव है वोह घने जंगलों के बीचों बीच हैं. ख़ास तौर पर सारंडा के जंगलों की ऐसे ही कुछ चुनिन्दा दुर्गम इलाकों में गिनती होती है . सात सौ पहाडियों से घिरा हुआ सारंडा का इलाका एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा साल के पेडों का जंगल है. कुछ वर्षों पहले तक इन जंगलों में दिन के वक्त भी सूरज की रौशनी ज़मीन तक नहीं पहुँच पाती थी. इसके अलावा इन जंगलों में ज़हरीले सांप भी पाये जाते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें मलेरिया से मौतें रोकने का नया लक्ष्य26 अप्रैल, 2008 | विज्ञान अब मच्छर ही निपटेंगे मलेरिया से20 मार्च, 2007 | विज्ञान एचआईवी-एड्स और मलेरिया में संबंध08 दिसंबर, 2006 | विज्ञान नेपाल के एक ज़िले में रहस्यमय बीमारी31 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस मलेरिया का मुक़ाबला फफूंद के सहारे15 नवंबर, 2005 | विज्ञान कमी हो सकती है मलेरिया की दवाओं की09 नवंबर, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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